VMSB-UTU में निदेशक भर्ती विवादों में, ‘डेपुटेशन-ओनली’ नियम पर हाईकोर्ट ने मांगा AICTE और सरकार से जवाब
- 25 सितंबर को होने वाले इंटरव्यू से पहले कोर्ट में पहुंचा UTU भर्ती मामला, 5 अक्टूबर को अगली सुनवाई
देहरादून। वीर माधो सिंह भण्डारी उत्तराखण्ड तकनीकी विश्वविद्यालय (VMSB-UTU) के पांच परिसर संस्थानों—देहरादून, पिथौरागढ़, बौन (उत्तरकाशी), गोपेश्वर और टनकपुर—में निदेशक पदों की भर्ती प्रक्रिया कानूनी घेरे में आ गई है। विश्वविद्यालय प्रशासन द्वारा 10 जुलाई 2026 को जारी विज्ञापन (संख्या 1093/VMSB-UTU/2026) के तहत इन शीर्ष प्रशासनिक पदों को केवल प्रतिनियुक्ति यानी ‘Deputation Only’ के आधार पर भरने का निर्णय लिया गया था। इस व्यवस्था की वैधानिक प्रामाणिकता को चुनौती देती याचिका पर सुनवाई करते हुए नैनीताल हाईकोर्ट की खंडपीठ ने राज्य सरकार, विश्वविद्यालय प्रशासन और अखिल भारतीय तकनीकी शिक्षा परिषद (AICTE) से विस्तृत स्पष्टीकरण तलब किया है।
मुख्य न्यायाधीश मनोज कुमार गुप्ता एवं न्यायमूर्ति सुभाष उपाध्याय की खंडपीठ के समक्ष हुई सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता के अधिवक्ताओं ने भर्ती के पूर्ववर्ती नियमों का विवरण प्रस्तुत किया। कोर्ट को अवगत कराया गया कि वर्ष 2018, 2023 और 2024 में इन्हीं पदों के लिए जारी विज्ञापनों में अर्हता रखने वाले सभी योग्य शिक्षाविदों व शोधकर्ताओं के लिए आवेदन के द्वार खुले थे।
2023 के कार्यपरिषद निर्णय और AICTE विनियमों का हवाला
मामले की जड़ में भर्ती की पात्रता शर्तों में किया गया बदलाव है। वर्तमान विज्ञापन के तहत अभ्यर्थी का केंद्र/राज्य सरकार, पीएसयू या सरकारी विश्वविद्यालय में कार्यरत होना अनिवार्य किया गया है। इसके अतिरिक्त 15 वर्ष की नियमित सेवा के साथ-साथ विजिलेंस क्लीयरेंस और कैडर क्लीयरेंस की कठिन शर्तें रखी गई हैं।
याचिका में मुख्य तर्क: इन अतिरिक्त बंदिशों के कारण AICTE की 1 मार्च 2019 की अधिसूचना के अनुसार निर्धारित शैक्षणिक योग्यता और शोध अनुभव रखने वाले निजी संस्थानों के उत्कृष्ट प्रोफेसर प्रक्रिया से स्वतः बाहर हो रहे हैं।
याचिका में सवाल उठाया गया है कि VMSB-UTU की कार्यपरिषद (Executive Council) द्वारा 2023 में स्वीकृत व्यवस्था को दरकिनार कर ‘डेपुटेशन-ओनली’ का फैसला किस सक्षम प्राधिकारी के अनुमोदन से लिया गया।
25 सितंबर के इंटरव्यू पर नजर, अगली सुनवाई 5 अक्टूबर को
विश्वविद्यालय से जुड़े प्रशासनिक सूत्रों के मुताबिक, इन पांच पदों के लिए छानबीन के बाद करीब 7-8 अभ्यर्थियों को साक्षात्कार हेतु शार्टलिस्ट किया गया था, जिनका इंटरव्यू 25 सितंबर 2026 को प्रस्तावित है। कोर्ट में मामला जाने के बाद अब इस पूरी चयन प्रक्रिया के भविष्य पर संशय के बादल मंडराने लगे हैं।
नैनीताल उच्च न्यायालय ने सभी प्रतिवादियों को निर्देश दिया है कि वे 5 अक्टूबर 2026 को होने वाली अगली सुनवाई से पूर्व अपना पक्ष हलफनामे के माध्यम से स्पष्ट करें। कोर्ट के अंतिम आदेश से ही यह तय होगा कि राज्य के इन पांचों तकनीकी परिसरों में निदेशकों की नियुक्ति प्रतिनियुक्ति से होगी या पुरानी व्यवस्था के तहत खुले विज्ञापन के जरिए।






