Pitru Paksha Puja Vidhi 2025 : हिंदू धर्म में पितरों को देवताओं के समान ही आदर और सम्मान दिया गया है।
मान्यता है कि पितृपक्ष के दिनों में हमारे पूर्वज धरती पर आते हैं और अपने वंशजों से तर्पण, श्राद्ध और पिंडदान की अपेक्षा करते हैं।
इस पखवाड़े में श्रद्धापूर्वक किए गए कर्म पितरों को प्रसन्न करते हैं और उनके आशीर्वाद से जीवन की अनेक कठिनाइयाँ दूर होती हैं।
पितृपक्ष का महत्व
इस वर्ष पितृपक्ष 8 सितंबर से शुरू होकर 21 सितंबर तक रहेगा। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार यदि किसी व्यक्ति की कुंडली में पितृ दोष है तो यह समय उसका निवारण करने के लिए सबसे उत्तम माना जाता है।
इस दौरान किए गए उपाय पितरों की कृपा प्राप्त करने में सहायक होते हैं।
पितृदोष के दुष्प्रभाव
कई बार संतान बुरी संगति में पड़ जाती है। करियर और व्यापार में असफलताएँ घेर लेती हैं।
जीवन में बार-बार रुकावटें आती हैं, परिवार में कलह बढ़ता है और आर्थिक तंगी या कर्ज से छुटकारा नहीं मिल पाता।
पितृदोष से मुक्ति के उपाय
पितृपक्ष में कुछ खास उपाय करके पितृ दोष को शांत किया जा सकता है:
घर की दक्षिण दिशा की दीवार पर पूर्वजों की तस्वीर लगाकर उनके सामने दीपक, धूप या अगरबत्ती जलाएँ।
रोज शाम दक्षिण दिशा की ओर तेल का दीप जलाना शुभ माना जाता है।
पीपल के वृक्ष की पूजा करें। उसकी जड़ में गंगाजल, काला तिल, दूध, अक्षत और पुष्प चढ़ाएँ।
पितृ शांति के लिए पंचमुखी, सप्तमुखी, अष्टमुखी और द्वादशमुखी रुद्राक्ष धारण करना लाभकारी होता है।
अमावस्या के दिन पितरों के लिए भोजन अर्पित करें और पितृ स्तोत्र का पाठ करें।
महत्वपूर्ण तिथियाँ
- 7 सितंबर – पूर्णिमा श्राद्ध
- 11 सितंबर – चतुर्थी एवं पंचमी श्राद्ध
- 21 सितंबर – सर्वपितृ अमावस्या
पितरों की कृपा प्राप्त करने के लिए आस्था और श्रद्धा के साथ किए गए ये उपाय जीवन को सुख-समृद्धि से भर देते हैं।











