देहरादून : राजधानी देहरादून के थानों क्षेत्र स्थित ‘इम्पीरियल वैली’ नामक रियल एस्टेट प्रोजेक्ट में लगभग ₹7.30 करोड़ की कथित धोखाधड़ी और वित्तीय अनियमितता का मामला सामने आया है। पीड़ित कारोबारी प्रियदर्शी अशोक और उनके परिजनों का आरोप है कि प्रोजेक्ट से जुड़े विकास ठाकुर, शाश्वत, नीरज गोसाईं और रश्मि गोसाईं ने उन्हें “प्राइमरी इन्वेस्टर” बताकर विशेष रियायती दरों पर प्लॉट देने का झांसा दिया। उन पर भरोसा करते हुए कारोबारी परिवार व उनके रिश्तेदारों ने कुल 19 प्लॉट खरीदने पर सहमति जताई और तय की गई लगभग ₹7.30 करोड़ की पूरी राशि विक्रेता पक्ष द्वारा बताए गए बैंक खातों में जमा करा दी।
शिकायतकर्ताओं का दावा है कि ‘एग्रीमेंट टू सेल’ होने और पूरी कीमत चुका दिए जाने के बावजूद आरोपियों द्वारा लंबे समय तक प्लॉटों की रजिस्ट्री कराने में टालमटोल किया गया। मामला तब और गंभीर हो गया जब पीड़ित पक्ष को जानकारी मिली कि जिन भूखंडों का भुगतान वे कर चुके थे, उन्हें कथित तौर पर दूसरे लोगों को भी बेच दिया गया है। पीड़ित कारोबारी का कहना है कि इस वजह से उनकी जीवनभर की कमाई फंस गई है और उन्हें सामाजिक रूप से भी भारी मानसिक कष्ट का सामना करना पड़ रहा है।
इस मामले में पीड़ित पक्ष ने 25 जुलाई 2026 को वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (SSP) देहरादून कार्यालय में लिखित शिकायत देकर संबंधित आरोपियों के खिलाफ आपराधिक मामला दर्ज करने और निष्पक्ष जांच की मांग की है। वहीं, पीड़ित परिवार ने उत्तराखंड रियल एस्टेट रेगुलेटरी अथॉरिटी (RERA) का भी रुख किया था, जहां सुनवाई के बाद RERA ने 16 सितंबर 2026 को एक आदेश जारी कर ‘इम्पीरियल वैली’ प्रोजेक्ट में संबंधित पक्षों द्वारा भूखंडों की आगे की खरीद-बिक्री और हस्तांतरण पर अंतरिम रोक लगा दी है। शिकायतकर्ता पक्ष ने मामले में उच्चस्तरीय साठगांठ और प्रोजेक्ट से जुड़े अन्य लोगों की भूमिका की भी निष्पक्ष पुलिस जांच कराने की मांग की है। फिलहाल यह पूरा मामला पुलिस प्रशासन और विधिक अधिकारियों के समक्ष विचाराधीन है।






