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Rising Home Prices India : 81% लोगों के लिए घर खरीदना हुआ मुश्किल, दो साल में 50% बढ़ीं घरों की कीमतें

By Rajat Sharma

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Rising Home Prices India : भारत में हर वो शख्स जो घर से दूर रहकर पैसे कमा रहा है, वो तो अपना खुद का घर खरीदने का सपना देखता ही है। लेकिन आजकल घर खरीदने वालों के लिए सबसे बड़ी मुसीबत क्या है? जी हां, घरों की आसमान छूती कीमतें।

हाल ही में एक सर्वे बताता है कि 81 फीसदी से ज्यादा लोग (Anarock Consumer Sentiment Survey H1 2025) इसी चिंता में जी रहे हैं। वजह? पिछले दो सालों में आवासीय कीमतों में 50 फीसदी से ज्यादा की उछाल आ गया है। ये सुनकर तो दिल बैठ जाता है ना?

एनारॉक कंज्यूमर सेंटिमेंट सर्वे फॉर H1 2025 के मुताबिक, देश के टॉप 7 शहरों में औसत आवासीय कीमतें 2023 की दूसरी तिमाही में 6,001 रुपये प्रति स्क्वायर फुट से बढ़कर 2025 की दूसरी तिमाही तक 8,990 रुपये प्रति स्क्वायर फुट हो चुकी हैं। किफायती आवास (affordable housing) चाहने वाले 62 फीसदी खरीदार बाजार में मौजूदा विकल्पों से बिल्कुल खुश नहीं हैं।

और तो और, 92 फीसदी लोग प्रोजेक्ट के लोकेशन से भी नाराज हैं। ये आंकड़े देखकर लगता है कि सपना तो दूर, हकीकत ही मुश्किल हो रही है।

क्वालिटी और साइज से भी चिंतित हैं लोग

अब बात करते हैं क्वालिटी और साइज की। 90 फीसदी लोगों का मानना है कि इन प्रोजेक्ट्स की बिल्डिंग क्वालिटी खराब है और डिजाइन भी कुछ ठीक नहीं लगता। साथ ही, 77 फीसदी को लगता है कि ये घर जरूरत के मुताबिक बहुत छोटे हैं। एनारॉक ग्रुप के चेयरमैन अनुज पुरी ने कहा कि शहर-दर-शहर ट्रेंड्स दिखाते हैं कि आवासीय प्रॉपर्टी (residential property) चाहने वाले अपने शहरों में बढ़ती कीमतों को लेकर बेहद परेशान हैं। ये बात तो साफ है कि क्वालिटी (quality) और साइज (size) की कमी से लोग और भी निराश हो रहे हैं।

एनारॉक के डेटा के अनुसार, किफायती आवास (affordable housing) की डिमांड 2020 की इसी तिमाही में 40 फीसदी से घटकर 2025 की पहली हाफ में सिर्फ 17 फीसदी रह गई है। ऊपर से, टॉप 7 शहरों में किफायती आवास (affordable housing) की नई सप्लाई भी तेजी से कम हुई है। 2023 की पहली हाफ में 18 फीसदी से गिरकर 2025 की पहली हाफ में महज 12 फीसदी हो गई। 2019 में तो कुल नए लॉन्च में इसकी शेयर 40 फीसदी थी। ऐसे में आवासीय प्रॉपर्टी (residential property) मार्केट में बैलेंस कहां?

कितने लोगों का हुआ है सर्वे

सर्वे बताता है कि 36 फीसदी से ज्यादा संभावित घर खरीदारों के लिए 90 लाख से 1.5 करोड़ रुपये तक की रेंज सबसे फेवरेट ऑप्शन बन गई है। ये प्रीमियम और लक्जरी प्रॉपर्टीज की तरफ मजबूत शिफ्ट दिखाता है। वहीं, 25 फीसदी लोग 45 लाख से 90 लाख रुपये के बीच वाले घर पसंद कर रहे हैं। ये सर्वे जनवरी से जून 2025 के बीच हुआ था, जिसमें 14 अलग-अलग शहरों से 8,250 लोगों ने अपनी राय दी। इतने बड़े सैंपल से तो ट्रेंड्स साफ झलकते हैं!

रेडी-टू-मूव घरों की डिमांड घटी

H1 2025 सर्वे में ये भी सामने आया कि रेडी-टू-मूव घरों की डिमांड लगातार कम हो रही है। ये तो प्रेफरेंस चार्ट के सबसे नीचे पहुंच गई है। H1 2025 तक, नए लॉन्च के मुकाबले रेडी घरों की डिमांड का रेशियो 16:29 था, जबकि H1 2024 में ये 20:25 था। ये H1 2020 से बिल्कुल उलट है, जब रेशियो 46:18 था और H1 2021 में 32:21। लगता है लोग अब नए प्रोजेक्ट्स की तरफ रुख कर रहे हैं, शायद क्वालिटी (quality) और फ्यूचर वैल्यू को देखते हुए।

रिपोर्ट में शहरों के ट्रेंड्स के बारे में बताया गया है कि सभी शहरों में, खासकर प्रॉपर्टी इन्वेस्टमेंट (property investment) के लिए तलाश करने वाले खरीदारों का सबसे बड़ा हिस्सा 43 फीसदी बेंगलुरु में है।

सर्वे से पता चलता है कि दिल्ली-एनसीआर में इन्वेस्टर्स की शेयर सबसे कम 26 फीसदी है, जबकि 74 फीसदी लोग एंड-यूजर के तौर पर खरीदारी करना चाहते हैं। आवासीय प्रॉपर्टी (residential property) मार्केट में ये शिफ्ट किफायती आवास (affordable housing) की गिरती डिमांड को और साफ करता है।

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