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उत्तराखंड में फिर विवादों में हरियाणवी सिंगर मासूम शर्मा, जानिए क्यों हो रही कार्यक्रम रद्द करने की मांग

By Rajat Sharma

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उत्तराखंड पर विवादित बयान देने वाले मासूम शर्मा का विरोध, रद्द हो कार्यक्रम: मोहित डिमरी

  1. CAU दफ्तर में प्रदर्शन की चेतावनी, हरियाणवी गायक मासूम शर्मा को देवभूमि में बुलाने पर भड़का गुस्सा

  2. क्रिकेट एसोसिएशन ऑफ उत्तराखंड को चेतावनी, ‘कार्यक्रम रद्द नहीं हुआ तो होगा उग्र आंदोलन’

  3. देहरादून में गरजे मूल निवास भू-कानून संघर्ष समिति के संयोजक, ‘स्वाभिमान से समझौता बर्दाश्त नहीं’

देहरादून : उत्तराखंड राज्य और यहां के निवासियों को लेकर कथित तौर पर विवादित टिप्पणी करने वाले हरियाणवी गायक मासूम शर्मा की देवभूमि में दोबारा एंट्री पर सियासी और सामाजिक पारा चढ़ गया है। राजधानी देहरादून में आयोजित होने वाले एक आगामी कार्यक्रम में मासूम शर्मा को आमंत्रित किए जाने पर मूल निवास भू-कानून संघर्ष समिति ने तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की है। समिति ने इस आयोजन को तत्काल प्रभाव से निरस्त करने की पुरजोर मांग उठाई है।

क्रिकेट एसोसिएशन के दफ्तर का घेराव करने का अल्टीमेटम

संघर्ष समिति के संस्थापक संयोजक मोहित डिमरी ने इस पूरे घटनाक्रम पर गहरा आक्रोश व्यक्त करते हुए कहा कि पूर्व में जब मासूम शर्मा का बयान सामने आया था, तब पूरे प्रदेश की जनता ने एक सुर में इसका पुरजोर विरोध किया था। इसके बावजूद क्रिकेट से जुड़ी जिम्मेदार हस्तियों द्वारा ऐसे कलाकार को दोबारा मंच प्रदान करना बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि आयोजकों ने इस फैसले को वापस नहीं लिया, तो समिति क्रिकेट एसोसिएशन ऑफ उत्तराखंड (CAU – Cricket Association of Uttarakhand) के देहरादून स्थित मुख्यालय पर लोकतांत्रिक और शांतिपूर्ण तरीके से विरोध प्रदर्शन करेगी।

स्थानीय उत्तराखंडी कलाकारों की अनदेखी का आरोप

मामले को सिर्फ एक गायक के विरोध तक सीमित न रखते हुए डिमरी ने प्रदेश के सांस्कृतिक मंचों पर स्थानीय प्रतिभाओं के साथ हो रहे पक्षपात का मुद्दा भी प्रमुखता से उठाया। उन्होंने सीधा सवाल किया कि करोड़ों रुपये का बजट बाहर से आए विवादित कलाकारों पर लुटाने के बजाय उत्तराखंड के अपने उदीयमान गायकों और संस्कृति कर्मियों को बड़े अवसर क्यों नहीं दिए जाते? उनका कहना था कि प्रदेश में प्रतिभा की कोई कमी नहीं है, बस उन्हें उचित प्रोत्साहन की दरकार है। आयोजक महिमा वर्मा की भूमिका पर भी सवाल खड़े करते हुए उन्होंने कहा कि खेल और समाज से जुड़े लोगों को प्रदेश के स्वाभिमान का ध्यान रखना चाहिए।

प्रशासन और सरकार को चेतावनी

संघर्ष समिति ने स्पष्ट किया है कि उत्तराखंड की क्षेत्रीय जनभावनाओं और स्वाभिमान के साथ किसी भी स्तर पर समझौता स्वीकार नहीं किया जाएगा। आयोजकों को सख्त संदेश देने के साथ ही उन्होंने स्थानीय पुलिस-प्रशासन को भी आगाह किया कि यदि इस कार्यक्रम की वजह से शहर में कोई प्रशासनिक या सुरक्षा संबंधी गतिरोध पैदा होता है, तो उसकी पूरी जवाबदेही आयोजकों और शासन-प्रशासन की होगी। उत्तराखंड की संस्कृति और लोककला को सर्वोपरि रखने की इस मांग ने अब राजधानी के गलियारों में चर्चा गरम कर दी है।

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