उत्तराखंड में ‘नो व्हीकल डे’ का ऐलान : सीएम धामी ने खुद के काफिले में भी की कटौती, मंत्रियों पर भी लागू
सरकारी अधिकारियों के लिए ‘एक अफसर एक गाड़ी’ नियम, धामी कैबिनेट ने ईंधन बचाने को लिया बड़ा फैसला
उत्तराखंड कैबिनेट के फैसलों ने सबको चौंकाया : सोना कम खरीदने और तेल की खपत घटाने की अपील
देहरादून (ब्यूरो)। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक ने राज्य में ऊर्जा संरक्षण और ईंधन की बचत के लिए बड़े सुधारों पर मुहर लगा दी है। रूस-यूक्रेन युद्ध और पश्चिम एशिया के तनाव से उपजे वैश्विक संकट को देखते हुए प्रदेश सरकार ने अब ‘युद्ध स्तर’ पर बचत का अभियान छेड़ने का निर्णय लिया है।
मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया है कि ईंधन की बढ़ती कीमतों और आयात पर निर्भरता कम करने के लिए अब सरकारी और निजी दोनों क्षेत्रों में बड़े बदलाव होंगे। कैबिनेट ने तय किया है कि मुख्यमंत्री और सभी मंत्रियों के वाहनों के काफिले (फ्लीट) में गाड़ियों की संख्या तत्काल प्रभाव से आधी कर दी जाएगी।
सप्ताह में एक दिन ‘नो व्हीकल डे’ के रूप में मनाया जाएगा, जिसमें खुद मुख्यमंत्री और मंत्री भी शामिल होंगे। इस दिन सभी लोग वर्क फ्रॉम होम के जरिए अपने कार्यों का निस्तारण करेंगे। आम जनता से भी अपील की गई है कि वे सप्ताह में एक दिन निजी वाहनों का त्याग कर सार्वजनिक परिवहन का उपयोग करें।
प्रशासनिक स्तर पर ईंधन की फिजूलखर्ची रोकने के लिए ‘एक अधिकारी, एक वाहन’ की नीति लागू कर दी गई है। अब जिन अफसरों के पास एक से ज्यादा विभाग हैं, वे एक दिन में केवल एक ही सरकारी गाड़ी का इस्तेमाल कर पाएंगे। परिवहन विभाग को निर्देश दिए गए हैं कि सार्वजनिक बसों के फेरे और क्षमता बढ़ाई जाए ताकि लोग बसों की ओर आकर्षित हों।
इलेक्ट्रिक वाहनों (EV) को बढ़ावा देने के लिए राज्य जल्द ही एक बेहद प्रभावी ‘नई ईवी पॉलिसी’ लाने जा रहा है। सरकार ने फैसला लिया है कि भविष्य में खरीदे जाने वाले कुल सरकारी वाहनों में से 50 प्रतिशत अनिवार्य रूप से इलेक्ट्रिक होंगे। इसके लिए पूरे प्रदेश में चार्जिंग स्टेशनों का एक बड़ा नेटवर्क प्राथमिकता पर तैयार किया जाएगा।
आर्थिक अनुशासन की दिशा में कदम उठाते हुए सरकारी विदेशी यात्राओं पर भी लगाम लगा दी गई है। अब केवल बेहद जरूरी काम के लिए ही विदेशी दौरे मंजूर किए जाएंगे। इसके बजाय राज्य के भीतर ‘विजिट माई स्टेट’ अभियान चलाकर घरेलू पर्यटन, वेलनेस और ईको-टूरिज्म को प्रमोट किया जाएगा।
उत्तराखंड को ‘वेडिंग डेस्टिनेशन’ के रूप में स्थापित करने के लिए सिंगल विंडो क्लीयरेंस की व्यवस्था तेज की जाएगी। सरकार का लक्ष्य प्रवासी भारतीयों को छुट्टियों के लिए उत्तराखंड बुलाना और स्थानीय उत्पादों की बिक्री बढ़ाने के लिए ‘मेड इन स्टेट’ अभियान को घर-घर तक पहुंचाना है।
कैबिनेट ने आम नागरिकों से एक साल तक सोने की खरीद को सीमित करने और खान-पान में खाद्य तेल की खपत घटाने की भी अनोखी अपील की है। स्कूलों, अस्पतालों और सरकारी कैंटीन में तेल के इस्तेमाल की समीक्षा होगी। होटलों और स्ट्रीट फूड वेंडर्स को ‘लो-ऑयल मेन्यू’ अपनाने के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है।
ऊर्जा के वैकल्पिक स्रोतों पर फोकस करते हुए ‘पीएम सूर्य घर योजना’ के तहत रूफटॉप सोलर को मिशन मोड पर लिया जाएगा। पीएनजी (PNG) गैस के कनेक्शन तेजी से दिए जाएंगे ताकि होटलों और सरकारी आवासों में एलपीजी पर निर्भरता कम हो सके। खनन और सौर ऊर्जा परियोजनाओं को अब मुख्य सचिव की अध्यक्षता वाली कमेटी 60 दिनों के भीतर मंजूरी देगी।
खेती के मोर्चे पर भी बदलाव की तैयारी है, जहां किसानों को अब ‘जीरो बजट फार्मिंग’ और प्राकृतिक खेती का विशेष प्रशिक्षण दिया जाएगा। उर्वरकों के असंतुलित उपयोग को कम करने के लिए मृदा स्वास्थ्य कार्ड और जागरूकता अभियानों पर सरकार अब पहले से अधिक निवेश करेगी।
कैबिनेट द्वारा लिए गये महत्वपूर्ण निर्णय
01-उत्तराखण्ड राज्य के पर्वतीय क्षेत्रों में स्वैच्छिक /आंशिक चकबंदी प्रोत्साहन नीति, 2026 के प्रख्यापन को कैबिनेट ने दी मंजूरी।
मंत्रिमंडल ने पर्वतीय क्षेत्रों में स्वैच्छिक/आंशिक चकबंदी प्रोत्साहन नीति को मंजूरी प्रदान कर दी है। इसके तहत पर्वतीय जिले के लिए टारगेट निर्धारित किए गए है। प्रत्येक पर्वतीय जिले में 10 गाँव का टारगेट रखा है। गांव के 75 प्रतिशत लोगों की सहमति होने पर चकबंदी समिति का गठन किया जाएगा। चकबंदी करने के लिए डिजिटल नक्शों का इस्तेमाल किया जाएगा। चकबंदी के उपरांत आपत्तियों के निस्तारण के लिए भी 120 दिनों की समय सीमा तय की गई है।
चकबंदी करने का मुख्य उद्देश्य कृषकों की विभिन्न स्थानों पर बिखरी हुई भूमि को किसी अन्य स्थान पर एक बड़े चक अर्थात खेत में परिवर्तित करना है। चकबंदी प्रकिया के माध्यम से किसानों के खेतों की संख्या कम होने के साथ ही उन्हें कृषि कार्य करने में काफी सरलता होती है। कृषकों के खेतों का आकार बड़ा हो जाने से वह कृषि संसाधनों का समुचित प्रयोग कर पाते है, जिसका सीधा प्रभाव कृषि उत्पादन पर पड़ता है। इससे सबसे बड़ा लाभ यह है कि किसानों के बीच विभिन्न प्रकार के आपसी विवाद कम हो जाते हैं।
02-उत्तराखण्ड राजस्व परिषद, समीक्षा अधिकारी एवं सहायक समीक्षा अधिकारी सेवा (संशोधन) नियमावली, 2026 के संशोधन को मंत्रीमण्डल की मंजूरी।
राजस्व विभाग के अंतर्गत राजस्व परिषद समीक्षा अधिकारी एवं सहायक समीक्षा अधिकारी सेवा संशोधन नियमावली 2026 में संशोधन को मंत्रिमंडल की मंजूरी दी है। इसके तहत कंप्यूटर टाइपिंग जो कि एक अधिमानी अहर्ता रखी गई थी। जिसके तहत सिर्फ कंप्यूटर का ज्ञान होना आवश्यक था। अब इसे क्वांटिफाई करते हुए 8,000 की-डिप्रेशन प्रति घंटा की टाइपिंग स्पीड होगी चाहिए। माइक्रोसोफ्ट ऑफिस का बेसिक ज्ञान , एवं विंडोज एंड इंटरनेट का भी ज्ञान होना जरूरी है।
03 सेलाकुई स्थित सगंध पौधा केंद्र (कैप) का नाम बदलकर परफ्यूमरी एवं सगंध अनुसंधान एवं विकास संस्थान (परफ्यूमरी एंड एरोमैटिक रिसर्च एंड डेवलपमेंट इंस्टिट्यूट) रखे जाने की कैबिनेट ने प्रदान की मंजूरी।
04- माननीय उच्चतम न्यायालय, नई दिल्ली के निर्णय के क्रम में न्याय विभाग के अंतर्गत रजिस्ट्रार न्यायालय एवं केस प्रबंधक का पद सृजित किये जाने के लिये मंत्रीमंडल ने दी मंजूरी।
05- चिकित्सा स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा विभाग, के अंतर्गत राजकीय मेडिकल कॉलेजों में कार्मिकों की कमी को दूर किये जाने हेतु संविदा पर संकाय सदस्यों को 03 वर्ष के लिये रखे जाने के लिये अबतक विभागीय मंत्री एवं मुख्यमंत्री का अनुमोदन अनिवार्य होता था। उक्त नियमों में संशोधन करते हुए कार्मिकों का चयन सचिव स्तर पर किये जाने का मंत्रीमंडल द्वारा दिया गया अनुमोदन।
06- चिकित्सा शिक्षा निदेशालय का ढाचा पुर्नगठित किये जाने पर कैबिनेट की मंजूरी।
चिकित्सा शिक्षा निदेशालय के ढांचे में पूर्व में 29 पद थे जिन्हें बढाते हुए 40 पद किये जाने का मंत्रीमंडल द्वारा अनुमोदन प्रदान किया गया है। चिकित्सा शिक्षा निदेशालय का ढांचा पुर्नगठित करते हुए वित्त नियंत्रक का 01, कनिष्ठ अभियंता 01, प्रशासनिक अधिकारी 01, लेखाकार 01, वरिष्ठ सहायक 01, कनिष्ठ सहायक 01 इसके अतिक्ति 04 मल्टी परपज वर्कर, 01 वाहन चालक के पदों का सृजन किया गया है।
07- राजकीय मेडिकल कॉलेज, श्रीनगर में कार्यरत संविदा, दैनिक वेतन, नियत वेतन एवं प्रबन्धन समिति आदि के माध्यम से कार्यरत कुल 277 कार्मिकों को समान कार्य-समान वेतन प्रदान किये जाने की कैबिनेट ने प्रदान की मंजूरी।
08- चिकित्सा स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभागान्तर्गत लैब टैक्नीशियन संवर्ग के ढाँचे को आई०पी०एच०एस० मानकानुसार पुनर्गठित किये जाने का कैबिनेट द्वारा लिया गया निर्णय। आई०पी०एच०एस० मानकानुसार 03 पदसोपान के अंतर्गत मेडिकल लैब टैक्नोलॉजिस्ट के 266, टैक्निकल ऑफिसर के 54, एवं चीफ टैक्निकल ऑफिसर के 25 पदों, इस प्रकार कुल 345 पदों को मानकानुसार पुनर्गठित किये जाने की मंजूरी।
09-महिला स्पोर्टस कॉलेज, लोहाघाट चम्पावत के सुचारू संचालन हेतु प्रधानाचार्य सहित कुल 16 पदों को सृजित करने का कैबिनेट द्वारा लिया गया निर्णय।
10- लघु जल विद्युत परियोजना विकास नीति, 2015 के कतिपय प्राविधानों में संशोधन किये जाने का मंत्रीमण्डल ने प्रदान किया अनुमोदन।
लघु जलविद्युत परियोजना विकास नीति 2015 में संशोधन करते हुए परफॉर्मेंस सिक्योरिटी को शून्य करने के प्रस्ताव पर मंजूरी। डेवलपर को फॉरेस्ट एनवायरनमेंट क्लीयरेंस मिल जाती है तो तब से वह कितने दिनों में कार्य शुरू करेगा। उसके लिए भी निश्चित समय सीमा तय की जायेगी।
11- ऊर्जा विभाग के अंतर्गत तीनों निगमों में निदेशक की नियुक्ति से संबंधित नियमावली में संशोधन करते हुए निदेशक मंडल में नियुक्त शब्द से नियुक्त शब्द को हटाए जाने पर मंत्रीमण्डल द्वारा प्रदान की गई मंजूरी। इस संबंध में पूर्व में नियमावली बनी थी, उसमें यह समस्या उत्पन्न हो रही थी कि इसमें निदेशक के चयन के लिए पूर्व में व्यवस्था रखी गई थी कि निदेशक मंडल में नियुक्त मुख्य अभियंता, महाप्रबंधक और उससे उच्च स्तर के अधिकारी इसमें पात्र होते थे जिसमें से अब निदेशक मंडल में नियुक्त निदेशक मंडल में नियुक्त शब्द को हटाने के प्रस्ताव पर मंत्रिमंडल द्वारा सहमति दी गई है।
12- उत्तराखण्ड अल्पसंख्यक शिक्षा अधिनियम को प्रभावी रूप से क्रियान्वयन किये जाने हेतु उत्तराखण्ड अल्पसंख्यक शैक्षणिक संस्थानों की मान्यता नियम-2026 प्रख्यापित किये जाने पर कैबिनेट ने दी मंजूरी। इस नियमावली के माध्यम से राज्य में अल्पसंख्यक मुस्लिम, जैन, ईसाई, बौद्ध, पारसी एवं सिख समुदाय के शैक्षणिक विकास एवं नवीन संस्थानों की मान्यता, नवीनीकरण और मान्यता की समाप्ति इत्यादि प्रक्रिया को ऑनलाईन माध्यम से प्रबंधित करने का प्रावधान किया गया है।
13- पंचायतीराज विभाग के अन्तर्गत पंचायत भवन विहीन ग्राम पंचायतों में राज्य सैक्टर के अन्तर्गत पंचायत भवन निर्माण हेतु वर्तमान में प्रचलित दर ₹ 10 लाख प्रति पंचायत घर को संशोधित करते हुए ₹ 20 लाख प्रति पंचायत घर निर्धारित किये जाने पर मंत्रीमण्डल का अनुमोदन।
14-उत्तराखण्ड की पंचम विधान सभा के वर्ष 2026 का विशेष सत्र का तत्काल प्रभाव से सत्रावसान किये जाने का मंत्रीमण्डल द्वारा किया गया अनुमोदन।
15- गृह विभाग के अंतर्गत विधि विज्ञान प्रयोगशाला विभाग में कुल 15 पदों को सृजित करने का मंत्रीमण्डल ने दिया अनुमोदन। जिनमें 05 वैज्ञानिक अधिकारी, 05 ज्येष्ठ वैज्ञानिक अधिकारी तथा 05 प्रयोगशाला सहायक होंगे।
16- उत्तराखण्ड पर्यटन यात्रा व्यवसाय पंजीकरण नियमावली में संशोधन पर कैबिनेट की मंजूरी। पूर्व में होमस्टे एवं ब्रेड एण्ड ब्रेकफास्ट के लिये अलग-अलग नियमावलियां थी। इन्हें संकलित करते हुए एक नियमावली प्रस्तावित की गई थी जिसे कैबिनेट द्वारा मंजूरी प्रदान करते हुए होमस्टे के तहत कमरों की संख्या को 05 से बढाकर 08 किया गया है। रिन्यूअल की व्यवस्था को सरल बनाते हुए रिन्यूअल फीस को ऑनलाईन भुगतान किये जाने पर ऑटोमैटिक रिन्यूलअल माना जायेगा।






