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DIT यूनिवर्सिटी में HR कॉन्क्लेव 2.0 : 2047 तक तीसरी बड़ी अर्थव्यवस्था बनने के लिए तैयार है भारत

By Rajat Sharma

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AI के दौर में क्या मशीनें ले लेंगी आपकी जगह? देहरादून में जुटे दिग्गजों ने दिया चौंकाने वाला जवाब

देहरादून (ब्यूरो)। तकनीक की तेज रफ्तार और दुनिया भर में मची उथल-पुथल के बीच भविष्य का वर्कफोर्स कैसा होगा, इस पर मंथन के लिए उत्तराखंड की राजधानी में दिग्गजों का जमावड़ा लगा।

डीआईटी (DIT) विश्वविद्यालय के ‘करियर सेवाएं एवं विकास केंद्र’ ने नैसकॉम (NASSCOM) के साथ मिलकर ‘मानव संसाधन सम्मेलन 2.0’ का सफल आयोजन किया। “Workforce Reimagined: AI, Agility & Adaptability” थीम पर आधारित इस महाकुंभ में आईटीसी, हीरो मोटोकॉर्प, कॉग्निजेंट और टाइम्स ग्रुप जैसी दिग्गज कंपनियों के प्रतिनिधि शामिल हुए।

इस आयोजन की अहमियत का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि यहां चर्चा का मुख्य केंद्र केवल नौकरियां नहीं, बल्कि बदलती वैश्विक राजनीति और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) से पैदा होने वाली चुनौतियां रहीं।

मुख्य अतिथि डॉ. उपमित सिंह ने स्पष्ट शब्दों में आगाह किया कि आज जो स्किल सबसे ज्यादा डिमांड में हैं, मुमकिन है कि कुछ समय बाद वे पूरी तरह अप्रासंगिक हो जाएं। उन्होंने कहा कि अनिश्चितता ही अब नया सामान्य (New Normal) है, जिसके लिए भावी लीडर्स को हर पल तैयार रहना होगा।

कार्यक्रम की शुरुआत पारंपरिक दीप प्रज्ज्वलन से हुई। विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. जी. रघुरामा ने स्वागत भाषण में एक कड़वी सच्चाई बयां की। उन्होंने कहा कि बिना इंडस्ट्री और एकेडमिक जगत के तालमेल के छात्रों का भविष्य सुरक्षित नहीं है। शिक्षा जहां रिसर्च और थ्योरी देती है, वहीं इंडस्ट्री वह मैदान है जहां व्यावहारिक समस्याओं का समाधान ढूंढना पड़ता है। मुख्य सलाहकार श्री एन. रविशंकर ने भी युवाओं के कौशल विकास को ही प्रगतिशील भविष्य की एकमात्र चाबी बताया।

ताजा रिपोर्टों के अनुसार, भारत में एआई स्किल्स की पहुंच वैश्विक औसत से लगभग 2.5 गुना अधिक हो गई है और करीब 87% भारतीय कंपनियां किसी न किसी रूप में एआई का इस्तेमाल कर रही हैं। इसी संदर्भ में विशिष्ट अतिथि और अक्यूम्स फार्मा के एचआर हेड श्री अरविंद श्रीवास्तव ने एक बड़ा लक्ष्य सामने रखा। उन्होंने कहा कि अगर शिक्षा जगत और नीति-निर्धारक मिलकर काम करें, तो भारत साल 2047 तक दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनने का दम रखता है।

कॉन्क्लेव के दौरान दो विशेष सत्रों ने सबसे ज्यादा सुर्खियां बटोरीं। पहले सत्र में इस बात पर माथापच्ची हुई कि कैसे वैश्विक युद्ध और भू-राजनीतिक तनाव कंपनियों की हायरिंग रणनीति को बदल रहे हैं।

एक्सपर्ट्स ने बताया कि अब केवल डिग्री नहीं, बल्कि यह देखा जा रहा है कि उम्मीदवार अलग-अलग लोकेशंस और बदलती चुनौतियों के बीच कितना फिट बैठता है।

दूसरे सत्र में मशीनों और इंसानों की जंग पर बात हुई। विशेषज्ञों ने भरोसा दिलाया कि एआई चाहे कितना भी एडवांस हो जाए, वह इंसान की रचनात्मकता (Creativity), नैतिकता (Ethics) और नेतृत्व क्षमता को रिप्लेस नहीं कर सकता। अनिश्चित परिस्थितियों में फैसला लेने का हुनर मशीनों के पास नहीं, बल्कि केवल इंसानी दिमाग के पास ही रहेगा।

छात्रों ने इस दौरान अपनी प्रोजेक्ट प्रदर्शनी भी लगाई, जिसे कॉर्पोरेट जगत के लीडर्स ने खूब सराहा। इस पूरे आयोजन ने यह साफ कर दिया कि देहरादून का यह संस्थान केवल किताबी ज्ञान नहीं, बल्कि छात्रों को वैश्विक कार्यक्षेत्र की असलियत से रूबरू कराने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है।

कार्यक्रम के अंत में संयोजक श्री प्रवीण सैवाल ने सभी अतिथियों को स्मृति-चिह्न भेंट कर आभार जताया।

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