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Scoliosis In Children : जानें कैसे पहचानें बच्चों में स्कोलियोसिस और सही समय पर इलाज करें

By Rajat Sharma

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Scoliosis In Children : मानव शरीर में हड्डियों का बेहद महत्वपूर्ण स्थान है, और इनमें रीढ़ की हड्डी विशेष रूप से अहम मानी जाती है। रीढ़ की हड्डी की सही देखभाल न करना कई स्वास्थ्य समस्याओं का कारण बन सकता है।

स्कोलियोसिस एक ऐसी स्थिति है जिसमें रीढ़ की हड्डी असामान्य रूप से ‘S’ या ‘C’ आकार में मुड़ जाती है। यह समस्या अधिकतर बच्चों में 10 से 15 साल की उम्र के दौरान देखी जाती है, जब उनका शरीर तेजी से विकसित हो रहा होता है।

स्कोलियोसिस के प्रकार

इडियोपैथिक स्कोलियोसिस : सबसे आम प्रकार, जिसका कारण अज्ञात होता है।

जन्मजात स्कोलियोसिस : जन्म से ही कशेरुकी में होने वाली विकृतियों के कारण।

न्यूरोमस्कुलर स्कोलियोसिस : सेरेब्रल पाल्सी जैसी न्यूरोमस्कुलर स्थितियों से जुड़ा।

अपक्षयी स्कोलियोसिस : वयस्कों में रीढ़ की हड्डी में गिरावट के कारण विकसित।

स्कोलियोसिस के मुख्य कारण

इडियोपैथिक स्कोलियोसिस के कारण स्पष्ट नहीं हैं, लेकिन आनुवंशिकी एक अहम भूमिका निभा सकती है। कुछ जोखिम कारक इस प्रकार हैं:

आयु: यह समस्या अक्सर किशोरावस्था में विकसित होती है।

लिंग: लड़कियों में वक्र प्रगति की संभावना अधिक होती है।

पारिवारिक इतिहास: यदि परिवार में किसी को यह समस्या रही हो, तो जोखिम बढ़ जाता है।

लक्षण

स्कोलियोसिस की पहचान करना कभी-कभी मुश्किल हो सकता है क्योंकि शुरुआती लक्षण हल्के होते हैं। फिर भी कुछ संकेत होते हैं:

कंधों या कूल्हों का असामान्य रूप

गंभीर मामलों में पीठ दर्द, सांस लेने में कठिनाई या फेफड़ों के कार्य में कमी

निदान

स्कोलियोसिस का पता एक्स-रे और अन्य इमेजिंग परीक्षणों से चलता है। कॉब कोण के माध्यम से वक्र की गंभीरता मापी जाती है। आम तौर पर, 10 डिग्री से अधिक का वक्र स्कोलियोसिस माना जाता है।

उपचार

उपचार का चयन वक्र की गंभीरता, उम्र और विकास क्षमता पर निर्भर करता है। विकल्प इस प्रकार हैं:

निगरानी: हल्के मामलों (25 डिग्री से कम) में नियमित जांच पर्याप्त होती है।

ब्रेसिंग: बच्चों में मध्यम वक्र (25-40 डिग्री) के लिए ब्रेस पहनाना वक्र को बढ़ने से रोक सकता है।

सर्जरी: गंभीर वक्र (40-50 डिग्री से अधिक) में रीढ़ की हड्डी फ्यूजन सर्जरी की आवश्यकता हो सकती है।

हल्के स्कोलियोसिस वाले अधिकांश बच्चे सामान्य जीवन जी सकते हैं। मध्यम और गंभीर मामलों में ब्रेसिंग और सर्जरी जटिलताओं को रोकने में मदद करते हैं।

शारीरिक व्यायाम और फिजियोथैरेपी मुद्रा सुधारने और मांसपेशियों को मजबूत करने में सहायक होते हैं, जिससे जीवन की गुणवत्ता बेहतर बनती है।

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