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Mahasaptami Puja : जानें कल महासप्तमी पर माता सरस्वती की पूजा कैसे करें और इसका महत्व

By Rajat Sharma

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Mahasaptami Puja : आश्विन मास के शुक्ल पक्ष की सप्तमी तिथि 29 सितंबर 2025, सोमवार को पड़ रही है। इस दिन विशेष रूप से माता सरस्वती का आह्वान और नवपत्रिका पूजा का आयोजन किया जाता है।

इसे दुर्गा पूजा का पहला प्रमुख दिन भी माना जाता है। महासप्तमी के दिन पत्तियों को एक साथ बांधकर नदी या जल में स्नान कराया जाता है, जिसे महास्नान कहते हैं।

इस दिन कई शुभ योग बन रहे हैं, जैसे सौभाग्य योग, शोभन योग, बुधादित्य योग, जो इस दिन के महत्व को और बढ़ा देते हैं। ऐसे शुभ योगों में मां दुर्गा और मां सरस्वती की पूजा करने से विशेष फल प्राप्त होते हैं।

सरस्वती आह्वान 2025 शुभ योग

द्रिक पंचांग के अनुसार, इस दिन अभिजीत मुहूर्त सुबह 11:48 बजे से दोपहर 12:36 बजे तक रहेगा। वहीं, राहुकाल सुबह 7:43 बजे से 9:13 बजे तक रहेगा।

सप्तमी तिथि 29 सितंबर शाम 4:31 बजे तक रहेगी, इसके बाद अष्टमी तिथि प्रारंभ होगी। इस दिन सूर्य कन्या राशि और चंद्रमा धनु राशि में होंगे।

माता सरस्वती का आह्वान

नवरात्रि में सरस्वती पूजा का विशेष महत्व है। सप्तमी तिथि को सरस्वती आह्वान किया जाता है। इस दिन भक्त मां सरस्वती को आमंत्रित कर पूजा-अर्चना करते हैं।

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, सरस्वती आह्वान मूल नक्षत्र से श्रवण नक्षत्र तक किया जाता है। मां सरस्वती विद्या, बुद्धि और ज्ञान की देवी हैं, और उनकी पूजा से शिक्षा और कला में सफलता मिलती है।

सरस्वती आह्वान की विधि

ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान और नित्यकर्म पूरा करें। साफ वस्त्र पहनकर पूजा स्थल को साफ करें।

मां सरस्वती की मूर्ति या तस्वीर स्थापित करें। धूप, दीप और अगरबत्ती जलाएं।

सफेद मिठाई, फूल और फल अर्पित करें। ‘ऊं ऐं सरस्वत्यै नमः’ मंत्र का जाप करें।

आरती के बाद प्रसाद वितरित करें।

यह पूजा विद्यार्थियों और ज्ञान की खोज में लगे लोगों के लिए अत्यंत फलदायी मानी जाती है।

दुर्गा पूजा का पहला प्रमुख दिन

सप्तमी तिथि को महासप्तमी के रूप में भी जाना जाता है। इस दिन नवपत्रिका पूजा होती है, जिसमें मां दुर्गा को नौ पौधों के समूह के माध्यम से आमंत्रित किया जाता है।

इसमें केला, नारियल, हल्दी, अनार, अशोक, मनका, धान, बिल्व और जौ के पौधों की पत्तियां शामिल होती हैं।

इन पत्तियों को बांधकर नदी में स्नान कराया जाता है, फिर लाल या नारंगी वस्त्र से सजाकर मां दुर्गा की मूर्ति के पास स्थापित किया जाता है।

इसके बाद मंत्र जाप और आरती के साथ प्रसाद वितरित किया जाता है।

देवी दुर्गा को आमंत्रित करने की विधि

सुबह स्नान और नित्यकर्म के बाद पूजा स्थल को साफ करें। नवपत्रिका के नौ पौधों को लाल धागे से बांधें।

पवित्र जल में स्नान कराएं। घर के मंदिर में मां दुर्गा की मूर्ति स्थापित करें।

भगवान गणेश और मां दुर्गा की पूजा के साथ नवपत्रिका की आराधना करें।

मंत्र जाप और आरती के बाद प्रसाद वितरित करें।

महासप्तमी का दिन शक्ति और ज्ञान की उपासना का संगम है। सरस्वती आह्वान और नवपत्रिका पूजा से भक्त अपनी बौद्धिक और आध्यात्मिक उन्नति के लिए प्रार्थना करते हैं। यह पर्व प्रकृति और देवी शक्ति के बीच गहरे संबंध को भी दर्शाता है।

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