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Goods and Services Tax : अब टैक्स भरना होगा और आसान, जानिए क्या बदलेगा आपके लिए

By Rajat Sharma

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Goods and Services Tax : देश में जीएसटी 2.0 (Goods and Services Tax) लागू होने की खबर हर तरफ चर्चा में है। यह नया टैक्स सिस्टम पुराने जीएसटी को और सरल व सुविधाजनक बनाने का वादा करता है। हालांकि, जब 2017 में जीएसटी (Goods and Services Tax) लागू हुआ था, तब इसे विपक्ष ने ‘गब्बर सिंह टैक्स’ का तमगा दे दिया था।

खासकर कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने इसे जमकर कोसा था। राहुल गांधी का कहना था कि जीएसटी (Goods and Services Tax) के जरिए सरकार गरीबों की कमाई लूट रही है, ठीक वैसे ही जैसे फिल्म ‘शोले’ का खूंखार विलेन गब्बर सिंह गांववालों से वसूली करता था।

जीएसटी: भारत का ऐतिहासिक सुधार

राजनीति को अगर एक तरफ रख दें, तो जीएसटी (Goods and Services Tax) को भारत के सबसे बड़े आर्थिक सुधारों में गिना जाता है। इसने कारोबारियों के लिए टैक्स भरना आसान बनाया और आम जनता पर टैक्स का बोझ भी कम किया। समय-समय पर इसमें सुधार भी किए गए। 2017 में जीएसटी की औसत दर 14.4% थी, जो सितंबर 2019 तक घटकर 11.6% हो गई।

अब SBI की एक रिसर्च रिपोर्ट के मुताबिक, जीएसटी 2.0 (Goods and Services Tax) में यह दर और कम होकर 9.5% तक आ सकती है। जीएसटी का मकसद था देश में कई तरह के टैक्सों को हटाकर एक समान टैक्स सिस्टम लाना। अब जीएसटी 2.0 का लक्ष्य इसे और सरल और जनता के लिए फायदेमंद बनाना है।

स्लैब की उलझन ने बढ़ाई थी परेशानी

जब जीएसटी लागू हुआ था, तब इसमें 5%, 12%, 18% और 28% के चार टैक्स स्लैब थे। अलग-अलग सामान और सेवाओं को इन स्लैब्स में बांटा गया था, जिससे लोग शुरू में खासे कन्फ्यूज थे। सरकार ने इतने स्लैब इसलिए रखे थे ताकि जनता को राहत मिले और सरकार की कमाई भी बनी रहे। उस वक्त राज्यों को राजस्व घाटे का डर था, इसलिए उन्हें पांच साल तक मुआवजे की गारंटी दी गई थी। इस वजह से शुरू में स्लैब कम करना सरकार के लिए आसान नहीं था।

तकनीकी दिक्कतों ने डाला था अड़ंगा

जीएसटी (Goods and Services Tax) के शुरुआती दौर में तकनीकी समस्याओं ने भी खूब परेशान किया। छोटे कारोबारियों को डिजिटल रिटर्न भरने और चालान मिलान में दिक्कतें आईं। उस समय सरकार का फोकस सिस्टम को स्थिर करने पर था, न कि टैक्स स्लैब कम करने पर। फिर 2020 में कोरोना महामारी ने हालात और बिगाड़ दिए। टैक्स कलेक्शन कम हुआ और सरकार व राज्यों पर स्वास्थ्य और कल्याण का बोझ बढ़ गया। उस वक्त टैक्स दरें घटाना मुश्किल था, वरना राजकोषीय घाटा और बढ़ जाता। फिर भी, 2017 के बाद कई बार टैक्स दरों में बदलाव हुआ और कई सामान 28% स्लैब से बाहर लाए गए।

जीएसटी 2.0 की जरूरत क्यों?

महामारी के बाद जीएसटी कलेक्शन (Goods and Services Tax) में लगातार इजाफा हुआ है। बेहतर तकनीक, सख्त जांच और टैक्स चोरी में कमी ने सिस्टम को मजबूत किया है। अब सरकार के पास टैक्स कटौती से होने वाले नुकसान को सहने की ताकत है। पहले छोटे कारोबारियों को जोड़ना, तकनीकी खामियां दूर करना और रिटर्न-रिफंड की प्रक्रिया को आसान करना जरूरी था।

अब सालों के अनुभव और डेटा के आधार पर बड़े सुधार संभव हैं। जिस जीएसटी को कभी ‘गब्बर सिंह टैक्स’ कहा गया, वही अब जनता और कारोबारियों के लिए आसान हो गया है। उम्मीद है कि जीएसटी 2.0 (Goods and Services Tax) से अनुपालन और सरल होगा और आम जनता को बड़ा फायदा मिलेगा।

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