उत्तराखंड: अल्पसंख्यक आयोग के सचिव हटे, बरकत अली बने नए प्रभारी
- 5 महीने से ठप पड़ी सुनवाई होगी शुरू, नए सचिव बरकत अली ने संभाला अल्पसंख्यक आयोग का पदभार
देहरादून : उत्तराखंड राज्य अल्पसंख्यक आयोग में लंबे समय से चला आ रहा प्रशासनिक गतिरोध आखिरकार खत्म हो गया है। शासन ने विवादों में घिरे आयोग के सचिव भगवती प्रसाद त्रिवेदी को उनके पद से तत्काल प्रभाव से हटा दिया है। उनकी जगह विभाग के उप निदेशक बरकत अली को आयोग के सचिव पद की जिम्मेदारी सौंपी गई है। शनिवार को बरकत अली ने आधिकारिक रूप से पदभार ग्रहण कर लिया।
पूर्व में सहायक विकास अधिकारी (ADO) पद पर तैनात बीपी त्रिवेदी को पूर्व सचिव जेएस रावत की प्रतिनियुक्ति समाप्त होने के बाद यह जिम्मेदारी दी गई थी। हालांकि, उनकी नियुक्ति की प्रक्रिया और नियमों की अनदेखी को लेकर शुरुआत से ही सवाल उठ रहे थे। इस मामले में मोबीन अहमद द्वारा उत्तराखंड उच्च न्यायालय में एक जनहित याचिका भी दायर की गई है, जिस पर आगामी 12 अक्टूबर को सुनवाई प्रस्तावित है। इसके अलावा, आयोग की उपाध्यक्ष फरजाना बेगम और अन्य सदस्यों ने भी सचिव के अधिकारों को लेकर सवाल उठाए थे, जिसके बाद मामले की जांच जिलाधिकारी को सौंपने की बात सामने आई थी। विभागीय कर्मचारी रहे मृतक मोहसिन के परिजनों द्वारा भी त्रिवेदी पर कई गंभीर आरोप लगाए गए थे। बढ़ते विवादों के बीच विशेष सचिव डॉ. पराग मधुकर धकाते के निर्देश पर यह कार्रवाई की गई।
सचिव विवाद के कारण बीते अप्रैल महीने से आयोग में शिकायतों की सुनवाई पूरी तरह ठप पड़ी थी, जिससे 150 से अधिक जनशिकायतें लंबित हो गई हैं। अब नए सचिव के कमान संभालने के बाद उपाध्यक्ष फरजाना बेगम ने लंबित फाइलों की स्क्रूटनी कर जल्द से जल्द सुनवाई प्रक्रिया शुरू करने के निर्देश दिए हैं। वहीं दूसरी ओर, मदरसों और मकतबों (ट्यूशन सेंटर) पर हुई प्रशासनिक कार्रवाई का मामला भी आयोग के सामने है। जमीयत उलेमा-ए-हिंद के प्रतिनिधिमंडल ने उच्च न्यायालय के आदेशों का हवाला देते हुए मकतबों को दंडात्मक कार्रवाई के दायरे से बाहर रखने की मांग की है। विशेष सचिव डॉ. पराग मधुकर धकाते के अनुसार, न्यायालय के आदेश का विधिक अध्ययन किया जा रहा है और अगले एक-दो दिनों में इस संबंध में स्थिति साफ करते हुए आदेश जारी कर दिया जाएगा।






