शस्त्र और शास्त्र के संगम पर मंथन : उत्तराखंड में धूमधाम से मना चिरंजीवी परशुराम जन्मोत्सव
देहरादून (ब्यूरो)। अक्षय तृतीया के पावन संयोग के बीच अखिल भारतवर्षीय ब्राह्मण महासभा उत्तराखंड ने राजधानी में भगवान श्री परशुराम के प्राकट्य दिवस पर अपनी शक्ति और सांस्कृतिक विरासत का प्रदर्शन किया। रविवार को आयोजित इस भव्य कार्यक्रम में न केवल धार्मिक अनुष्ठान हुए, बल्कि समाज की जड़ों को मजबूत करने के लिए वैवाहिक परिचय सम्मेलन की भी सफल नींव रखी गई। शहर के केंद्र में आयोजित इस समागम की शुरुआत भगवान विष्णु के छठे अवतार चिरंजीव परशुराम जी के वैदिक मंत्रोच्चार के बीच पूजन और हवन से हुई।
मुख्य अतिथियों ने दीप प्रज्ज्वलित कर कार्यक्रम को गति दी, जिसके बाद नन्हे बच्चों ने अपनी नृत्य प्रस्तुतियों और वंदना से पूरे माहौल को भक्तिमय कर दिया। मंच से वक्ताओं ने स्पष्ट किया कि परशुराम केवल ब्राह्मणों के नहीं, बल्कि न्याय और सुशासन के प्रतीक हैं, जिन्होंने शस्त्र और शास्त्र का संतुलन समाज को सिखाया।
इस अवसर पर संस्था द्वारा तैयार की गई विशेष स्मारिका का विमोचन किया गया। यह केवल एक पुस्तिका नहीं, बल्कि समाज के इतिहास और वर्तमान उपलब्धियों का दस्तावेज है। दिलचस्प बात यह है कि इस बार जयंती का महत्व इसलिए भी बढ़ गया क्योंकि पौराणिक मान्यताओं के अनुसार परशुराम जी उन आठ चिरंजीवियों में शामिल हैं, जो कलयुग के अंत में कल्कि अवतार के गुरु की भूमिका निभाएंगे। उनके इसी अजेय स्वरूप को याद करते हुए वक्ताओं ने समाज में शिक्षा और संस्कारों के विस्तार पर जोर दिया।
दोपहर के सत्र में भोजन प्रसाद के उपरांत माहौल पूरी तरह सामाजिक चर्चा में बदल गया। महासभा ने युवक-युवतियों के लिए परिचय सम्मेलन का आयोजन किया, जिसमें प्रदेश भर से आए परिवारों ने अपने बच्चों के विवाह हेतु विवरण साझा किए। इस पहल का मुख्य उद्देश्य ब्राह्मण समाज के भीतर वैवाहिक संबंधों को सुगम बनाना और आधुनिकता के दौर में भी सांस्कृतिक बंधनों को सुरक्षित रखना था।
महासभा के अध्यक्ष मनमोहन शर्मा ने समापन भाषण में कहा कि समाज की एकजुटता ही हमारी सबसे बड़ी शक्ति है। उन्होंने सभी का आभार जताते हुए समाज के गौरव को पुनर्जीवित करने का संकल्प दोहराया।
कार्यक्रम का प्रभावी संचालन महामंत्री उमाशंकर शर्मा और जी.आर. नौटियाल ने संयुक्त रूप से किया। इस दौरान बच्चों ने देशभक्ति गीतों की ऐसी प्रस्तुति दी कि पूरा हॉल ‘भारत माता की जय’ के नारों से गूंज उठा।
इस भव्य आयोजन में महासभा के संरक्षक लाल चंद शर्मा, सुरेन्द्र दत्त शर्मा, और राष्ट्रीय उपाध्यक्ष सुरेन्द्र शर्मा की गरिमामयी उपस्थिति रही। इनके साथ ही पूर्व मेयर सुनील गामा, उपाध्यक्ष शेखर शर्मा, और संयोजक कल्याण चक्रवर्ती ने भी व्यवस्थाओं की कमान संभाली। समाज के अन्य प्रमुख चेहरों में पंडित सुभाष जोशी, आचार्य विजेन्द्र ममगांई, पंडित पवन शर्मा, आचार्य विपिन जोशी, पण्डित दिवाकांत दुबे और मुख्यमंत्री के कार्डिनेटर हरीश कोठारी भी शामिल हुए।
महिला शक्ति का प्रतिनिधित्व श्रीमती सावित्री शर्मा, अरुण वाला शर्मा, प्रतिभा शर्मा, नीलम शर्मा और शशि कला शर्मा ने किया। कार्यक्रम में महाकाल सेवा समिति, शाकम्बरी माता सेवा समिति, पृथ्वी नाथ सेवा समिति और बालाजी सेवा समिति जैसे धार्मिक संगठनों का भी विशेष सहयोग रहा। विनोद शर्मा, मनोज कुमार शर्मा, डॉ.वी.डी.शर्मा, हेमा पुरोहित, अजयकांत, और राजकुमार पुरोहित सहित सैकड़ों अनुयायियों ने भगवान परशुराम के चरणों में मत्था टेका और समाज की उन्नति का संकल्प लिया।






