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Ganesh Chaturthi Visarjan 2025 : अनंत चतुर्दशी पर गणपति विसर्जन क्यों है खास, जानें धार्मिक महत्व

By Rajat Sharma

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Ganesh Chaturthi Visarjan 2025 : हिंदू धर्म में भाद्रपद मास की शुक्ल पक्ष की चतुर्दशी तिथि को अनंत चतुर्दशी कहा जाता है।

यह दिन खासतौर पर इसलिए महत्वपूर्ण माना जाता है क्योंकि इसी दिन गणेश चतुर्थी पर स्थापित बप्पा को विदाई दी जाती है। दस दिनों तक घरों और पंडालों में पूजे जाने वाले विघ्नहर्ता गणेश का विसर्जन अनंत चतुर्दशी को किया जाता है।

अनंत चतुर्दशी का धार्मिक महत्व

पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन भगवान विष्णु की भी पूजा करने का विधान है। भक्त ‘अनंत सूत्र’ को धारण करते हैं और भगवान विष्णु से परिवार की सुख-समृद्धि की कामना करते हैं।

वहीं, गणपति विसर्जन के समय श्रद्धालु “गणपति बप्पा मोरया, अगले बरस तू जल्दी आ” के जयकारों के साथ बप्पा को विदाई देते हैं।

क्यों होता है गणेश विसर्जन?

मान्यता है कि गणेश जी मिट्टी से निर्मित हैं और उन्हें जल में विसर्जित करने का अर्थ है—प्रकृति में लौटाना। यह प्रक्रिया जीवन के चक्र और अस्थायीता का प्रतीक मानी जाती है।

भक्त दस दिनों तक गणेश जी को अपने घर में रखकर उनकी सेवा करते हैं और अनंत चतुर्दशी पर उन्हें श्रद्धा के साथ विदा कर देते हैं।

अनंत चतुर्दशी और समाजिक उत्सव

इस पर्व की सबसे बड़ी खूबी यह है कि यह केवल धार्मिक अनुष्ठान ही नहीं बल्कि सामाजिक मेल-जोल का भी अवसर है।

पंडालों में सजावट, भक्ति गीत, सांस्कृतिक कार्यक्रम और विसर्जन यात्रा समाज में एकता और भाईचारे का संदेश देते हैं।

अनंत चतुर्दशी का दिन गणपति भक्ति और विष्णु उपासना दोनों के लिए बेहद खास है। जहां एक ओर यह भगवान गणेश के विसर्जन का पर्व है, वहीं दूसरी ओर भगवान विष्णु के ‘अनंत स्वरूप’ की उपासना भी इसी दिन होती है।

यही वजह है कि यह दिन आस्था, श्रद्धा और उत्साह का अद्भुत संगम माना जाता है।

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