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हरीश रावत का अल्टीमेटम: ‘मेरी एआई वीडियो हटाओ वरना बीजेपी दफ्तर पर डालूंगा डेरा’

By Rajat Sharma

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देहरादून में सियासी पारा सातवें आसमान पर है। पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत ने बीजेपी द्वारा जारी किए गए एक एआई (AI) वीडियो पर आर-पार की लड़ाई का ऐलान कर दिया है।

उन्होंने साफ चेतावनी दी है कि अगर उनके चरित्र हनन वाला यह वीडियो सोशल मीडिया से नहीं हटाया गया, तो वे कल मंगलवार को एफआईआर दर्ज करवाएंगे। हरीश रावत ने दो टूक कहा है कि वे पुलिस और चुनाव आयोग का दरवाजा खटखटाने के बाद बीजेपी मुख्यालय पर सात दिन का धरना देने से भी पीछे नहीं हटेंगे।

कांग्रेस पिछले कुछ समय से प्रदेश में वन्य जीवों के हमलों और भू-कानून जैसे जमीनी मुद्दों पर पकड़ बना रही थी। प्रदेश अध्यक्ष गणेश गोदियाल के नेतृत्व में पार्टी का ग्राफ चढ़ता दिख रहा था, लेकिन बीजेपी के इस ‘डिजिटल वार’ ने पूरा चुनावी नेरेटिव बदल दिया है। बीजेपी ने 18 दिसंबर को अपने आधिकारिक हैंडल से एक वीडियो जारी किया था।

इसमें एआई तकनीक का इस्तेमाल कर हरीश रावत की आवाज में ‘मुस्लिम शरणम गच्छामि’ और ‘लव जिहाद शरणम गच्छामि’ जैसे नारे लगवाए गए हैं। वीडियो के अंत में सीएम धामी की एंट्री बुलडोजर के साथ दिखाई गई है, जिसे बीजेपी ने डेमोग्राफी और घुसपैठ से जोड़ा है।

‘बीजेपी वाले झूठे और लब्बार हैं’

इस वीडियो से आहत हरीश रावत अपने अब तक के सबसे आक्रामक अवतार में नजर आ रहे हैं। उन्होंने बीजेपी नेताओं को ‘झूठा और लब्बार’ बताते हुए कहा कि कांग्रेस तो अभी सिर्फ ‘टेंपरेरी बेरोजगार’ है, लेकिन वे बीजेपी को उत्तराखंड से ‘स्थायी रूप से बेरोजगार’ कर देंगे।

रावत का कहना है कि मुद्दों से ध्यान भटकाने के लिए उनकी छवि को मुस्लिम तुष्टीकरण से जोड़ा जा रहा है। बीजेपी ने वीडियो के कैप्शन में लिखा था कि वोट बैंक के लालच में कांग्रेस ने पहाड़ की डेमोग्राफी बदल दी, जिसका हिसाब अब धामी सरकार लेगी।

विवाद गहराने के बावजूद बीजेपी ने अभी तक यह वीडियो डिलीट नहीं किया है। जानकारों का मानना है कि बीजेपी अपने मकसद में कामयाब रही है क्योंकि कांग्रेस को अब जनता के मुद्दों को छोड़कर डैमेज कंट्रोल में जुटना पड़ रहा है।

हरीश रावत ने साफ कर दिया है कि अगर तीन-चार दिन में वीडियो नहीं हटा और माफी नहीं मांगी गई, तो वे कोर्ट जाएंगे और पूरे राज्य में न्याय यात्रा निकालेंगे। फिलहाल, 2027 चुनाव से बहुत पहले ही उत्तराखंड में एआई के जरिए सियासी संग्राम छिड़ चुका है।

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