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धामी सरकार का एक्शन: चम्पावत से पिथौरागढ़ तक विकास के लिए खोल दी तिजोरी

By Rajat Sharma

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उत्तराखंड के मंदिरों का बदलेगा स्वरूप, चम्पावत और उत्तरकाशी के लिए करोड़ों की मंजूरी

देहरादून : उत्तराखंड में विकास की गति को और तेज करते हुए मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने चम्पावत, उत्तरकाशी और पिथौरागढ़ जिलों की महत्वपूर्ण परियोजनाओं के लिए ₹4.42 करोड़ की भारी-भरकम धनराशि पर अपनी मुहर लगा दी है। सचिवालय से मिली जानकारी के मुताबिक, सीएम ने न केवल बजट को मंजूरी दी है, बल्कि अधिकारियों को दो-टूक निर्देश दिए हैं कि सभी निर्माण कार्यों में गुणवत्ता का खास ख्याल रखा जाए और इन्हें तय समय सीमा के भीतर ही पूरा किया जाए। इस वित्तीय स्वीकृति से सीमांत जिलों में धार्मिक पर्यटन और बुनियादी ढांचे को बड़ा बूस्ट मिलने की उम्मीद है।

चम्पावत जिले के लोहाघाट विधानसभा क्षेत्र में स्थित प्रसिद्ध भिंगराड़ा मंदिर सील के सौंदर्यकरण के लिए सरकार ने विशेष ध्यान दिया है। इस प्रोजेक्ट के लिए कुल ₹74.25 लाख की राशि स्वीकृत की गई थी, जिसमें से अब अवशेष ₹29.70 लाख की किस्त जारी करने का अनुमोदन दे दिया गया है। इससे मंदिर परिसर में श्रद्धालुओं के लिए सुविधाओं का विस्तार होगा। इसके साथ ही, माँ पूर्णागिरी धाम की यात्रा को सुगम बनाने के लिए कंकराली टनकपुर से मुख्य धाम तक पूरे मार्ग पर स्ट्रीट लाइटें लगाई जाएंगी। इस बड़े प्रोजेक्ट के लिए कुल ₹5.00 करोड़ का बजट तय किया गया है, जिसके सापेक्ष सीएम ने ₹2.00 करोड़ की ताजी वित्तीय स्वीकृति प्रदान की है।

उत्तरकाशी के पुरोला क्षेत्र में धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए न्याय पंचायत मुख्यालय जखोल/फिताड़ी स्थित श्री सोमेश्वर महादेव मंदिर के प्रांगण का कायाकल्प किया जाएगा। ₹1.43 करोड़ की लागत वाले इस सौंदर्यीकरण और समतलीकरण कार्य के लिए मुख्यमंत्री ने ₹80.06 लाख की राशि जारी करने के प्रस्ताव को मंजूरी दी है। बता दें कि इससे पहले सरकार इस कार्य के लिए ₹10 लाख की पहली किस्त पहले ही आवंटित कर चुकी थी। अब 60 प्रतिशत अतिरिक्त बजट मिलने से मंदिर परिसर में निर्माण कार्य तेजी से आगे बढ़ेगा।

पिथौरागढ़ जिले के लिए “एक जनपद-एक नदी” (One District-One River) योजना के तहत एक बड़ा फैसला लिया गया है। मुख्यमंत्री ने गुरघटिया नदी के पुनर्जीवीकरण (Revival) के लिए ₹6.59 करोड़ के विशाल प्रोजेक्ट को हरी झंडी दिखाई है। इसके प्रथम चरण के लिए ₹1.32 करोड़ की प्रशासनिक और वित्तीय स्वीकृति दी गई है। यह कदम न केवल जल संरक्षण की दिशा में मील का पत्थर साबित होगा, बल्कि स्थानीय पारिस्थितिकी तंत्र को भी मजबूती देगा। गौरतलब है कि उत्तराखंड सरकार ने 2026-27 के बजट में ‘GYAN’ मॉडल (गरीब, युवा, अन्नदाता और नारी) पर जोर दिया है, जिसके तहत ग्रामीण बुनियादी ढांचे को मजबूत करना मुख्य लक्ष्य है।

राज्य स्तरीय कार्यकारी समिति (SARRA) की पांचवीं बैठक में इन प्रस्तावों पर गहन चर्चा के बाद मुख्यमंत्री ने यह वित्तीय अनुमोदन दिया। यह धनराशि सीधे तौर पर जिला स्तरीय कार्यकारी समितियों (DLEC) के माध्यम से खर्च की जाएगी, जिससे स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर भी पैदा होंगे। सरकार का विजन है कि चारधाम यात्रा के साथ-साथ राज्य के अन्य धार्मिक और प्राकृतिक स्थलों को भी इसी तरह विकसित किया जाए ताकि पर्यटन से होने वाली आय का लाभ सुदूरवर्ती गांवों तक पहुंचे।

 

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