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देहरादून के पॉश इलाके में छिपी थीं विदेशी हसीनाएं, फर्जी आधार कार्ड देख पुलिस भी रह गई दंग

By Rajat Sharma

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सावधान! आपके पड़ोस में भी हो सकते हैं संदिग्ध, देहरादून पुलिस ने बेनकाब किया अंतरराष्ट्रीय सिंडिकेट

देहरादून (ब्यूरो): उत्तराखंड की राजधानी में ‘ऑपरेशन क्रैकडाउन’ के तहत पुलिस ने एक बड़े अंतरराष्ट्रीय घुसपैठ नेटवर्क का भंडाफोड़ किया है। रायपुर थाना पुलिस ने सांई कॉम्पलैक्स के एक फ्लैट में छापेमारी कर तीन विदेशी महिलाओं को दबोचा है, जो फर्जी भारतीय पहचान पत्रों के सहारे पिछले कई महीनों से अवैध रूप से रह रही थीं। पकड़ी गई महिलाओं में एक किर्गिस्तान और दो उज्बेकिस्तान की मूल निवासी हैं।

वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (एसएसपी) देहरादून प्रमेंद्र सिंह डोभाल के निर्देश पर बाहरी और संदिग्ध व्यक्तियों के सत्यापन के लिए चलाए जा रहे इस विशेष अभियान में यह कामयाबी मिली है। शनिवार, 28 मार्च 2026 को पुलिस टीम जब रायपुर स्थित सांई कॉम्पलैक्स की तीसरी मंजिल पर पहुंची, तो वहां मौजूद महिलाएं अपनी पहचान और भारत में रहने के वैध दस्तावेज पेश करने में नाकाम रहीं। गहन पूछताछ के बाद खुलासा हुआ कि इन महिलाओं ने भारतीय सिस्टम में सेंध लगाकर फर्जी आधार और पैन कार्ड तक बनवा लिए थे।

गिरफ्तार अभियुक्तों की पहचान 29 वर्षीय ईरीका (किर्गिस्तान), 30 वर्षीय करीना (उज्बेकिस्तान) और 32 वर्षीय निगोरा नीम (उज्बेकिस्तान) के रूप में हुई है। पुलिस को मौके से एक किर्गिस्तानी पासपोर्ट, तीन फर्जी आधार कार्ड, दो पैन कार्ड, एक किर्गिस्तानी नागरिकता कार्ड, स्टेट बैंक की दो पासबुक, सात मोबाइल फोन और पांच विदेशी मुद्रा के नोट बरामद हुए हैं। इन महिलाओं के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 318(4), 338, 336(3), 340(2) और इमिग्रेशन एंड फॉरेनर्स एक्ट 2025 की धारा 23 के तहत मुकदमा दर्ज कर लिया गया है।

जांच में सामने आया है कि किर्गिस्तान की ईरीका साल 2023 में एक साल के वैध वीजा पर भारत आई थी, लेकिन अवधि समाप्त होने के बावजूद वह वापस नहीं लौटी। वहीं उज्बेकिस्तान की करीना और निगोरा ने भारत में प्रवेश के लिए बेहद खतरनाक रास्ता चुना था। ये दोनों साल 2022 और 2023 में नेपाल सीमा के रास्ते अवैध रूप से भारतीय सीमा में दाखिल हुई थीं। दिल्ली में इन तीनों की मुलाकात हुई, जहां इन्होंने अपने स्थानीय संपर्कों के जरिए जाली भारतीय दस्तावेज तैयार करवाए।

पुलिस की पड़ताल में निगोरा नीम का पुराना आपराधिक इतिहास भी सामने आया है। निगोरा को इससे पहले बिहार पुलिस ने फर्जी दस्तावेजों के साथ अवैध प्रवास के आरोप में गिरफ्तार कर जेल भेजा था। जमानत पर बाहर आने के बाद उसने अपने देश वापस जाने के बजाय दोबारा पहचान बदलकर देहरादून में ठिकाना बना लिया। पिछले 6-7 महीनों से ये तीनों महिलाएं दून के अलग-अलग इलाकों में छिपकर रह रही थीं। पुलिस अब उन स्थानीय मददगारों की तलाश में जुटी है, जिन्होंने इनके जाली आधार और बैंक खाते खुलवाने में मदद की।

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