अक्षय तृतीया पर विशेष संयोग : परशुराम मंदिर में यजुर्वेदीय पद्धति से हुआ पंचस्नान और हवन
देहरादून (ब्यूरो)। राजधानी के खुड़बुड़ा मोहल्ला स्थित श्री परशुराम मंदिर में रविवार को भगवान परशुराम जन्मोत्सव की धूम रही। श्री परशुराम चतुर्वेद विद्यालय के आचार्यों और बटुकों ने सुबह 10:00 बजे से ही मंदिर परिसर को वैदिक ऋचाओं से गुंजायमान कर दिया। अक्षय तृतीया के पावन अवसर पर भगवान विष्णु के छठे अवतार का पूजन यजुर्वेदीय पदवाती पद्धति से संपन्न हुआ।
परशुराम चतुर्वेद विद्यालय के छात्रों ने पूरी श्रद्धा के साथ भगवान परशुराम की मूर्ति का पंचस्नान कराया। इसके बाद विशेष अभिषेक और वैदिक मंत्रों के साथ विधिवत पाठ किया गया। मंदिर में उपस्थित श्रद्धालुओं के लिए यह क्षण आध्यात्मिक ऊर्जा से लबरेज रहा।
महामंत्री गौरव बक्शी ने कार्यक्रम की विस्तृत जानकारी साझा की। उन्होंने बताया कि सुबह के अभिषेक के बाद दोपहर 12:00 बजे मुख्य हवन कार्यक्रम का आयोजन हुआ। सभा के अध्यक्ष आचार्य पवन कुमार शर्मा के सानिध्य में अग्नि प्रज्वलित की गई। आहुतियों के साथ विश्व शांति और लोक कल्याण की कामना की गई।
हवन के दौरान समाज के कई गणमान्य लोग मौजूद रहे। इनमें श्री दिनेश कालिया, बी एम शर्मा और जे जे शर्मा ने आहुतियां डालीं। साथ ही प्रमोद मेहता, अभिलाष शर्मा, रमा गौड़ और डी डी अरोड़ा सहित सभा के अन्य पदाधिकारियों ने भी अपनी उपस्थिति दर्ज कराई। सभी ने एक-दूसरे को परशुराम जन्मोत्सव की मंगलकामनाएं दीं।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस वर्ष परशुराम जयंती का महत्व इसलिए भी बढ़ गया है क्योंकि यह अक्षय तृतीया के साथ दुर्लभ संयोग बना रही है। पौराणिक कथाओं में परशुराम जी को सात चिरंजीवियों में से एक माना गया है। वह त्रेतायुग और द्वापरयुग दोनों में मौजूद थे। उन्होंने ही भीष्म, द्रोण और कर्ण जैसे महान योद्धाओं को शस्त्र विद्या प्रदान की थी।
देहरादून के इस ऐतिहासिक मंदिर में आयोजित कार्यक्रम में न केवल धार्मिक अनुष्ठान हुए, बल्कि सनातन परंपराओं के संरक्षण का संकल्प भी लिया गया। कार्यक्रम के अंत में उपस्थित भक्तों के बीच प्रसाद वितरण किया गया। सभा के पदाधिकारियों ने युवाओं से भगवान परशुराम के न्याय और अनुशासन के मार्ग पर चलने का आह्वान किया।






