Women Health Tips : कभी-कभी हालात ऐसे बन जाते हैं कि इंसान जरूरत से ज्यादा गुस्सा करने लगता है। यह आदत न केवल रिश्तों में कड़वाहट घोलती है, बल्कि हमारी मानसिक और शारीरिक सेहत पर भी गहरा असर डालती है।
मेडिकल जर्नल्स में गुस्से को “साइलेंट किलर” कहा गया है। जैसे जहरीला करैत सांप अक्सर चुपचाप काट लेता है और इंसान को देर से पता चलता है, ठीक वैसे ही गुस्सा धीरे-धीरे शरीर को नुकसान पहुंचाता है।
डॉक्टर्स का मानना है कि गुस्सा कंट्रोल करना बेहद जरूरी है क्योंकि यह ब्लड प्रेशर को बढ़ाता है और दिल की सेहत को खतरे में डाल सकता है।
रिसर्च बताती है कि ज्यादा गुस्सा दिल की बीमारी और हार्ट अटैक के खतरे को बढ़ा देता है।
30 के बाद क्यों जरूरी हैं हेल्थ चेकअप्स?
30 की उम्र के बाद महिलाओं के शरीर में कई फिजिकल और हार्मोनल बदलाव होने लगते हैं।
करियर, परिवार और पर्सनल लाइफ की जिम्मेदारियों के बीच अक्सर महिलाएं अपनी हेल्थ को नज़रअंदाज कर देती हैं। इसका नतीजा यह होता है कि आगे चलकर कई तरह की हेल्थ प्रॉब्लम्स सामने आने लगती हैं।
अगर आप हेल्दी और एक्टिव रहना चाहती हैं तो कुछ जरूरी हेल्थ चेकअप्स को रेगुलर बेसिस पर जरूर कराएं। ये न केवल बीमारियों को शुरुआती स्टेज में पकड़ते हैं बल्कि सही समय पर ट्रीटमेंट भी संभव बनाते हैं।
महिलाओं के लिए 30 की उम्र के बाद जरूरी 5 हेल्थ चेकअप्स
ब्लड प्रेशर और शुगर टेस्ट
30 की उम्र के बाद हाई बीपी और डायबिटीज का खतरा काफी बढ़ जाता है। गलत खानपान, स्ट्रेस और कम एक्टिविटी इसकी बड़ी वजह हैं।
साल में कम से कम एक बार ब्लड प्रेशर और फास्टिंग ब्लड शुगर टेस्ट जरूर कराएं। इससे समय रहते इन बीमारियों को कंट्रोल किया जा सकता है।
थायरॉइड फंक्शन टेस्ट
महिलाओं में थायरॉइड की समस्या पुरुषों की तुलना में ज्यादा होती है। अचानक वजन बढ़ना/घटना, थकान, मूड स्विंग्स, बाल झड़ना या स्किन प्रॉब्लम्स इसके लक्षण हो सकते हैं। 30 के बाद हर साल थायरॉइड फंक्शन टेस्ट जरूर कराएं।
पैप स्मीयर टेस्ट
सर्वाइकल कैंसर का खतरा 30 की उम्र के बाद बढ़ जाता है। पैप स्मीयर टेस्ट छोटे से छोटे बदलाव को शुरुआती स्टेज में पकड़ लेता है।
एक्सपर्ट्स मानते हैं कि हर महिला को यह टेस्ट 3 साल में एक बार जरूर करवाना चाहिए।
ब्रेस्ट एग्जामिनेशन और मैमोग्राफी
ब्रेस्ट कैंसर महिलाओं में तेजी से बढ़ने वाली बीमारी है। इसकी शुरुआती पहचान बेहद जरूरी है। 30 के बाद साल में एक बार डॉक्टर से ब्रेस्ट एग्जामिनेशन करवाएं और जरूरत पड़ने पर मैमोग्राफी भी कराएं।
इसके अलावा महीने में एक बार खुद से ब्रेस्ट सेल्फ-एग्जामिनेशन करना न भूलें।
बोन डेंसिटी टेस्ट
30 की उम्र के बाद हड्डियां कमजोर होने लगती हैं और ऑस्टियोपोरोसिस का खतरा बढ़ जाता है। खासकर जिन महिलाओं के डायट में कैल्शियम और विटामिन D की कमी होती है उन्हें यह टेस्ट जरूर कराना चाहिए।
बोन डेंसिटी टेस्ट से हड्डियों की मजबूती का पता चलता है और डॉक्टर सही समय पर डाइट व सप्लीमेंट्स की सलाह दे सकते हैं।
गुस्सा कंट्रोल करना और रेगुलर हेल्थ चेकअप करवाना दोनों ही आपकी सेहत और खुशहाल जिंदगी के लिए जरूरी हैं।
30 के बाद इन 5 चेकअप्स को नज़रअंदाज न करें, क्योंकि यही आपको आगे चलकर कई गंभीर बीमारियों से बचा सकते हैं।











