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धामी कैबिनेट ने नम आंखों से दी विदाई, पूर्व सीएम खंडूड़ी और शूटर जसपाल राणा के लिए रखा मौन

By Rajat Sharma

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देहरादून सचिवालय में शोक की लहर, दिवंगत आत्माओं की शांति के लिए झुके मंत्रिमंडल के सिर

देहरादून। उत्तराखंड के राजनीतिक और खेल इतिहास में अभूतपूर्व योगदान देने वाले दो महान व्यक्तित्वों को राज्य सरकार ने नम आंखों से श्रद्धांजलि अर्पित की है।

सचिवालय में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की अगुवाई में आयोजित मंत्रिमंडल की विशेष बैठक में सूबे के पूर्व मुख्यमंत्री मेजर जनरल (रिटायर्ड) भुवन चंद्र खंडूड़ी और देश के दिग्गज निशानेबाज व कोच पद्मश्री जसपाल राणा के हालिया निधन पर गहरा शोक व्यक्त किया गया।

सचिवालय के भीतर जैसे ही कैबिनेट की बैठक शुरू हुई, वैसे ही समूचा माहौल बेहद गमगीन हो गया। मुख्यमंत्री सहित मंत्रिमंडल के तमाम सम्मानित सदस्यों और वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारियों ने अपनी जगहों पर खड़े होकर दिवंगत आत्माओं की शांति के लिए दो मिनट का गहरा मौन धारण किया।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने शोक प्रस्ताव पढ़ते हुए कहा कि मेजर जनरल भुवन चंद्र खंडूड़ी ने न केवल भारतीय सेना में बल्कि राज्य के विकास, सुशासन और जनसेवा के क्षेत्र में भी एक अमिट छाप छोड़ी है। उन्होंने कहा कि खंडूड़ी जी का पूरा जीवन कड़े अनुशासन और राजनीतिक शुचिता का साक्षात उदाहरण था, जिसकी कमी हमेशा महसूस होगी।

कैबिनेट ने देश के मशहूर पिस्टल शूटर और ओलिंपिक स्तर के उत्कृष्ट खेल प्रशिक्षक जसपाल राणा को भी शिद्दत से याद किया। सीएम ने उनके योगदान को रेखांकित करते हुए कहा कि जसपाल राणा ने अपनी असाधारण खेल प्रतिभा के दम पर अंतरराष्ट्रीय पटल पर न केवल भारत बल्कि उत्तराखंड का नाम भी हमेशा के लिए स्वर्णिम अक्षरों में दर्ज कराया।

91 वर्ष की आयु में देहरादून के अस्पताल में अंतिम सांस लेने वाले भुवन चंद्र खंडूड़ी ने अपने मुख्यमंत्रित्व काल के दौरान सूबे में पारदर्शी प्रशासन और कड़े भ्रष्टाचार विरोधी लोकायुक्त कानून की मजबूत नींव रखी थी। वहीं हाल ही में जून के महीने में इस दुनिया को अलविदा कह गए खेल रत्न पुरस्कार विजेता जसपाल राणा ने साल 1994 के एशियाई खेलों में स्वर्ण पदक जीतकर सनसनी मचाई थी और हाल के दिनों में उन्होंने पेरिस ओलिंपिक की डबल मेडल विजेता मनु भाकर जैसी दिग्गज एथलीटों को निखारने में बतौर कोच मुख्य भूमिका निभाई थी।

मंत्रिमंडल ने सामूहिक रूप से प्रस्ताव पारित करते हुए कहा कि इन दोनों ही विभूतियों का राष्ट्र और समाज के प्रति किया गया अद्वितीय समर्पण आने वाली पीढ़ियों के लिए मार्गदर्शक का काम करता रहेगा।

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