Anant Chaturdashi Vrat Vidhi : हिंदू धर्म में अनंत चतुर्दशी का विशेष स्थान है। इसे अनंत चौदस के नाम से भी जाना जाता है। इस दिन भक्तगण भगवान विष्णु के अनंत रूपों की पूजा-अर्चना करते हैं।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन विधिपूर्वक पूजा और व्रत करने से जीवन की सभी बाधाएं दूर होती हैं और सुख, समृद्धि, संतान और स्वास्थ्य की प्राप्ति होती है।
भक्त इस दिन अनंत सूत्र (पीला धागा) बांधते हैं, जिसमें चौदह गांठें होती हैं।
ज्योतिष के अनुसार, ये चौदह गांठें विभिन्न लोकों का प्रतीक हैं: भूलोक, भुवलोक, स्वलोक, महलोक, जनलोक, तपोलोक, ब्रह्मलोक, अतल, वितल, सतल, रसातल, तलातल, महातल और पाताललोक।
अनंत सूत्र कैसे बांधे
महिलाएं इसे बाएं हाथ की बाजू में बांधती हैं।
पुरुष इसे दाएं हाथ की बाजू में बांधते हैं।
सूत्र पहनते समय “ऊँ अनंताय नमः” मंत्र का जाप करना शुभ माना जाता है।
अनंत चतुर्दशी व्रत का महत्व
इस दिन व्रत रखने और श्री विष्णु सहस्त्रनाम स्तोत्र का पाठ करने से सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं। यह व्रत धन-धान्य, सुख-संपदा और संतान सुख के लिए भी किया जाता है।
अनंत चतुर्दशी 2025 की तिथि और समय
तिथि प्रारम्भ: 6 सितंबर 2025, सुबह 03:12 बजे
तिथि समाप्त: 7 सितंबर 2025, रात 01:41 बजे
पूजा मुहूर्त: 6 सितंबर 2025, सुबह 06:02 बजे से 7 सितंबर 2025, रात 01:41 बजे तक
अवधि: 19 घंटे 39 मिनट
अनंत चतुर्दशी पूजा विधि
सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और साफ कपड़े पहनें।
घर के मंदिर और पूजा स्थल को अच्छे से साफ करें।
पूजा स्थल पर धातु या मिट्टी का कलश स्थापित करें।
सभी देवी-देवताओं का स्मरण करते हुए व्रत का संकल्प लें।
चौकी पर लाल या पीला वस्त्र बिछाएं।
विष्णुजी के शेषनाग स्वरूप की प्रतिमा स्थापित करें।
14 गांठों वाला अनंत सूत्र अर्पित करें।
तिल, घी, मेवा और खीर से हवन करें।
हवन के बाद दान-पुण्य और ब्राह्मणों को भोजन कराना शुभ माना जाता है।
साथ ही इस दिन केले के पेड़ का पूजन भी किया जाता है।
अनंत चतुर्दशी का व्रत और पूजा विधि न केवल धार्मिक अनुष्ठान का हिस्सा है, बल्कि यह जीवन में सकारात्मक ऊर्जा और समृद्धि लाने वाला अवसर भी है।











