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बदरीनाथ धाम प्रकरण ने भाजपा के हिंदुत्व और राष्ट्रवाद के खोखले दावों की खोल दी पोल : धस्माना

By Rajat Sharma

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बदरीनाथ धाम में अश्लील डांस पर संग्राम, कांग्रेस ने बीजेपी सरकार को घेरा

  • बदरीनाथ विवाद में डीएम के दो अलग-अलग आदेश, कांग्रेस का आरोप- सच छिपा रही सरकार
  • सेना को बलि का बकरा बना रही राज्य सरकार : सूर्यकांत धस्माना

देहरादून। बदरीनाथ धाम के पावन परिसर में 19 और 20 सितंबर को आयोजित ‘देवभूमि सांस्कृतिक महोत्सव’ के दौरान डीजे और आपत्तिजनक नृत्य के आयोजन ने अब बड़ा राजनीतिक रूप ले लिया है। प्रदेश कांग्रेस मुख्यालय में मीडिया से बातचीत करते हुए पार्टी के वरिष्ठ प्रदेश उपाध्यक्ष सूर्यकांत धस्माना ने राज्य की भाजपा सरकार पर तीखे जुबानी हमले बोले। उन्होंने कहा कि यह पूरी घटना भारतीय जनता पार्टी के सनातन धर्म और सेना के प्रति कथित प्रेम की कलई खोलती है।

धस्माना ने मीडिया के सामने प्रशासनिक दस्तावेज प्रस्तुत करते हुए आरोप लगाया कि चमोली जिला प्रशासन अपनी नाकामी छुपाने के लिए भारतीय सेना पर ठीकरा फोड़ रहा है। 8 सितंबर को चमोली के जिलाधिकारी गौरव कुमार द्वारा जारी शासनादेश का हवाला देते हुए उन्होंने बताया कि मुख्य विकास अधिकारी (सीडीओ) चमोली को इस पूरे महोत्सव का नोडल अधिकारी नियुक्त किया गया था। आदेश में स्पष्ट लिखा था कि बदरीनाथ में प्रस्तावित दो दिवसीय देवभूमि सांस्कृतिक महोत्सव 2026 का सफल आयोजन और सभी जरूरी व्यवस्थाएं समय से सुनिश्चित की जाएं।

इसके अलावा, 9 सितंबर को डीएम कार्यालय द्वारा जारी एक अन्य पत्र में 11 अगस्त को गढ़वाल स्काउट्स, जोशीमठ के कमांडिंग ऑफिसर के पत्र का संदर्भ दिया गया था, जिसके आधार पर 10 सितंबर को तैयारियों की समीक्षा बैठक बुलाई गई थी। धस्माना के अनुसार, यह आयोजन सेना के ‘ऑपरेशन सद्भावना’ के तहत जिला प्रशासन और उत्तराखंड पर्यटन विभाग के संयुक्त सहयोग से हुआ था, जिसकी मुख्य कमान नागरिक प्रशासन के हाथों में ही थी।

इस पूरे घटनाक्रम में मोड़ तब आया जब 19 और 20 सितंबर को धाम के टूरिस्ट अराइवल प्लाजा में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की उपस्थिति के बावजूद तेज आवाज में साउंड सिस्टम बजाया गया। भारतीय जनता पार्टी के ही वरिष्ठतम नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री डॉ. मुरली मनोहर जोशी ने धाम की शुचिता और मर्यादा के उल्लंघन पर कड़ा ऐतराज दर्ज कराया था। इसके बाद जब सोशल मीडिया और मुख्यधारा के मीडिया में सरकार की किरकिरी शुरू हुई, तो चमोली प्रशासन ने अचानक रुख बदल लिया।

जिला प्रशासन ने बाद में सेना को औपचारिक पत्र भेजकर सवाल पूछ लिया कि “क्या बदरीनाथ धाम में इस तरह का कार्यक्रम आयोजित करने की पूर्व अनुमति ली गई थी?” प्रशासन ने तेज आवाज वाले साउंड सिस्टम के इस्तेमाल पर भी सेना से जवाब तलब कर लिया।

कांग्रेस उपाध्यक्ष ने कहा कि जब खुद जिलाधिकारी ने नोडल अफसर तैनात किया और बैठकों की अध्यक्षता की, तो विवाद होते ही सेना पर दोष मढ़ देना अत्यंत शर्मनाक है। गलती शासन-प्रशासन स्तर पर हुई, लेकिन खामियाजा देश की रक्षक सेना को भुगतना पड़ रहा है।

धस्माना ने मांग की है कि इस मामले में लीपापोती करने के बजाय राज्य सरकार को देश की जनता, साधु-संतों और भारतीय सेना से सार्वजनिक रूप से माफी मांगनी चाहिए।

बद्रीनाथ धाम जैसे चारधाम के प्रमुख केंद्र में ध्वनि प्रदूषण और मर्यादा के उल्लंघन का मामला उत्तराखंड हाईकोर्ट और स्थानीय तीर्थ पुरोहितों के बीच भी चर्चा का विषय बना हुआ है। आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर शासन स्तर से किसी उच्च स्तरीय जांच समिति के गठन की संभावना जताई जा रही है।

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