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Jitiya Vrat Puja Vidhi 2025 : जितिया व्रत की शुरुआत नहाय खाय से, जानें पूजा का सही तरीका और महत्व

By Rajat Sharma

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Jitiya Vrat Puja Vidhi 2025 : हिंदू धर्म में जितिया व्रत का विशेष महत्व माना जाता है। यह व्रत हर साल आश्विन माह के कृष्ण पक्ष की सप्तमी से नवमी तिथि तक मनाया जाता है।

मुख्य व्रत अष्टमी तिथि को रखा जाता है। इस साल यह पावन व्रत 14 सितंबर, रविवार को पड़ रहा है।

यह व्रत खासतौर पर संतान की लंबी उम्र और सुख-समृद्धि की कामना के लिए रखा जाता है। माताएं पूरे नियम और श्रद्धा से इस दिन निर्जला उपवास करती हैं।

नहाय-खाय से होती है शुरुआत

जितिया व्रत की शुरुआत “नहाय-खाय” से होती है। इस बार 13 सितंबर को महिलाएं नहाय-खाय करेंगी। 14 सितंबर को पूरे दिन निर्जला व्रत रहेगा।

15 सितंबर की सुबह पारण कर व्रत पूरा किया जाएगा। व्रत के दौरान महिलाएं जितिया का धागा बांधती हैं।

मान्यता है कि यह धागा संतान को हर प्रकार के संकट से बचाता है और उसकी उम्र लंबी होती है। इसे एक प्रकार का रक्षा सूत्र भी कहा जाता है।

व्रत की तिथि और मुहूर्त

बनारसी पंचांग के अनुसार अष्टमी तिथि का प्रारंभ 14 सितंबर सुबह 8:41 बजे से होगा और यह 15 सितंबर सुबह 6:27 बजे तक रहेगी।

व्रती महिलाएं इसी अवधि में निर्जला उपवास रखेंगी और 15 सितंबर को पारण करेंगी।

किसकी होती है पूजा?

इस दिन भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा की जाती है। मान्यता है कि स्वयं भगवान शिव ने माता पार्वती से कहा था कि जो माताएं संतान की भलाई के लिए जीवित्पुत्रिका व्रत करती हैं, उनकी संतान पर आने वाले हर संकट दूर हो जाते हैं और उन्हें कभी संतान-वियोग नहीं सहना पड़ता।

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