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देहरादून तहसील सदर में हड़कंप, फर्जी डॉक्युमेंट्स केस में महिला लेखपाल समेत दो सस्पेंड

By Rajat Sharma

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सावधान! जाली दस्तावेजों से बनाया सर्टिफिकेट तो रद्द होगी मान्यता, पुलिस की जांच तेज

  • देहरादून में फर्जी प्रमाणपत्र मामले पर बड़ा एक्शन, तहसील सदर के दो लेखपाल निलंबित

देहरादून। तहसील सदर में जाली दस्तावेजों के आधार पर प्रमाणपत्र जारी करने के गंभीर मामले में जिला प्रशासन ने सख्त रुख अपनाया है। जिलाधिकारी डॉ. आशीष चौहान के सीधे आदेश पर प्रारंभिक जांच में शिथिलता पाए जाने पर लेखपाल जगदीश राठौर और महिला लेखपाल डिंपल को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है।

इस कार्रवाई के बाद प्रशासनिक हलकों में हड़कंप मच गया है। फिलहाल पूरे तहसील परिसर में हड़कंप की स्थिति बनी हुई है।

दो एफआईआर और दो गिरफ्तारियां

दरअसल मामला सिर्फ प्रशासनिक लापरवाही तक सीमित नहीं है। पुलिस ने अलग-अलग थानों में दो आपराधिक मुकदमे दर्ज किए हैं। तफ्तीश के दौरान पुलिस की टीमों ने अंतरराज्यीय नेटवर्क के तहत काम कर रहे मेरठ निवासी कथित दलाल रूपेश पंडित और एक छात्रा के पिता को गिरफ्तार किया है।

आरोपियों से पूछताछ में सामने आया है कि बाहरी राज्यों के लोग स्थानीय स्तर पर फर्जी दस्तावेज तैयार करवा रहे थे। जांच अधिकारी अब इस बात की कड़ियां जोड़ रहे हैं कि फर्जीवाड़े का यह खेल कब से चल रहा था।

सीडीओ की अगुवाई में जांच समिति

मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए जिलाधिकारी ने मुख्य विकास अधिकारी (सीडीओ) की अध्यक्षता में एक उच्चस्तरीय संयुक्त समिति का गठन किया है। यह समिति आवेदन प्राप्त होने, पटवारी या लेखपाल रिपोर्ट लगने, और अंतिम स्तर पर डिजिटल हस्ताक्षर से प्रमाणपत्र जारी होने तक की संपूर्ण कार्यप्रणाली का ऑडिट कर रही है।

जांच के दौरान यह मुख्य रूप से देखा जा रहा है कि आवेदक के मूल निवास, आय या जाति संबंधी रिकॉर्ड का मिलान सरकारी रजिस्टरों या ऑनलाइन डेटाबेस से क्यों नहीं किया गया।

अन्य अधिकारियों पर भी गिर सकती है गाज

सत्यापन में इस्तेमाल की गई यूजर आईडी और डिजिटल हस्ताक्षरों की भी फॉरेंसिक जांच की जा रही है। जिला प्रशासन ने साफ संकेत दिए हैं कि जांच का दायरा केवल निलंबित कर्मचारियों तक सीमित नहीं रहेगा। यदि जांच समिति की रिपोर्ट में किसी वरिष्ठ अधिकारी या पटल बाबू की मिलीभगत या पर्यवेक्षकीय लापरवाही सामने आती है, तो उनके खिलाफ भी कठोर अनुशासनात्मक कार्रवाई होगी।

पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए हाल के महीनों में जारी हुए संदिग्ध आवेदनों का पुनर्मूल्यांकन भी शुरू कर दिया गया है।

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