उत्तराखंड में सुशासन का नया अध्याय, राज्यपाल और मुख्यमंत्री ने खोला विकास परियोजनाओं का पिटारा
ऋषिकेश (ब्यूरो)। देवभूमि उत्तराखंड की विकास यात्रा को नई रफ्तार देने के लिए शनिवार को ऋषिकेश के आईडीपीएल मैदान से एक बड़े अभियान का शंखनाद किया गया। राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल गुरमीत सिंह और मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने संयुक्त रूप से ‘सेवा, सुशासन एवं समर्पण: जन-जन की सरकार, जन-जन के द्वार’ सेवा पखवाड़ा कार्यक्रम का भव्य शुभारंभ किया। इस खास मौके पर दोनों दिग्गजों ने देहरादून जिले के निवासियों को बड़ी सौगात देते हुए 219 करोड़ रुपये से अधिक की लागत वाली 51 विकास परियोजनाओं का लोकार्पण और शिलान्यास किया।
यह महाअभियान असल में राज्य सरकार की लोकसेवा और पारदर्शिता के प्रति अटूट प्रतिबद्धता को दिखाता है। शासन की कल्याणकारी नीतियों का सीधा फायदा समाज के आखिरी पायदान पर खड़े व्यक्ति तक समय पर पहुंचाना ही इस पूरे कार्यक्रम का मुख्य आधार है। मंच से राज्यपाल ने मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी को सूबे के मुख्य सेवक के रूप में पांच साल से अधिक का सफल कार्यकाल पूरा करने पर बधाई दी और इसे जनता के अटूट विश्वास का प्रमाण बताया।

प्रशासन को सीधे जनता के दरवाजे तक ले जाने वाले इस विशेष अभियान का यह दूसरा चरण है। इससे पहले चले शुरुआती चरण में राज्यभर की 681 न्याय पंचायतों में विशेष शिविर लगाकर करीब 5.33 लाख से अधिक लोगों को सीधे सरकारी योजनाओं से जोड़ा गया था और मौके पर ही हजारों शिकायतों का निस्तारण किया गया था। अब इसी सफलता को आगे बढ़ाते हुए सरकार अगले 15 दिनों तक ब्लॉक और जिला स्तर पर विशेष चौपाल लगाकर आम जनता की समस्याओं को सुलझाएगी।
राज्यपाल ने अपने संबोधन में धामी सरकार द्वारा पिछले वर्षों में लिए गए कई साहसिक फैसलों को ऐतिहासिक बताया।उत्तराखंड देश का पहला ऐसा राज्य बन चुका है जहां समान नागरिक संहिता (यूसीसी) को अमलीजामा पहनाया गया है। इसके साथ ही युवाओं के भविष्य को सुरक्षित करने के लिए बनाया गया देश का सबसे सख्त नकल विरोधी कानून, जबरन धर्मांतरण पर रोक और सरकारी संपत्ति को नुकसान पहुंचाने वालों के खिलाफ कड़े विधिक प्रावधान राज्य में कानून व्यवस्था की नई नजीर पेश कर रहे हैं।
पहाड़ के विकास में आधी आबादी, युवाओं और सीमांत क्षेत्र के नागरिकों की भागीदारी को सबसे अहम माना गया है। राज्य की महिलाओं को सरकारी नौकरियों में 30 प्रतिशत क्षैतिज आरक्षण देने के साथ-साथ स्वयं सहायता समूहों को मजबूत कर ‘लखपति दीदी’ योजना से जोड़ा जा रहा है, जिसके तहत अब तक 2 लाख 65 हजार से अधिक महिलाएं आत्मनिर्भर बन चुकी हैं।
केदारनाथ-बदरीनाथ धाम का मास्टर प्लान के तहत पुनर्विकास, होमस्टे का विस्तार, ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट और जी-20 बैठकों के सफल आयोजनों ने उत्तराखंड को वैश्विक स्तर पर निवेश के एक नए बड़े केंद्र के रूप में स्थापित कर दिया है।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने जनता के प्रति आभार जताते हुए कहा कि उनके कार्यकाल का यह पड़ाव कोई उत्सव मनाने का नहीं, बल्कि आत्ममंथन और जनसेवा के संकल्प को और अधिक मजबूत करने का जरिया है। सरकार ने साल 2035 तक उत्तराखंड को देश का सबसे अग्रणी और श्रेष्ठ राज्य बनाने का एक बड़ा लक्ष्य तय किया है। इसी रोडमैप पर चलते हुए बुनियादी ढांचे, शिक्षा, स्वास्थ्य, पेयजल, चमचमाती सड़कों और उद्योगों के विकास पर चौतरफा काम चल रहा है।

राज्य की अर्थव्यवस्था को मजबूत करने के लिए उठाए गए कदमों का असर अब धरातल पर दिखने लगा है। ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट के दौरान हस्ताक्षरित करारों में से एक लाख करोड़ रुपये से अधिक का निवेश धरातल पर उतारा जा चुका है, जिससे रिवर्स पलायन को काफी बल मिल रहा है। इसके अलावा पिछले पांच सालों में पूरी पारदर्शिता के साथ 34 हजार से अधिक स्थानीय युवाओं को सरकारी विभागों में नियुक्तियां दी गई हैं। मुख्यमंत्री ने साफ निर्देश दिए हैं कि सभी आला अधिकारी खुद फील्ड में उतरकर चौपाल लगाएं ताकि कोई भी पात्र व्यक्ति हक से वंचित न रहे।
इस बड़े आयोजन के दौरान मंच पर कैबिनेट मंत्री रेखा आर्य, डॉ. धन सिंह रावत, खजान दास, भरत चौधरी के साथ ही केंद्रीय राज्य मंत्री अजय टम्टा और पूर्व मुख्यमंत्री डॉ. रमेश पोखरियाल निशंक मौजूद रहे। इनके अलावा राज्यसभा सांसद नरेश बंसल, महेंद्र भट्ट, क्षेत्रीय विधायक प्रेमचंद अग्रवाल, मुन्ना सिंह चौहान, जिलाधिकारी डॉ. आशीष चौहान और सूचना महानिदेशक बंशीधर तिवारी सहित शासन के कई वरिष्ठ अधिकारी और भारी संख्या में स्थानीय लोग मौजूद रहे।







