सीएम आवास में मात्र 45 दिनों में पैदा हुआ 5 क्विंटल शहद, अब पूरे प्रदेश के लिए बनेगी नई पॉलिसी
देहरादून। उत्तराखंड के मुख्यमंत्री आवास परिसर में इस बार शहद उत्पादन ने रिकॉर्ड तोड़ आंकड़े पेश किए हैं।शनिवार को मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने आवास परिसर में शहद निकालने (हनी एक्सट्रैक्शन) की प्रक्रिया का खुद निरीक्षण किया। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, इस साल महज 45 दिनों के भीतर परिसर में 520 किलोग्राम उच्च गुणवत्ता वाले शहद का उत्पादन हुआ है।
मुख्यमंत्री ने इस सफलता को प्रदेश के युवाओं और किसानों के लिए एक बड़े अवसर के रूप में देखते हुए वन क्षेत्रों में बी-बॉक्स स्थापित करने की नई नीति बनाने के निर्देश दिए हैं। धामी ने साफ किया कि पर्वतीय क्षेत्रों की अर्थव्यवस्था को मजबूत करने के लिए मधुमक्खी पालन यानी ‘मौन पालन’ को ग्रामीण आय का मुख्य जरिया बनाया जाएगा।
राज्य सरकार अब मुख्यमंत्री स्वरोजगार योजना के तहत मधुमक्खी पालन को टॉप प्रायोरिटी पर रखने जा रही है। इसके तहत पहाड़ी और मैदानी इलाकों के हिसाब से अलग-अलग क्लस्टर बनाए जाएंगे। नए नियमों के मुताबिक, इस क्षेत्र से जुड़ने वाले उद्यमियों और किसानों को विशेष सब्सिडी का लाभ मिलेगा। गौरतलब है कि वर्तमान में ‘मौन पालन योजना’ के तहत युवाओं को शहद उत्पादन इकाइयों की स्थापना के लिए 80 प्रतिशत तक की भारी सब्सिडी का प्रावधान है, जिसे अब और अधिक सरल बनाया जाएगा।
मुख्यमंत्री ने उद्यान प्रभारी दीपक पुरोहित को निर्देश दिए हैं कि सीएम आवास को एक मॉडल के रूप में विकसित किया जाए। यहां साल भर शहद उत्पादन सुनिश्चित करने के लिए ऐसे पौधों का रोपण होगा जो पराग और रस से भरपूर हों। इसके साथ ही, प्रदेश में ‘थ्री-बी’ (बर्ड फ्रेंडली, बी फ्रेंडली और बटरफ्लाई फ्रेंडली) गार्डन के निर्माण की नई पहल शुरू की जा रही है।
पर्यावरण संरक्षण को स्वरोजगार से जोड़ते हुए मुख्यमंत्री ने ऐलान किया कि आगामी विश्व पर्यावरण दिवस और हरेला पर्व पर ‘थ्री-बी’ कॉन्सेप्ट पर आधारित पौधारोपण अभियान चलाया जाएगा। राज्य में फिलहाल ‘एपिस मेलिफेरा’ और ‘एपिस इंडिका’ जैसी मधुमक्खियों की प्रजातियों पर फोकस किया जा रहा है, ताकि औषधीय गुणों वाले शहद का उत्पादन बढ़ाकर वैश्विक बाजार में उत्तराखंड को एक अलग ब्रांड के रूप में स्थापित किया जा सके।







