Jitiya Vrat Puja Vidhi : जितिया व्रत बच्चों की सुरक्षा, लंबी उम्र और उनके उज्जवल भविष्य की कामना के लिए मनाया जाता है।
यह व्रत खासकर आश्विन मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को होता है। इस दिन राजा जीमूतवाहन की पूजा-अर्चना की जाती है और उनकी कथा का पाठ किया जाता है।
कथा के अनुसार, सतयुग में राजा जीमूतवाहन ने अपनी प्रजा के बच्चों को गरुड़ से बचाया था।
उनके इस धर्मपूर्ण कार्य से प्रसन्न होकर गरुड़ ने उन्हें वरदान दिया कि जो भी इस तिथि को उनके कुश की आकृति बनाकर पूजा करेगा, उसके बच्चों पर आने वाले सभी संकट दूर होंगे। तभी से यह व्रत मनाने की परंपरा चली आ रही है।
व्रत का महत्व और विधि
कई क्षेत्रों में यह व्रत नहाय-खाय से शुरू होता है। यह लगभग 40 घंटे का व्रत होता है। व्रती महिलाएं स्नान आदि करके भगवान जीमूतवाहन की पूजा करती हैं।
पूजा में फल, फूल और मिष्ठान्न पत्तों में रखकर उनके सामने अर्पित किए जाते हैं।
इसके बाद संतान उन पत्तों को खोलती है और व्रती महिलाएं उसी समय जितिया व्रत का पारण करती हैं।
पंचांग अनुसार तिथि और शुभ मुहूर्त
जितिया तिथि: 14 सितंबर, रविवार (सुबह 5:04 बजे से शुरू)
तिथि समाप्ति: 15 सितंबर, सोमवार (सुबह 3:06 बजे तक)
नहाय-खाय का समय: ब्रह्म मुहूर्त 04:33 से 05:19
अभिजीत मुहूर्त: 11:52 दोपहर से 12:41 दोपहर तक
प्रदोष काल: शाम 6:27 बजे के बाद
रवि योग: सुबह 6:05 से 8:41 तक
निर्जला व्रत और पारण: 15 सितंबर सुबह 6:06 बजे तक
इस व्रत का पालन श्रद्धा और भक्ति के साथ करने से संतान की लंबी उम्र और खुशहाली सुनिश्चित होती है।











