देहरादून: सतत् कृषि पद्धतियों को बढ़ावा देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए ग्रामोत्थान परियोजना (REAP) के तहत जिले के विभिन्न ब्लॉकों में क्लाइमेट स्मार्ट एग्रीकल्चर (CSA) प्रशिक्षण कार्यक्रमों का सफलतापूर्वक आयोजन किया गया। ये प्रशिक्षण क्लस्टर लेवल फेडरेशन (CLF) स्तर पर परियोजना टीमों और स्थानीय फेडरेशनों के सक्रिय सहयोग से संपन्न हुए।इस पहल का उद्देश्य किसानों को बदलते जलवायु परिस्थितियों के अनुरूप खेती करने की जानकारी और व्यावहारिक कौशल प्रदान करना था, जिससे कृषि उत्पादकता बढ़े और पर्यावरणीय स्थिरता सुनिश्चित हो सके। इन प्रशिक्षणों में 140 से अधिक स्वयं सहायता समूह (SHG) सदस्य, किसान और CLF स्टाफ ने भाग लिया।प्रशिक्षण सत्रों के दौरान प्रतिभागियों को जलवायु अनुकूल खेती की तकनीकों, मृदा एवं जल संरक्षण, फसल विविधीकरण और संसाधनों के सतत प्रबंधन के बारे में जागरूक किया गया।मुख्य विकास अधिकारी श्री अभिनव शाह ने ग्रामोत्थान परियोजना के अंतर्गत पूर्व में आयोजित CSA प्रशिक्षणों के दीर्घकालिक प्रभाव की सराहना की। उन्होंने बताया कि पिछले वर्ष प्रशिक्षित 440 से अधिक किसान अब अपने पारंपरिक कृषि कार्यों के साथ-साथ मशरूम उत्पादन, मधुमक्खी पालन और बैकयार्ड पोल्ट्री जैसे उद्यमों में भी सक्रिय रूप से संलग्न हैं।
उन्होंने यह भी कहा कि CSA पद्धतियों को अपनाना आजीविका की सुरक्षा और जलवायु परिवर्तन के खिलाफ सामुदायिक क्षमता को मजबूत करने के लिए अत्यंत आवश्यक है।उपरोक्त प्रशिक्षणों के अतिरिक्त, परियोजना आगामी महीनों में देहरादून के 6 ब्लॉकों में 760 और किसानों को ऐसे प्रशिक्षणों के माध्यम से लाभान्वित करने का लक्ष्य लेकर चल रही है।परियोजना अधिकारियों ने बताया कि इस प्रकार के प्रशिक्षण न केवल किसानों की कृषि उत्पादकता को बढ़ाएंगे, बल्कि दीर्घकालिक पारिस्थितिक संतुलन में भी योगदान देंगे। REAP के तहत ग्रामोत्थान परियोजना ग्रामीण समुदायों को जलवायु-स्मार्ट, सतत और समावेशी कृषि विकास के लिए सशक्त बनाने का कार्य निरंतर कर रही है।







