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GST 2.0 : खाने-पीने से लेकर दवाओं तक अब सब होगा सस्ता, जीएसटी में ऐतिहासिक सुधार

By Rajat Sharma

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GST 2.0 : सरकार जल्द ही वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) में बड़े बदलाव की तैयारी में है। प्रस्तावित जीएसटी 2.0 ढांचे के तहत अब सिर्फ दो टैक्स स्लैब – 5% और 18% – लाए जाएंगे। खास बात ये है कि बीमा प्रीमियम पर मौजूदा 18% टैक्स को घटाकर शून्य या 5% किया जा सकता है। इससे आम लोग, खासकर वरिष्ठ नागरिक और बीमा कंपनियां, सभी को फायदा होगा। आइए जानते हैं, इस नए ढांचे से आपकी जेब पर क्या असर पड़ेगा।

आम जरूरतों की चीजें होंगी सस्ती

जीएसटी 2.0 के तहत खाद्य पदार्थ, दवाइयां, चिकित्सा उपकरण, स्टेशनरी, शैक्षिक उत्पाद, टूथब्रश और बालों का तेल जैसी जरूरी चीजें या तो टैक्स-मुक्त होंगी या फिर 5% के स्लैब में आएंगी। इसके अलावा, टीवी, एयर कंडीशनर (एसी) और फ्रिज जैसी चीजों पर टैक्स 28% से घटकर 18% हो सकता है। सरकार ने ऑटोमोबाइल, हस्तशिल्प, कृषि उत्पाद, कपड़ा और उर्वरक जैसे क्षेत्रों को खास तवज्जो देने का फैसला किया है।

छोटी कारों पर टैक्स में भारी कटौती

अगर आप छोटी पेट्रोल या डीजल कार खरीदने का सोच रहे हैं, तो आपके लिए खुशखबरी है। इन कारों पर मौजूदा 28% टैक्स को घटाकर 18% किया जा सकता है। हाइब्रिड कारों और दोपहिया वाहनों पर भी टैक्स कम होने की उम्मीद है। इससे कारों की बिक्री में 15 से 20% की बढ़ोतरी हो सकती है।

लग्जरी कारों पर टैक्स में बदलाव

हाई-एंड इंजन वाली बड़ी कारों पर अभी 28% जीएसटी और 22% अतिरिक्त शुल्क के साथ कुल 50% टैक्स लगता है। इसे घटाकर 40% किया जा सकता है। हालांकि, सरकार इस बात पर विचार कर रही है कि क्या 40% के ऊपर कोई अतिरिक्त शुल्क लगाया जाए, ताकि टैक्स 43%-50% के बीच रहे।

जीएसटी सुधारों का मकसद

इन सुधारों का मुख्य उद्देश्य है रोजमर्रा की चीजों की कीमतों को कम करना। सीमेंट, चप्पल-जूते और अन्य खुदरा सामान सस्ते होने की उम्मीद है। इससे आम आदमी की जेब पर बोझ कम होगा और बाजार में मांग बढ़ेगी।

ट्रैक्टर और खाद्य पदार्थों पर राहत

ब्रोकरेज फर्म जेफरीज के मुताबिक, ट्रैक्टर पर मौजूदा 12% टैक्स को घटाकर 5% किया जा सकता है। खाद्य पदार्थों पर भी 12% की जगह 5% टैक्स लगेगा। एसी जैसे उत्पाद 18% स्लैब में आ सकते हैं।

मांग में 2.4 लाख करोड़ की बढ़ोतरी

जीएसटी सुधारों से बाजार में 2.4 लाख करोड़ रुपये की मांग बढ़ने का अनुमान है। टैक्स दरों में कटौती से निम्न आय वाले परिवारों को राहत मिलेगी। मॉर्गन स्टेनली के अनुसार, खुदरा महंगाई में 0.40% की कमी आ सकती है।

जीएसटी स्लैब का योगदान

वर्तमान में जीएसटी के चार स्लैब हैं। 5% स्लैब का राजस्व में 7% योगदान है, 18% स्लैब का 65%, 12% स्लैब का 5% और 28% स्लैब का 11% योगदान है। दो स्लैब लागू होने पर 12% स्लैब की 99% वस्तुएं 5% में और बाकी 18% में चली जाएंगी। 28% स्लैब की 90% वस्तुएं और सेवाएं 18% में आएंगी, जबकि सिर्फ 5-7 चीजें ही 40% की दर में रहेंगी। 2021-22 में औसत मासिक जीएसटी संग्रह 1.51 लाख करोड़ था, जो 2024-25 में बढ़कर 1.84 लाख करोड़ रुपये हो गया है।

नमकीन-केक पर विवाद खत्म

नए सरलीकृत स्लैब से नमकीन, पराठे, बन और केक जैसी चीजों पर टैक्स को लेकर होने वाले विवाद खत्म होंगे। पहले इनके सामग्री के आधार पर अलग-अलग टैक्स लगता था। हीरे और कीमती पत्थरों पर 0.25% और आभूषणों पर 3% की विशेष दरें बरकरार रहेंगी।

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