रिपोर्ट : राजू ठाकुर पत्रकार
देहरादून। घरेलू बिजली उपभोक्ताओं की बिजली बिना किसी पूर्व सूचना के काटे जाने को लेकर यूपीसीएल (उत्तराखंड पावर कॉरपोरेशन लिमिटेड) की कार्यप्रणाली पर सवाल उठने लगे हैं। अनेक उपभोक्ताओं का कहना है कि बिजली बिल में भुगतान की अंतिम तिथि के साथ विच्छेदन (डिस्कनेक्शन) तिथि अवश्य अंकित होती है, लेकिन अधिकांश लोगों को इसकी जानकारी नहीं हो पाती। ऐसे में विभागीय कर्मचारी सीधे बिजली काट देते हैं, जिससे उपभोक्ताओं को मानसिक, सामाजिक और आर्थिक परेशानियों का सामना करना पड़ता है। घरेलू उपभोक्ताओं को बिना किसी पूर्व सूचना या नोटिस के बिजली काटना भारतीय कानून के तहत विद्युत अधिनियम, 2003 (The Electricity Act, 2003) की धारा 56(1) का स्पष्ट उल्लंघन है।
उपभोक्ताओं का कहना है कि कई घरों में बुजुर्ग या कम पढ़े-लिखे लोग रहते हैं, जिन्हें बिल पर लिखी विच्छेदन तिथि का पता नहीं चल पाता। कई मामलों में परिवार बिल जमा करने की स्थिति में होता है, लेकिन समय पर जानकारी न मिलने के कारण अचानक बिजली काट दी जाती है। इससे परिवारों को असुविधा के साथ-साथ सामाजिक रूप से भी शर्मिंदगी का सामना करना पड़ता है।
जानकारों के अनुसार, विद्युत चोरी, मीटर से छेड़छाड़ (टैंपरिंग), स्वीकृत भार से अधिक लोड का उपयोग, अनधिकृत विस्तार या ऊर्जा की अवैध निकासी जैसे मामलों में विभाग बिना पूर्व सूचना के बिजली आपूर्ति काट सकता है। लेकिन सामान्य घरेलू उपभोक्ताओं के बकाया बिल के मामलों में विभाग को उपभोक्ता हितों का भी ध्यान रखना चाहिए। पत्रकार राजू ठाकुर ने जब इस प्रकार के मामलों की और कहा कि डिजिटल युग में बिजली बिल की देय तिथि और विच्छेदन तिथि से पहले एसएमएस, व्हाट्सएप, फोन कॉल या मोबाइल ऐप के माध्यम से सूचना भेजना कोई कठिन कार्य नहीं है। जिस प्रकार टेलीकॉम कंपनियां अपने ग्राहकों को रिचार्ज या प्लान समाप्त होने से कई दिन पहले लगातार संदेश भेजती हैं, उसी प्रकार यूपीसीएल भी उपभोक्ताओं को समय रहते सूचित कर सकता है।
कुछ उपभोक्ताओं ने यह भी आरोप लगाया कि बिजली काटने पहुंचे कुछ कर्मचारियों का व्यवहार भी संतोषजनक नहीं रहता। स्थानीय लोगों द्वारा एक बार उपभोक्ता को सूचना देने का अनुरोध किए जाने पर कथित तौर पर यह कह दिया जाता है कि “जब बिजली कटेगी, तब अपने आप पता चल जाएगा।” उपभोक्ताओं का मानना है कि इस तरह का रवैया एक जिम्मेदार सार्वजनिक सेवा संस्था के अनुरूप नहीं है।
लोगों ने मांग की है कि यूपीसीएल बकाया बिल वाले उपभोक्ताओं के लिए पूर्व सूचना की अनिवार्य व्यवस्था लागू करे। साथ ही जिन मामलों में कर्मचारियों द्वारा अभद्र व्यवहार या अनावश्यक कठोरता बरती जाती है, उनकी शिकायतों की निष्पक्ष जांच कर आवश्यक कार्रवाई की जाए। उपभोक्ताओं का कहना है कि विभाग यदि सूचना प्रणाली को मजबूत कर दे तो अधिकांश विवाद स्वतः समाप्त हो सकते हैं और उपभोक्ताओं तथा विभाग के बीच बेहतर विश्वास कायम होगा।






