मोरी पुलिस की बड़ी कार्रवाई, अफीम उगाने वाले मालिकों के खिलाफ सख्त धाराओं में मुकदमा दर्ज
उत्तरकाशी। उत्तराखंड के सीमांत जनपद उत्तरकाशी में नशे के सौदागरों और अवैध खेती करने वालों के खिलाफ प्रशासन ने अब तक की सबसे बड़ी कार्रवाई को अंजाम दिया है। मोरी तहसील के बेहद दुर्गम क्षेत्र पेंसर में पुलिस और राजस्व विभाग की संयुक्त टीम ने छापेमारी कर भारी मात्रा में लहलहा रही अफीम की खेती को नष्ट कर दिया है।
अवैध नशे के खिलाफ चल रहे ‘ड्रग्स फ्री देवभूमि मिशन’ के तहत यह एक्शन पुलिस अधीक्षक कमलेश उपाध्याय के सीधे निर्देशों पर लिया गया है। विभाग को सूचना मिली थी कि मोरी के सुदूरवर्ती गांव पेंसर (कनुरा तोक मार्ग) में बड़े पैमाने पर बिना किसी लाइसेंस के पोस्त की खेती की जा रही है।
रविवार को पुलिस उपाधीक्षक बड़कोट चंचल शर्मा के पर्यवेक्षण में तहसीलदार सरदार सिंह चौहान और थानाध्यक्ष दीपक रावत ने एक बड़ी फोर्स के साथ इलाके की घेराबंदी की। टीम जब मौके पर पहुंची, तो करीब 75 वर्ग मीटर के दायरे में अफीम की अवैध फसल तैयार खड़ी मिली।
पुलिस ने तत्काल कार्रवाई करते हुए पूरी फसल को उखाड़कर नष्ट कर दिया। सबूत के तौर पर मौके से पोस्त और डंठल के सैंपल सुरक्षित किए गए हैं। इस मामले में पुलिस ने कठोर रुख अपनाते हुए जमीन के 31 मालिकों को नामजद किया है।
इन सभी 31 भू-स्वामियों के खिलाफ थाना मोरी में एनडीपीएस एक्ट (NDPS Act) की धारा 8/18 के तहत दो अलग-अलग मुकदमे दर्ज किए गए हैं। गौर करने वाली बात है कि एनडीपीएस एक्ट की धारा 18 के तहत अवैध अफीम की खेती करने पर 10 साल तक की कठोर जेल और भारी जुर्माने का प्रावधान है।
अवैध नशे की यह खेती अक्सर ऐसे इलाकों में की जाती है जहां पहुंचना बेहद मुश्किल होता है। पेंसर गांव का यह इलाका भी भौगोलिक दृष्टि से काफी चुनौतीपूर्ण है, लेकिन पुलिस ने नशा मुक्त अभियान के संकल्प को दोहराते हुए इस नेटवर्क को ध्वस्त किया है।
इस पूरी कार्रवाई में तहसीलदार सरदार सिंह चौहान, थानाध्यक्ष दीपक रावत के साथ कानूनगो अनिल असवाल और राजस्व उपनिरीक्षक संजय चौहान ने मुख्य भूमिका निभाई। पुलिस विभाग का कहना है कि नशीले पदार्थों की जड़ पर प्रहार जारी रहेगा और आने वाले दिनों में अन्य संदिग्ध क्षेत्रों में भी इसी तरह की छापेमारी की जाएगी।






