कार के पास पहुंचे कप्तान: व्हीलचेयर पर आए बुजुर्ग की आंखों में आए आंसू, SSP ने दिखाई इंसानियत
देहरादून (ब्यूरो)। राजधानी में खाकी का एक ऐसा मानवीय चेहरा सामने आया है जिसने न केवल कानून के इकबाल को बुलंद किया, बल्कि इंसानियत की नई मिसाल भी पेश की। खुद कप्तान ने प्रोटोकॉल किनारे कर अपनी कुर्सी छोड़ी और एक बेबस बुजुर्ग की मदद के लिए उनके वाहन तक जा पहुंचे।
एसएसपी कार्यालय में उस वक्त सन्नाटा खिंच गया जब 84 साल के एक बुजुर्ग अपनी शिकायत लेकर पहुंचे। चलने-फिरने में पूरी तरह लाचार यह बुजुर्ग जैसे ही पुलिस दफ्तर के बाहर अपनी गाड़ी में रुके, इसकी सूचना मिलते ही एसएसपी देहरादून प्रमोद सिंह डोभाल फौरन अपने चेंबर से बाहर निकल आए। उन्होंने बुजुर्ग को अंदर बुलाने के बजाय खुद उनके वाहन के पास जाकर उनकी व्यथा सुनी।
अकेले रह रहे इन बुजुर्ग ने अपनी सुरक्षा और इलाके में कुछ लोगों द्वारा दी जा रही परेशानी को लेकर एसएसपी से न्याय की गुहार लगाई। उनकी बेबसी देख कप्तान ने न सिर्फ उन्हें ढांढस बंधाया, बल्कि तत्काल फोन घुमाकर बसंत विहार थानाध्यक्ष को सख्त लहजे में निर्देश जारी किए।उन्होंने साफ किया कि मामले की विवेचना वरीयता के आधार पर पूरी कर अभियुक्त के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाए।
इस दौरान एसएसपी ने बुजुर्गों की सुरक्षा के लिए एक विशेष गाइडलाइन भी जारी की। बसंत विहार पुलिस को विशेष तौर पर निर्देशित किया गया है कि वे समय-समय पर बुजुर्ग के घर जाकर उनका कुशलक्षेम पूछें। पुलिस टीम अब खुद उनके घर जाकर यह सुनिश्चित करेगी कि उन्हें किसी भी प्रकार की परेशानी न हो।
गौरतलब है कि उत्तराखंड में वरिष्ठ नागरिकों की सुरक्षा के लिए नेशनल हेल्पलाइन 14567 (एल्डरलाइन) और पुलिस हेल्पलाइन 1091 पहले से सक्रिय हैं, लेकिन पुलिस का इस तरह का सक्रिय रवैया राजधानी के अन्य बुजुर्गों के लिए भी बड़ा सहारा बना है।
एसएसपी ने जिले के सभी थानों को सख्त हिदायत दी है कि अकेले रहने वाले सीनियर सिटीजन्स का डेटा अपडेट रखें और उनके बीट सिपाही नियमित अंतराल पर उनसे संपर्क करें।
कप्तान के इस व्यवहार से अभिभूत बुजुर्ग की आंखों में आंसू छलक आए। उन्होंने जाते-जाते पुलिस विभाग का आभार जताया। यह घटना देहरादून पुलिस के उस संकल्प को दोहराती है जहां ‘मित्र पुलिस’ केवल एक नारा नहीं बल्कि धरातल पर हकीकत है।






