देश विदेश क्राइम उत्तराखंड मनोरंजन बिज़नेस ऑटो टेक्नोलॉजी खेल धर्म हेल्थ लाइफस्टाइल ई - पेपर

NEET UG एडमिशन फर्जीवाड़े में तीसरी गिरफ्तारी, भोपाल से पकड़ा गया मास्टरमाइंड

By Rajat Sharma

Published on:

नीट एडमिशन घोटाला : गिरोह का पर्दाफाश, देहरादून एसएसपी की एसआईटी को मिली बड़ी सफलता

  • देहरादून पुलिस ने नीट एडमिशन रैकेट के तीसरे आरोपी को दबोचा, फर्जी प्रमाणपत्र से एमबीबीएस दाखिला मामले में एक और गिरफ्तारी

देहरादून (ब्यूरो)। नीट यूजी-2025 में फर्जी दस्तावेजों के आधार पर एमबीबीएस में दाखिले के मामले में एसआईटी ने एक और आरोपी को गिरफ्तार किया है। पुलिस ने मध्य प्रदेश के भोपाल निवासी धीरज कुमार श्रीवास्तव (37) को टाटा नेक्सॉन कार समेत गिरफ्तार किया। उसके वाहन की तलाशी में 5.58 लाख रुपये नकद बरामद हुए।

पुलिस के अनुसार पूछताछ में धीरज ने बताया कि यह रकम उसे गिरफ्तार आरोपी रूपेश पंडित ने स्वतंत्रता संग्राम सेनानी कोटे से कुछ छात्रों को एमबीबीएस में दाखिला दिलाने के एवज में कमीशन के तौर पर दी थी। मामले में पुलिस इससे पहले रूपेश पंडित और अरविंद कुमार को गिरफ्तार कर चुकी है। रूपेश की निशानदेही पर मेरठ स्थित उसके घर से आठ लाख रुपये बरामद किए गए थे। पुलिस के मुताबिक 13 सितंबर को रायपुर और क्लेमेनटाउन थाने में फर्जी दस्तावेजों के आधार पर स्वतंत्रता संग्राम सेनानी आश्रित प्रमाणपत्र बनवाने के मामले में मुकदमे दर्ज किए गए थे।

प्रकरण की गंभीरता को देखते हुए एसएसपी देहरादून ने एसपी ग्रामीण-1 जया बलोनी के नेतृत्व में एसआईटी गठित की। जांच में संबंधित अभ्यर्थियों के दस्तावेजों में दर्ज पते गलत मिले। शिक्षण संस्थानों से प्राप्त रिकॉर्ड की जांच के बाद मामले में कई अहम तथ्य सामने आए।

पुलिस के अनुसार धीरज भोपाल के पिपलानी थाना क्षेत्र के इंद्रपुरी में ‘एमबीबीएस वे’ नाम से कार्यालय चलाता था। वह विभिन्न निजी विश्वविद्यालयों में एमबीबीएस, बीटेक, बीसीए, बीबीए और बीकॉम आदि पाठ्यक्रमों में कमीशन पर दाखिले कराने का काम करता था। उसकी करीब दो वर्ष पहले रूपेश पंडित से मुलाकात हुई थी और इसके बाद दोनों संपर्क में थे।

पुलिस के मुताबिक अरविंद कुमार ने अपनी बेटी और दो अन्य परिचितों के बच्चों के एमबीबीएस दाखिले के लिए रूपेश से संपर्क किया था।इसके बाद रूपेश ने धीरज से बात की।

आरोप है कि कम मेरिट वाले अभ्यर्थियों के दाखिले के लिए स्वतंत्रता संग्राम सेनानी कोटे की जानकारी मिलने के बाद धीरज ने रूपेश और अन्य सहयोगियों के साथ मिलकर तीन अभ्यर्थियों के कूटरचित दस्तावेज तैयार कराए और फर्जी स्वतंत्रता संग्राम सेनानी आश्रित प्रमाणपत्र बनवाए। इन्हीं प्रमाणपत्रों के आधार पर तीनों अभ्यर्थियों ने अलग-अलग मेडिकल कॉलेजों में एमबीबीएस में दाखिला लिया।

एसआईटी मामले में फर्जी प्रमाणपत्र तैयार करने से लेकर दाखिले और कथित कमीशन के लेनदेन से जुड़े सभी पहलुओं की जांच कर रही है।

Advertisement

Leave a Comment