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उत्तराखंड में आज से ‘जन-जन की सरकार जन-जन के द्वार’ अभियान शुरू

By Rajat Sharma

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उत्तराखंड की पहाड़ियों और गांवों में रहने वाले लाखों लोग अक्सर सरकारी योजनाओं से वंचित रह जाते हैं। वजह साफ है – जानकारी का अभाव और दफ्तरों के लंबे चक्कर। स्वास्थ्य बीमा हो, पेंशन योजना हो या फिर रोजगार से जुड़ी मदद, कई बार लोग इनका फायदा नहीं उठा पाते क्योंकि उन्हें पता ही नहीं चलता कि कैसे आवेदन करें।

लेकिन अब उत्तराखंड सरकार ने एक बड़ा कदम उठाया है। राज्य भर में एक खास अभियान शुरू हो रहा है, जिससे सरकारी सुविधाएं सीधे आपके दरवाजे तक पहुंचेंगी।

यह अभियान लोगों की रोजमर्रा की समस्याओं को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है। जन्म प्रमाण पत्र, मृत्यु प्रमाण पत्र से लेकर पेंशन और राशन कार्ड तक – अब इन सबके लिए लंबी कतारें लगाने या बार-बार दफ्तर जाने की जरूरत नहीं पड़ेगी। सरकार का लक्ष्य है कि ग्रामीण इलाकों में रहने वाले लोग, खासकर दूरदराज के गांवों में, आसानी से इन सेवाओं का लाभ उठा सकें।

‘जन-जन की सरकार जन-जन के द्वार’ अभियान की शुरुआत

17 दिसंबर से उत्तराखंड के सभी जिलों में यह विशेष अभियान शुरू हो गया है। इसका नाम है ‘जन-जन की सरकार जन-जन के द्वार’। इस कार्यक्रम के तहत 23 से ज्यादा सरकारी विभागों के अधिकारी और कर्मचारी गांवों, तहसीलों और कस्बों में शिविर लगाएंगे। एसडीएम, तहसीलदार से लेकर राजस्व, कृषि, समाज कल्याण और पंचायती राज विभाग के लोग मौजूद रहेंगे।

ये शिविर सिर्फ जानकारी देने तक सीमित नहीं हैं। यहां पर लोग अपनी समस्याएं बताकर तुरंत समाधान भी पा सकते हैं। चाहे बिजली-पानी का बिल हो, आधार कार्ड की दिक्कत हो या फिर कोई राजस्व संबंधी मामला – सब कुछ मौके पर निपटाया जाएगा। खास ध्यान ग्रामीण क्षेत्रों पर है, जहां पहुंचना मुश्किल होता है।

मुख्य सचिव ने क्या कहा?

मुख्य सचिव आनंद वर्धन ने बताया कि सरकार का मकसद प्रमुख योजनाओं को आम आदमी तक पहुंचाना है। सभी जिलों में अलग-अलग स्थानों पर शिविर लगाए गए हैं। शुरुआत में हफ्ते में तीन दिन ये कैंप चलेंगे और अगले 45 दिनों तक यह सिलसिला जारी रहेगा। कई लोग अभी भी योजनाओं से अनजान हैं या आवेदन नहीं कर पाते। इस अभियान से गांव-गांव तक जाकर उनकी मदद की जाएगी।

अनपढ़ और आपदा प्रभावित लोगों के लिए विशेष व्यवस्था

इस अभियान की सबसे अच्छी बात यह है कि इसमें हर वर्ग का ध्यान रखा गया है। अगर कोई व्यक्ति पढ़ा-लिखा नहीं है, तो अधिकारी खुद फॉर्म भरवाने से लेकर पूरी प्रक्रिया में साथ देंगे। आपदा प्रभावित इलाकों में ये शिविर ज्यादा कारगर साबित होंगे। साथ ही, 970 न्याय पंचायतों में विशेष सत्र आयोजित किए जाएंगे, जहां छोटे-मोटे कानूनी और पंचायती विवादों का तुरंत निपटारा होगा।

लोग अपने स्थानीय जन प्रतिनिधियों – जैसे पार्षद, ग्राम प्रधान या विधायक – के जरिए भी इन शिविरों तक पहुंच सकते हैं। इससे आम जनता और सरकार के बीच की दूरी काफी कम हो जाएगी।

भाजपा संगठन की सक्रिय भूमिका

उत्तराखंड भाजपा ने भी इस अभियान को पूरी ताकत से समर्थन दिया है। पार्टी अध्यक्ष महेंद्र भट्ट ने बताया कि सभी मंत्रियों, विधायकों और पदाधिकारियों को जिम्मेदारी सौंपी गई है। गढ़वाल और कुमाऊं मंडलों में अलग-अलग नेताओं को तैनात किया गया है। शिविर चलने तक ये नेता जनता से सीधा संपर्क बनाए रखेंगे। इससे न सिर्फ सरकारी योजनाओं का लाभ पहुंचेगा, बल्कि लोगों की शिकायतें भी तुरंत सुनी जाएंगी।

यह अभियान उत्तराखंड जैसे पहाड़ी राज्य के लिए बहुत महत्वपूर्ण है, जहां दूरियां ज्यादा हैं और संसाधन सीमित। अगर यह सफल रहा, तो आने वाले समय में ऐसी पहल और मजबूत हो सकती हैं।

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