बिजली की लाइनें बिछाने के लिए अब नहीं खुदेगा पूरा शहर, चीफ सेक्रेटरी ने बदला काम करने का तरीका
देहरादून अंडरग्राउंड केबलिंग : काम में ढिलाई पर मुख्य सचिव सख्त, डीएम को सौंपी साप्ताहिक मॉनिटरिंग
देहरादून (ब्यूरो)। राजधानी की सड़कों पर चल रहे अंडरग्राउंड केबलिंग के काम से बेहाल जनता के लिए राहत की खबर है। मुख्य सचिव आनंद बर्द्धन ने सख्त रुख अपनाते हुए पावर ट्रांसमिशन कॉरपोरेशन ऑफ उत्तराखंड लिमिटेड (पिटकुल) को दो टूक हिदायत दी है।
सचिवालय में ऊर्जा विभाग और जिला प्रशासन के साथ हुई हाई-लेवल मीटिंग में साफ किया गया कि सड़कों की खुदाई, केबल बिछाने और उसके बाद सड़क को वापस दुरुस्त करने (ब्लैक टॉपिंग) का सारा काम हर हाल में जून महीने तक पूरा हो जाना चाहिए।
मुख्य सचिव ने पिटकुल की कार्यप्रणाली में बड़े बदलाव के निर्देश दिए हैं। उन्होंने कहा कि विभाग पूरे शहर की सड़कों को एक साथ खोदकर न छोड़े। इसके बजाय, ‘कंसंट्रेटेड वर्क फोर्स’ मॉडल अपनाते हुए कुछ ही हिस्सों में काम शुरू किया जाए। वहां अपनी पूरी लेबर की ताकत झोंक दी जाए ताकि वह हिस्सा जल्दी पूरा हो सके। एक पैच का काम पूरी तरह खत्म होने और सड़क की मरम्मत होने के बाद ही अगले हिस्से के लिए खुदाई की अनुमति दी जाएगी।
शासन ने स्पष्ट किया है कि अंधाधुंध खुदाई से शहरवासियों को हो रही परेशानी अब बर्दाश्त नहीं की जाएगी। मुख्य सचिव ने कहा कि टुकड़ों में काम करने और अधिक मैनपावर लगाने से प्रोजेक्ट की रफ्तार बढ़ेगी और ट्रैफिक जाम जैसी समस्याओं से मुक्ति मिलेगी। इस दौरान उन्होंने अधिकारियों को आदेश दिया कि वे स्थानीय लोगों की सहूलियत का खास ख्याल रखें।
जिलाधिकारी सविन बंसल को इस पूरे प्रोजेक्ट की कमान सौंपी गई है। डीएम अब अंडरग्राउंड केबलिंग की प्रगति की साप्ताहिक मॉनिटरिंग करेंगे। मुख्य सचिव ने निर्देश दिए हैं कि जिलाधिकारी और पिटकुल के अधिकारी लगातार संपर्क में रहें। हर हफ्ते की प्रोग्रेस रिपोर्ट जांची जाएगी और जहां भी ढिलाई मिलेगी, वहां जवाबदेही तय होगी। मानसून की दस्तक से पहले ब्लैक टॉपिंग का कार्य अनिवार्य रूप से पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है।
बैठक में प्रशासनिक अमले की मौजूदगी ने साफ कर दिया कि सरकार अब इस प्रोजेक्ट को लटकाने के मूड में नहीं है। इस महत्वपूर्ण समीक्षा बैठक में प्रमुख सचिव आर. मीनाक्षी सुंदरम, जिलाधिकारी देहरादून सविन बंसल और पिटकुल के तमाम वरिष्ठ अफसर मौजूद रहे। अफसरों को साफ कर दिया गया है कि डेडलाइन निकलने के बाद किसी भी तरह का बहाना स्वीकार नहीं किया जाएगा।







