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India-Russia Trade : भारत का ट्रंप को करारा जवाब, 6 पॉइंट में उड़ाई अमेरिका की धमकियों की धज्जियां

By Rajat Sharma

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India-Russia Trade : अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की धमकियों का भारत सरकार ने मुंहतोड़ जवाब दिया है। भारत ने 6 बिंदुओं वाला एक बयान जारी कर ट्रंप के हर सवाल का जवाब दिया है, जिसमें वो बार-बार भारत को धमकियां दे रहे थे। भारत ने साफ कहा कि ट्रंप खुद रूस के साथ बिजनेस कर रहे हैं, लेकिन हमारे मामले में इसे मजबूरी बताकर आलोचना कर रहे हैं, जो गलत है।

ट्रंप खुद क्या कर रहे हैं?

विदेश मंत्रालय ने सोमवार शाम को 6 बिंदुओं वाला एक बयान जारी किया, जिसमें ट्रंप की धमकियों का जवाब दिया गया। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में बताया कि भारत ने ट्रंप को उनके ही सवालों का जवाब देकर उनकी असलियत सामने रख दी है। भारत ने साफ किया कि हम अपने देश और नागरिकों के हितों को पहले रखेंगे।

यूक्रेन संकट के बाद शुरू हुआ तेल आयात

यूक्रेन संकट के बाद जब यूरोप की ओर तेल की आपूर्ति बढ़ी, तब भारत ने रूस से तेल खरीदना शुरू किया। उस समय अमेरिका ने ही वैश्विक ऊर्जा बाजार को स्थिर करने के लिए भारत को इस तरह के आयात के लिए प्रोत्साहित किया था। भारत ने यह कदम अपने नागरिकों के लिए किफायती और भरोसेमंद ऊर्जा सुनिश्चित करने के लिए उठाया था।

ट्रंप का रूस के साथ बिजनेस

भारत ने अपने बयान में कहा कि जिन देशों ने भारत की आलोचना की, वे खुद रूस के साथ भारी-भरकम कारोबार कर रहे हैं। भारत का तेल आयात अपनी जनता के लिए ऊर्जा की कीमतें काबू में रखने की मजबूरी है, लेकिन दूसरे देशों का रूस के साथ बिजनेस कोई मजबूरी नहीं है। भारत ने साफ कहा कि हमें निशाना बनाना गलत है।

यूरोप-रूस का कारोबार

यूरोपीय संघ का रूस के साथ 2023 में सामानों का व्यापार 67.5 अरब यूरो का था। इसके अलावा, सेवाओं का व्यापार 17.2 अरब यूरो तक पहुंचा। यह भारत के रूस के साथ कुल कारोबार से कहीं ज्यादा है। यूरोप ने 2024 में रूस से 16.5 मिलियन टन एलएनजी आयात किया, जो 2022 के 15.21 मिलियन टन के रिकॉर्ड को भी पार कर गया। इसमें न सिर्फ ऊर्जा, बल्कि उर्वरक, खनन उत्पाद, रसायन, लोहा-इस्पात, मशीनरी और परिवहन उपकरण शामिल हैं।

अमेरिका भी पीछे नहीं

अमेरिका भी रूस से यूरेनियम, पैलेडियम, उर्वरक और रसायनों का आयात करता है। ये सामान उनके परमाणु और इलेक्ट्रिक वाहन उद्योग के लिए जरूरी हैं। फिर भी, ट्रंप भारत को निशाना बना रहे हैं, जो पूरी तरह गलत है।

भारत को निशाना बनाना क्यों गलत?

भारत ने अपने बयान में साफ किया कि किसी भी बड़ी अर्थव्यवस्था की तरह, भारत अपने राष्ट्रीय हितों और आर्थिक सुरक्षा के लिए हर जरूरी कदम उठाएगा। भारत को रूस से तेल खरीदने के लिए निशाना बनाना अनुचित है, खासकर तब जब दूसरे देश भी रूस के साथ बड़े पैमाने पर बिजनेस कर रहे हैं।

ट्रंप ने क्या कहा था?

ट्रंप ने सोशल मीडिया पर लिखा, “भारत भारी मात्रा में रूसी तेल खरीद रहा है और उसे खुले बाजार में मुनाफे पर बेच रहा है। उन्हें इस बात की परवाह नहीं कि यूक्रेन में रूसी युद्ध मशीन कितने लोगों को मार रही है। इसलिए मैं भारत से अमेरिका को दिए जाने वाले टैरिफ को और बढ़ाऊंगा।”

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