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देहरादून के दो शातिर अपराधियों पर गिरी गाज, डीएम सविन बंसल ने 6 महीने के लिए किया जिला बदर

By Rajat Sharma

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अपराध मुक्त देहरादून के लिए एक्शन मोड में प्रशासन, दो आदतन अपराधी जिले की सीमा से बाहर

देहरादून (ब्यूरो)। राजधानी में कानून-व्यवस्था को पटरी पर लाने और खौफ का पर्याय बन चुके अपराधियों की कमर तोड़ने के लिए जिला प्रशासन ने सख्त रुख अख्तियार कर लिया है। जिला मजिस्ट्रेट सविन बंसल ने गुंडा नियंत्रण अधिनियम के तहत बड़ी कार्रवाई करते हुए विकासनगर क्षेत्र के दो कुख्यात अपराधियों को 6 महीने के लिए जिला बदर करने का फरमान सुनाया है।

वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (SSP) की रिपोर्ट और विकासनगर कोतवाली प्रभारी की संस्तुति के बाद यह कड़ा कदम उठाया गया है। पुलिस ने इन अपराधियों के खिलाफ लंबे समय से मिल रही शिकायतों और उनके बढ़ते आपराधिक ग्राफ का पूरा कच्चा चिट्ठा जिला मजिस्ट्रेट न्यायालय के समक्ष पेश किया था।

प्रशासन की रडार पर पहला नाम आसिफ पुत्र राशिद का है, जो विकासनगर की मुस्लिम बस्ती का निवासी है। आसिफ के खिलाफ पुलिस रिकॉर्ड में संगीन मुकदमों की लंबी फेहरिस्त है। उस पर आर्म्स एक्ट के तहत करीब एक दर्जन मामले दर्ज हैं, जिसमें अपराध संख्या 368/21, 515/21 और हालिया 61/24 जैसे कई मुकदमे शामिल हैं। इसके अलावा लूट (धारा 392), चोरी और भारतीय न्याय संहिता की गंभीर धाराओं में भी वह नामजद है।

दूसरा अपराधी राहुल कश्यप है, जो विकासनगर के जीवनगढ़ स्थित कश्यप मोहल्ले का रहने वाला है। राहुल का आपराधिक इतिहास भी कम नहीं है; उस पर शस्त्र अधिनियम के साथ-साथ चोरी और आबकारी अधिनियम के तहत कई केस दर्ज हैं। विशेष रूप से उस पर चोरी (380/411 भादवि) और हाल ही में बीएनएस (BNS) की धाराओं के तहत मुकदमा संख्या 291/2024 पंजीकृत किया गया था।

जिला मजिस्ट्रेट न्यायालय ने पाया कि इन दोनों अपराधियों की छवि समाज के लिए खतरनाक बन चुकी थी। आम जनता के बीच इनका इतना खौफ था कि लोग इनके खिलाफ गवाही देने या शिकायत करने तक से डरते थे। कोर्ट ने इन्हें अपना पक्ष रखने के लिए पर्याप्त समय और नोटिस दिया था, लेकिन दबंगई के नशे में चूर ये अपराधी न तो न्यायालय में उपस्थित हुए और न ही कोई सफाई पेश की।

उत्तर प्रदेश गुंडा नियंत्रण अधिनियम 1970 की धारा 3 के तहत अब इन दोनों को गुंडा घोषित कर दिया गया है। आदेश के मुताबिक, आसिफ और राहुल कश्यप को अगले 6 महीने तक देहरादून जिले की भौगोलिक सीमा से बाहर रहना होगा। वे इस अवधि के दौरान बिना अनुमति जिले में प्रवेश नहीं कर पाएंगे और उन्हें अपने अस्थायी ठिकाने की जानकारी संबंधित थाने को देनी होगी।

उत्तराखंड के अन्य जिलों के आंकड़ों पर नजर डालें तो हाल के महीनों में हरिद्वार और उधम सिंह नगर के बाद देहरादून में अपराधियों को जिला बदर करने की प्रक्रिया में तेजी आई है। जानकार मानते हैं कि आगामी निकाय चुनाव और पर्यटन सीजन को देखते हुए प्रशासन किसी भी तरह की अराजकता बर्दाश्त करने के मूड में नहीं है। आदेश का उल्लंघन करने पर इन अपराधियों के खिलाफ तत्काल गिरफ्तारी और जेल भेजने की सख्त कार्रवाई की जाएगी।

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