सीएम पुष्कर सिंह धामी की पैरवी लाई रंग, केंद्र ने उत्तराखंड की नई सड़क परियोजनाओं को दी हरी झंडी
-
पहाड़ों में दौड़ेगी विकास की रफ्तार, 309 गांवों को जल्द मिलेगी ऑल वेदर कनेक्टिविटी
-
उत्तराखंड में पीएमजीएसवाई-4 का आगाज, 1707 करोड़ की लागत से बनेंगी 184 नई सड़कें
देहरादून : उत्तराखंड के कठिन भौगोलिक परिस्थितियों वाले दुर्गम और दूरस्थ पर्वतीय क्षेत्रों में ढांचागत विकास को नई दिशा मिल रही है। राज्य में प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना (PMGSY Uttarakhand Phase 4 roads) के चौथे चरण का खाका पूरी तरह तैयार कर लिया गया है। इस चरण के पहले चक्र में 309 पर्वतीय गांवों को पक्के सड़क नेटवर्क से सीधे जोड़ने की प्रशासनिक प्रक्रिया तेज हो गई है।
केंद्र सरकार से मिली हरी झंडी के बाद राज्य लोक निर्माण विभाग और संबंधित कार्यदायी संस्थाओं ने निविदा व भूमि चिह्नीकरण की प्रक्रिया शुरू कर दी है।
₹1707 करोड़ का बजट स्वीकृत, 184 सड़कों पर काम जल्द
योजना के चौथे चरण के प्रथम चक्र के लिए ₹1707 करोड़ की वित्तीय स्वीकृति मिली है। इसके तहत कुल 1228.20 किलोमीटर लंबाई की 184 सड़कों का निर्माण किया जाएगा।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने केंद्रीय ग्रामीण विकास मंत्रालय के समक्ष पहाड़ी राज्य की विषम परिस्थितियों का हवाला देते हुए सड़क कनेक्टिविटी के मानकों में ढील और अतिरिक्त बजट आवंटन की लगातार पैरवी की थी। इसी का परिणाम है कि चौथे चरण में उत्तराखंड के सभी 13 जिलों को शामिल करते हुए कुल 9344 किलोमीटर लंबी 1479 सड़कों के निर्माण का विस्तृत रोडमैप मंजूर हुआ है।
जिलावार नेटवर्क: पौड़ी को मिला सबसे बड़ा हिस्सा
चौथे चरण के पहले चक्र में जिलों के लिहाज से पौड़ी गढ़वाल को सबसे अधिक लाभ मिलने जा रहा है। पौड़ी के 68 गांव सीधे पक्की सड़क से जुड़ेंगे।
गढ़वाल मंडल: अल्मोड़ा व टिहरी में 47-47 गांव, उत्तरकाशी व नैनीताल में 24-24, चमोली में 17, देहरादून व रुद्रप्रयाग में 10-10 और हरिद्वार में 02 गांवों को प्राथमिकता सूची में रखा गया है।
कुमाऊं मंडल: बागेश्वर के 35 और पिथौरागढ़ के 25 गांवों में प्रथम चक्र के तहत कार्य प्रस्तावित है।
यदि पूरे चौथे चरण (PMGSY Phase 4) के कुल कवरेज की बात करें तो सीमांत जिला पिथौरागढ़ सबसे आगे है, जहां 249 गांवों में 1819.6 किमी लंबी सड़कें बिछाई जाएंगी। इसके बाद अल्मोड़ा में 221 गांवों के लिए 1395.5 किमी और चमोली में 175 गांवों के लिए 996.15 किमी सड़क प्रस्तावित है। मैदानी जिलों जैसे उधमसिंह नगर में 09 गांवों के लिए 22.3 किमी और हरिद्वार में 01 गांव के लिए 03.1 किमी सड़क स्वीकृत हुई है।
पिछले तीन चरणों का हिसाब और जमीनी असर
उत्तराखंड गठन के बाद से राज्य में ग्रामीण इंफ्रास्ट्रक्चर की स्थिति को सुधारने में पीएमजीएसवाई की भूमिका अहम रही है। इससे पहले संपन्न हुए तीनों चरणों में ₹11,595 करोड़ की लागत से 2826 सड़कें पूरी की जा चुकी हैं, जिनकी कुल लंबाई 21,915 किलोमीटर है। इन परियोजनाओं से अब तक 1860 दूरस्थ गांव मुख्यधारा से जुड़ चुके हैं।
पहाड़ी क्षेत्रों में पक्की सड़कों के निर्माण से न केवल रोजमर्रा की आवाजाही आसान हुई है, बल्कि स्वास्थ्य सेवाओं की आपात स्थिति में मरीजों को समय पर डोली के बजाय एम्बुलेंस के जरिए नजदीकी सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (CHC) पहुंचाना संभव हो पाया है। इसके अलावा, स्थानीय कृषि उत्पादों जैसे सेब, मुनस्यारी की राजमा और पहाड़ी दालों को सीधे मंडियों तक पहुंचाने से ग्रामीणों की आजीविका को भी सहारा मिला है।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि सरकार हर गांव तक ऑल-वेदर कनेक्टिविटी पहुंचाने के लिए प्रतिबद्ध है। सड़कों के विस्तार से ग्रामीण पलायन पर अंकुश लगाने और रिवर्स माइग्रेशन को बढ़ावा देने में मदद मिलेगी।






