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Aaj Ka Panchang : श्राद्ध के दिन शुभ-अशुभ समय की पूरी गाइड

By Rajat Sharma

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Aaj Ka Panchang 16th September 2025 : सुबह की पहली किरण के साथ ही लोग अक्सर पंचांग उठाकर देखते हैं कि दिन कैसा गुजरेगा। खासकर पितृपक्ष के इन दिनों में, जब आस्था और परंपरा का मेल होता है, तो 16 सितंबर 2025 का पंचांग और भी खास हो जाता है। यह मंगलवार आश्विन कृष्ण पक्ष की दशमी तिथि को समर्पित है, जो श्राद्ध और तर्पण के लिए विशेष मानी जाती है।

ज्योतिष के जानकार बताते हैं कि यह तिथि रात भर प्रभावी रहेगी, लेकिन अगले दिन एकादशी में बदलाव आ जाएगा। मैंने खुद कई परिवारों से बात की है, जहां दशमी पर पितरों को याद करने की परंपरा घर-घर नजर आती है। सूर्य दक्षिणायन में है, शरद ऋतु का आगमन हो चुका है, और विक्रम संवत 2082 के इस दिन चंद्रमा मिथुन राशि में गोचर करेगा।

दिन की शुरुआत सूर्योदय से होती है, जो दिल्ली जैसे शहरों में सुबह करीब 6:15 बजे होगा। सूर्यास्त शाम 6:20 बजे के आसपास, यानी दिन की लंबाई ठीक वैसी ही रहेगी जैसी मानसून के बाद की शामों में होती है। चंद्रोदय रात 8:45 बजे और चंद्रास्त अगले दिन दोपहर 1:30 बजे। ये समय न सिर्फ पूजा के लिए जरूरी हैं, बल्कि दैनिक जीवन में संतुलन बनाए रखने के लिए भी। पितृपक्ष में ऐसे पंचांग की जानकारी परिवारों को एकजुट करती है, जहां बुजुर्ग तर्पण की विधि बताते हैं और युवा मोबाइल पर मुहूर्त चेक करते हैं।

तिथि, नक्षत्र और योग 

पंचांग के पांच अंगों में तिथि सबसे ऊपर आती है। 16 सितंबर को दशमी तिथि पूरे दिन बनी रहेगी, जो पितृ कार्यों के लिए शुभ है। नक्षत्र की बात करें तो मृगशिरा सुबह से दोपहर 1:30 बजे तक रहेगा, उसके बाद आर्द्रा नक्षत्र शुरू हो जाएगा। मृगशिरा को यात्रा और व्यापार के लिए अच्छा माना जाता है, लेकिन आर्द्रा थोड़ा अस्थिर ऊर्जा लाता है, इसलिए महत्वपूर्ण फैसले सोच-समझकर लें।

योग में वरीयान सुबह 10 बजे तक प्रभावी रहेगा, जो स्थिरता देता है, फिर परिग या सिद्धि योग का प्रभाव पड़ेगा। करण कौलव दोपहर 3 बजे तक, उसके बाद तैतिल। ये संयोजन बताते हैं कि दिन सामान्य कार्यों के लिए ठीक है, लेकिन विवाह या गृह प्रवेश जैसे बड़े मुहूर्त टाल दें। ज्योतिषी अक्सर कहते हैं कि ऐसे योग जीवन की छोटी-छोटी बातों को प्रभावित करते हैं, जैसे नौकरी का इंटरव्यू या घर की सफाई।

शुभ मुहूर्त और अशुभ काल 

शुभ मुहूर्त की तलाश में लोग सबसे ज्यादा पंचांग ही देखते हैं। अभिजीत मुहूर्त सुबह 11:45 से दोपहर 12:30 बजे तक सबसे अच्छा रहेगा – इस समय कोई भी छोटा-मोटा शुभ कार्य, जैसे नामकरण या पूजा, बिना किसी झिझक के करें। अमृत काल दोपहर 2:15 से 4 बजे तक, जो स्वास्थ्य और धन संबंधी फैसलों के लिए अनुकूल है। ब्रह्म मुहूर्त सुबह 4:45 से 5:30 बजे, ध्यान और मंत्र जाप के लिए बिल्कुल सही।

लेकिन अशुभ काल से सतर्क रहें। राहुकाल दोपहर 3:30 से 5 बजे तक है, इस दौरान कोई नया काम शुरू न करें, वरना बाधाएं आ सकती हैं। यमगंड दोपहर 1:30 से 3 बजे और गुलिक काल शाम 9 से 10:30 बजे तक। दुर्मुहूर्त सुबह 6:15 से 7:15 और दोपहर 12:30 से 1:30 तक। पितृपक्ष में श्राद्ध के लिए ये समय महत्वपूर्ण हैं, क्योंकि गलत मुहूर्त से कार्य का फल कम हो सकता है।

दशमी श्राद्ध और दैनिक जीवन पर असर

पितृपक्ष की दशमी तिथि पर श्राद्ध करना विशेष फलदायी माना जाता है। परिवार के बुजुर्ग अक्सर कहते हैं कि इस दिन तर्पण से पितरों की आत्मा को शांति मिलती है, और घर में सुख-समृद्धि आती है। पूजा में काले तिल, जल और पिंडदान का विधान है। लेकिन पंचांग के अनुसार, अगर नक्षत्र आर्द्रा हो तो भावुकता से बचें।

दैनिक जीवन में यह दिन यात्रा के लिए ठीक है, लेकिन लंबी दूरी की प्लानिंग दोबारा जांच लें। स्वास्थ्य के लिहाज से, मंगलवार होने से ऊर्जा अधिक रहेगी, लेकिन पेट संबंधी सावधानी बरतें। बच्चे स्कूल जाते समय राहुकाल से बचें। कुल मिलाकर, यह पंचांग हमें सिखाता है कि दिन को कैसे संतुलित बनाया जाए – आस्था के साथ व्यावहारिकता का मिश्रण।

चंद्र-नक्षत्र गोचर 

चंद्रमा मिथुन राशि में प्रवेश करेगा, जो संचार और बौद्धिक कार्यों को बढ़ावा देगा। मेष, सिंह और धनु राशि वालों के लिए दिन अनुकूल, लेकिन कर्क और मकर को सतर्क रहना चाहिए। नक्षत्र बदलाव से व्यापारियों को फायदा हो सकता है, लेकिन निवेश सोचकर करें। ज्योतिष की दुनिया में ऐसे गोचर रोजमर्रा की जिंदगी को रोचक बनाते हैं।

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