बद्रीनाथ धाम चढ़ावा चोरी में बड़ा धमाका : आरोपी चौहान के कबूलनामे से सीधे BKTC अध्यक्ष की चौखट तक पहुंचे तार!
यमकेश्वर चुनाव में खपाया बद्रीविशाल के खजाने का राशन? गणेश गोदियाल का सरकार पर अब तक का सबसे तीखा हमला
देहरादून। उत्तराखंड के सुप्रसिद्ध श्री बद्रीनाथ धाम में भगवान के चढ़ावे की चोरी का मामला अब सीधे सरकार और मंदिर समिति के शीर्ष नेतृत्व के गले की फांस बन चुका है। देहरादून स्थित प्रदेश कांग्रेस मुख्यालय में आयोजित एक आक्रामक प्रेस वार्ता में कांग्रेस के वरिष्ठ नेता गणेश गोदियाल ने इस पूरे प्रकरण को लेकर बेहद सनसनीखेज खुलासे किए हैं। गोदियाल ने साफ किया कि पुलिस जांच में गिरफ्तार हुए दूसरे आरोपी राजेंद्र चौहान के बयानों ने मंदिर प्रशासन के भीतर चल रहे एक बहुत बड़े संगठित सिंडिकेट की पोल खोलकर रख दी है।
पकड़े गए आरोपी पूर्व मंदिर अधिकारी राजेंद्र चौहान ने पूछताछ में कबूल किया है कि वह स्वतंत्र रूप से काम नहीं कर रहा था, बल्कि उसे हर काम के निर्देश प्रमोद नौटियाल से मिलते थे। मामले की गंभीरता यहीं खत्म नहीं होती, नौटियाल को ये सारे आदेश सीधे बद्री-केदार मंदिर समिति (BKTC) के अध्यक्ष हेमंत द्विवेदी से प्राप्त होते थे। गोदियाल ने इस खुलासे के आधार पर आरोप लगाया कि यह किसी छोटे कर्मचारी की व्यक्तिगत चोरी का मामला नहीं है, बल्कि ऊपर बैठे रसूखदारों के इशारे पर संचालित होने वाला एक सुगठित संगठित अपराध है।
इस महापाप की कड़ियां सीधे अध्यक्ष की चौखट से जुड़ने के बाद कांग्रेस ने हेमंत द्विवेदी के इस्तीफे की मांग को लेकर मोर्चा खोल दिया है। गोदियाल ने पुरजोर लहजे में कहा कि नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए द्विवेदी को एक मिनट भी पद पर रहने का हक नहीं है, वे तुरंत पद छोड़ें या मुख्यमंत्री उन्हें फौरन बर्खास्त करें। उन्होंने अंदेशा जताया कि अगर द्विवेदी अपने पद पर बने रहते हैं, तो वे जांच को प्रभावित करने के साथ-साथ महत्वपूर्ण साक्ष्यों और दस्तावेजों के साथ छेड़छाड़ कर सकते हैं।
इस पूरे संवेदनशील घटनाक्रम पर सूबे के मुखिया पुष्कर सिंह धामी की चुप्पी को लेकर भी कांग्रेस ने कड़े सवाल खड़े किए हैं। गोदियाल ने पूछा कि देश-विदेश के करोड़ों सनातनियों की अटूट आस्था के केंद्र बद्रीनाथ धाम के खजाने पर सरेआम डाका पड़ गया, लेकिन मुख्यमंत्री ने अब तक इस मुद्दे पर एक शब्द भी क्यों नहीं बोला है। उन्होंने मुख्यमंत्री की इस रहस्यमयी खामोशी पर तंज कसते हुए पूछा कि क्या सरकार इस महाघोटाले के असली गुनहगारों को संरक्षण दे रही है।
इतना ही नहीं, कांग्रेस ने भगवान बद्रीनाथ के नाम पर आने वाले राशन और धन के राजनीतिक दुरुपयोग का भी मुद्दा उठाया। आरोप है कि ऋषिकेश स्थित BKTC के कार्यालय से भारी मात्रा में राशन और धन आगामी चुनाव में व्यक्तिगत राजनीतिक लाभ उठाने के लिए यमकेश्वर विधानसभा क्षेत्र में भेजा जा रहा है। गोदियाल ने कहा कि भगवान के चढ़ावे का इस्तेमाल चुनावी फायदे के लिए करना बेहद निंदनीय और शर्मनाक हरकत है।
जब कांग्रेस ने इस व्यापक भ्रष्टाचार के खिलाफ आवाज उठाई, तो सरकार और मंदिर समिति ने ध्यान भटकाने के लिए गोदियाल के 9-10 साल पुराने कार्यकाल का मुद्दा उठाना शुरू कर दिया। इस पर पलटवार करते हुए गोदियाल ने कहा कि चोर की दाढ़ी में तिनका साफ दिख रहा है। उन्होंने वर्तमान अध्यक्ष को प्रेस क्लब पहुंचकर सार्वजनिक बहस करने की सीधी चुनौती दी थी, लेकिन सच का सामना करने की हिम्मत न होने के कारण वर्तमान अध्यक्ष वहां से मैदान छोड़कर भाग खड़े हुए।
गोदियाल ने साफ किया कि वर्ष 2022 से वे सहकारिता मंत्री धन सिंह रावत के कार्यकाल में हुए कथित घोटालों की जांच की मांग कर रहे हैं, और इसी का बदला लेने व असली मुद्दे से जनता का ध्यान भटकाने के लिए सरकार उनके खिलाफ झूठे और बेबुनियाद आरोपों का राग अलाप रही है। सरकार के इस रवैये को देखते हुए कांग्रेस ने मांग की है कि इस पूरे घोटाले की पारदर्शिता से जांच कराने के लिए सुप्रीम कोर्ट या हाई कोर्ट के किसी सिटिंग जज की अध्यक्षता में एक उच्च स्तरीय जांच समिति का गठन किया जाए।
हेमंत द्विवेदी के अतीत को खंगालते हुए कांग्रेस ने उनके पुराने ट्रैक रिकॉर्ड पर भी गंभीर सवाल उठाए हैं। द्विवेदी साल 2009 से 2012 के बीच तराई बीज विकास निगम के अध्यक्ष रहे थे, और उस दौरान उन पर गंभीर वित्तीय अनियमितताओं व घोटाले के आरोप लगे थे, जिसके चलते तत्कालीन सरकार ने उन्हें पद से हटा दिया था। गोदियाल ने तीखा सवाल दागा कि जिस व्यक्ति की पृष्ठभूमि पहले से ही दागी रही हो, उसे आखिर किस राजनीतिक दबाव या मजबूरी के तहत इतने पवित्र और संवेदनशील संस्थान का मुखिया बना दिया गया, इसका जवाब आज पूरा देश मांग रहा है।
इस महत्वपूर्ण पत्रकार वार्ता के दौरान कांग्रेस के संगठन महामंत्री राजेंद्र भंडारी, मुख्य प्रवक्ता डॉ. प्रतिमा सिंह, प्रवक्ता अभिनव थापर, राजेश चमोली, सोशल मीडिया विभाग के अमरजीत सिंह और अश्वनी बहुगुणा सहित कई वरिष्ठ पदाधिकारी व कार्यकर्ता मौजूद रहे, जिन्होंने एक सुर में सरकार के खिलाफ आर-पार की लड़ाई का ऐलान किया।






