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Ahoi Ashtami Date : जानें माता अहोई की विशेष पूजा, स्नान और व्रत रखने का सही समय

By Rajat Sharma

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Ahoi Ashtami Date : अहोई अष्टमी भारतीय त्योहारों में सबसे प्यारा व्रत माना जाता है। खासकर माता-पिता के लिए यह दिन बहुत ही खास है। इस दिन माता-पिता अपने बच्चों की लंबी उम्र और खुशहाली के लिए व्रत करते हैं।

अगर आप भी सोच रहे हैं कि कब रखा जाएगा अहोई अष्टमी व्रत और इस दिन किन परंपराओं का पालन करना चाहिए, तो यह आर्टिकल आपके लिए बहुत उपयोगी है।

अहोई अष्टमी का महत्व

अहोई अष्टमी व्रत विशेष रूप से माताओं द्वारा किया जाता है। कहा जाता है कि इस दिन व्रत करने से माता-पिता के बच्चों की लंबी उम्र, स्वास्थ्य और सुख-समृद्धि बनी रहती है। इस दिन माता भगवान अहोई की पूजा करती हैं और उनका आशीर्वाद मांगती हैं।

अहोई अष्टमी कब है?

अहोई अष्टमी भाद्रपद मास की कृष्ण पक्ष अष्टमी को मनाई जाती है। इस साल, यह व्रत 13 अक्टूबर 2025 को रखा जाएगा। इस दिन महिलाएं पूरे दिन व्रत करती हैं और शाम को अहोई माता की पूजा करती हैं।

अहोई अष्टमी की पूजा की परंपरा

स्नान और स्वच्छता

अहोई अष्टमी पर स्नान करना बहुत जरूरी है। विशेष रूप से अहोई माता की तस्वीर या चित्र की साफ-सफाई करके उन्हें स्नान कराते हैं।

पाठ और कथा

व्रत करने वाली माताएं अहोई माता की कथा पढ़ती हैं और उनकी स्तुति करती हैं। इसे पढ़ने से घर में सुख-शांति बनी रहती है।

आस-पड़ोस में प्रसाद वितरण

इस दिन लोग गरीबों और जरूरतमंदों को भोजन और प्रसाद बांटते हैं। ऐसा करने से माता अहोई की विशेष कृपा बनी रहती है।

अष्टमी के दिन का विशेष भोजन

व्रत करने के दौरान हल्का और शुद्ध भोजन किया जाता है। कई जगह मांगे हुए फल और मिठाइयाँ भी अहोई माता को अर्पित की जाती हैं।

अहोई अष्टमी का संकल्प

इस दिन व्रत रखने वाली माताएं अहोई माता से अपने बच्चों की लंबी उम्र और खुशहाली की कामना करती हैं। यह संकल्प पूरे दिन ध्यान, प्रार्थना और स्वच्छता के साथ रखा जाता है।

व्रत की आसान टिप्स

व्रत का समय सुबह से लेकर शाम तक रखा जाता है।

माता अहोई की फोटो या चित्र को साफ रखें।

व्रत के दौरान शुद्ध आहार लें।

कथा सुनना और पढ़ना शुभ माना जाता है।

प्रसाद में मिठाई और फल जरूर रखें।

अहोई अष्टमी व्रत का पालन करने से न केवल बच्चों का कल्याण होता है, बल्कि घर में सुख, शांति और समृद्धि भी बनी रहती है। इस वर्ष अपने घर में अहोई अष्टमी का व्रत अवश्य करें और माता अहोई का आशीर्वाद पाएं।

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