Ganesh Sthapana Vidhi : गणेश जन्मोत्सव की शुरुआत गणेश चतुर्थी से होती है, जिसे पूरे देश में बड़े ही धूमधाम से मनाया जाता है।
इस साल गणेश चतुर्थी 27 अगस्त, बुधवार को पड़ रही है। इस दिन से शुरू होकर यह पर्व पूरे 10 दिनों तक चलता है और अंत में अनंत चतुर्दशी को गणेश विसर्जन के साथ इसका समापन होता है।
गणेश चतुर्थी पर श्रद्धालु अपने घरों में बप्पा की प्रतिमा को पूरे विधि-विधान से स्थापित करते हैं। माना जाता है कि अगर स्थापना के दौरान सही नियमों का पालन किया जाए तो घर में सुख-समृद्धि, शांति और सकारात्मक ऊर्जा बनी रहती है।
अगर आप भी इस बार अपने घर में गणपति बप्पा की स्थापना करने जा रहे हैं, तो इन महत्वपूर्ण नियमों को जरूर ध्यान में रखें।
गणेश चतुर्थी स्थापना के नियम
सही दिशा और स्थान चुनें
गणेश जी की प्रतिमा हमेशा उत्तर-पूर्व (ईशान कोण) दिशा में स्थापित करनी चाहिए और उनका मुख उत्तर दिशा की ओर होना चाहिए। इससे घर में सकारात्मक ऊर्जा आती है।
टूटी या खंडित प्रतिमा का उपयोग न करें
बप्पा की स्थापना के लिए संपूर्ण और अखंड प्रतिमा का चयन करें। खंडित मूर्ति को घर पर रखना अशुभ माना जाता है।
सूंड की दिशा पर ध्यान दें
घर पर गणेश जी की ऐसी प्रतिमा स्थापित करना शुभ होता है जिसकी सूंड बाईं ओर मुड़ी हुई हो। इसे सौभाग्य और समृद्धि का प्रतीक माना गया है।
बैठी हुई मुद्रा हो शुभ
गणपति बप्पा की बैठी हुई मुद्रा और प्रसन्न चेहरा घर में सुख-शांति और खुशहाली लाता है।
आशीर्वाद मुद्रा वाली प्रतिमा
बप्पा की प्रतिमा में एक हाथ आशीर्वाद की मुद्रा में और दूसरे हाथ में मोदक होना शुभ फलदायी माना गया है।
घर खाली न छोड़ें
गणपति स्थापना के बाद घर को कभी भी खाली न छोड़ें। मान्यता है कि स्थापना के दौरान बप्पा घर में अतिथि स्वरूप निवास करते हैं, इसलिए घर में परिवार के किसी न किसी सदस्य का उपस्थित रहना जरूरी है।











