भाजपा की गुटबाजी सड़क पर, गरिमा दसोनी का प्रदेश नेतृत्व पर बड़ा हमला
- खजानदास के इस्तीफे और आत्महत्या वाले बयान पर गरमाई राजनीति, कांग्रेस ने महेंद्र भट्ट से पूछे तीखे सवाल
देहरादून। उत्तराखंड सत्ता के गलियारों में सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी के भीतर की खींचतान अब खुलकर सड़कों पर दिखाई देने लगी है। कैबिनेट मंत्री खजानदास के सरकारी आवास पर अपनी ही पार्टी के नेताओं और कार्यकर्ताओं के विरोध प्रदर्शन के बाद कांग्रेस ने भाजपा संगठन पर तीखा जुबानी हमला बोला है। प्रदेश कांग्रेस की मुख्य प्रवक्ता गरिमा मेहरा दसौनी ने कहा है कि चकराता क्षेत्र में राजनीतिक जमीन खिसकते देख भाजपा नेता अपनी ही सरकार में काम कराने में नाकाम साबित हो रहे हैं और अब अपनी विफलताओं का ठीकरा दूसरों पर फोड़ रहे हैं।
कांग्रेस प्रवक्ता ने प्रदेश सरकार के कैबिनेट मंत्री खजानदास और पूर्व विधायक मुन्ना सिंह चौहान व जिला पंचायत अध्यक्ष रहीं मधु चौहान के बीच उपजे विवाद पर कहा कि यह स्थिति दर्शाती है कि संगठन और सरकार में कितना कम तालमेल है। दरअसल, ट्रांसफर और विकास कार्यों को लेकर पैदा हुए इस असंतोष के बाद मंत्री आवास पर जो स्थिति बनी, उससे राज्य प्रशासन के भीतर का आंतरिक असंतोष उजागर हुआ है। गरिमा दसौनी ने कहा कि अपनी ही पार्टी के लोगों के आरोपों से व्यथित होकर यदि एक सीनियर मंत्री को सार्वजनिक रूप से इस्तीफे और आत्महत्या तक की बात कहनी पड़ रही है, तो यह पार्टी के आंतरिक माहौल की गंभीर तस्वीर पेश करता है।
गरिमा मेहरा दसौनी ने जौनसार-बावर क्षेत्र के पिछले चुनावी नतीजों का जिक्र करते हुए कहा कि चकराता में लगातार मिली पराजय के बाद से भाजपा नेतृत्व में बौखलाहट है। उन्होंने याद दिलाया कि 2007, 2017 और फिर 2022 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस प्रत्याशी प्रीतम सिंह ने भाजपा को करारी शिकस्त दी थी। इसके अलावा हाल ही में संपन्न जिला पंचायत चुनावों में भी 11 में से 7 सीटों पर कांग्रेस समर्थित प्रत्याशियों ने जीत हासिल की, जबकि भाजपा केवल 3 सीटों पर सिमट गई। यही वजह है कि जिला पंचायत अध्यक्ष पद पर भी सुखविंदर कौर ने जीत दर्ज की और भाजपा प्रत्याशी को हार का सामना करना पड़ा।
भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष महेंद्र भट्ट पर निशाना साधते हुए कांग्रेस प्रवक्ता ने पूछा कि जो पार्टी अनुशासन का पाठ दूसरों को पढ़ाती है, उसका अपना कैडर आज मंत्री के दरवाजे पर धरना क्यों दे रहा है? उन्होंने कहा कि बंद कमरे में नेताओं को तलब कर लेना या केवल औपचारिक बैठकें करना इस विवाद का समाधान नहीं हो सकता। भाजपा नेतृत्व को यह बताना चाहिए कि जब संगठन में शिकायत निवारण का तंत्र मौजूद है, तो यह लड़ाई सड़क तक कैसे पहुंची। चकराता की जनता क्षेत्रीय विकास चाहती है, लेकिन भाजपा के नेता आपस की सिरफुटौव्वल में उलझे हुए हैं।






