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Hijab Controversy : हिजाब विवाद पर केरल सरकार का हलफनामा, बताया मौलिक अधिकार का उल्लंघन

By Rajat Sharma

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Hijab Controversy : केरल सरकार ने हाई कोर्ट में एक बड़ा बयान दिया है, जिसने हिजाब को लेकर चल रहे विवाद को और हवा दे दी है। सरकार का कहना है कि किसी मुस्लिम लड़की को स्कूल में हिजाब पहनने से रोकना उसकी निजता और गरिमा पर सीधा हमला है। इतना ही नहीं, यह उसे धर्मनिरपेक्ष शिक्षा के अधिकार से भी वंचित करता है।

सरकार ने साफ कहा कि हिजाब पहनने का अधिकार स्कूल के गेट पर खत्म नहीं हो जाता, चाहे वह घर हो या बाहर। यह बातें केरल सरकार ने एक हलफनामे में कही हैं, जो पल्लुरुथी के सेंट रीटा पब्लिक स्कूल की याचिका के जवाब में दायर किया गया था।

स्कूल ने क्यों उठाया था मामला?

सेंट रीटा पब्लिक स्कूल, जो चर्च द्वारा संचालित है, ने सामान्य शिक्षा विभाग के उस निर्देश को चुनौती दी थी, जिसमें एक मुस्लिम लड़की को हिजाब पहनकर कक्षा में जाने की इजाजत दी गई थी। स्कूल ने विभाग के उस नोटिस को भी कोर्ट में चुनौती दी, जिसमें कहा गया था कि स्कूल में गंभीर अनियमितताएं हैं।

इस मामले ने तब और तूल पकड़ा, जब शुक्रवार को हाई कोर्ट में इसकी सुनवाई हुई। सुनवाई के दौरान लड़की के वकील ने बताया कि उसके माता-पिता ने उसे इस स्कूल से हटाकर किसी दूसरे स्कूल में दाखिला दिलाने का फैसला किया है।

हाई कोर्ट ने क्या कहा?

हाई कोर्ट ने इस मामले में संयम और समझदारी का परिचय दिया। लड़की के माता-पिता के रुख को देखते हुए कोर्ट ने कहा कि अब इस विवाद को और तूल देने की जरूरत नहीं है। केरल सरकार के वकील ने भी कोर्ट को बताया कि माता-पिता के फैसले को देखते हुए शिक्षा विभाग इस मामले को आगे नहीं बढ़ाना चाहता।

जज वीजी अरुण ने अपने फैसले में कहा, “यह कोर्ट खुश है कि इस मामले में अच्छी समझदारी दिखाई गई है। भाईचारा, जो हमारे संविधान की नींव का अहम हिस्सा है, आज भी मजबूत है।” इसके साथ ही हाई कोर्ट ने इस रिट याचिका का निपटारा कर दिया।

क्या है इस मामले का असर?

यह मामला न सिर्फ केरल बल्कि पूरे देश में धर्म, शिक्षा और निजी स्वतंत्रता को लेकर बहस को और तेज कर सकता है। हिजाब जैसे मुद्दे हमेशा से संवेदनशील रहे हैं, और इस तरह के फैसले समाज में एक नई मिसाल कायम कर सकते हैं। केरल सरकार का यह रुख दिखाता है कि वह धार्मिक स्वतंत्रता और शिक्षा के अधिकार को लेकर कितना गंभीर है।

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