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BKTC में बड़ा खेल : दर्जाधारी मंत्री ने पत्नी को ही बना डाला ‘चपरासी’, RTI में हुआ भंडाफोड़

By Rajat Sharma

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श्रद्धा के केंद्र में ‘सियासी लूट’? मंदिर समिति के उपाध्यक्ष पर अपनी ही पत्नी को सरकारी वेतन दिलाने का आरोप

जोशीमठ/देहरादून। देवभूमि के सबसे प्रतिष्ठित श्री बदरीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति (बीकेटीसी) से एक ऐसा मामला सामने आया है जिसने शुचिता और नैतिकता की धज्जियां उड़ा दी हैं। समिति के उपाध्यक्ष और दर्जाधारी राज्यमंत्री विजय कप्रवाण पर अपनी ही पत्नी को ‘चपरासी’ (अनुचर) नियुक्त कर सरकारी खजाने से वेतन दिलाने का सनसनीखेज आरोप लगा है। सूचना के अधिकार (RTI) के तहत निकली जानकारियों ने मंदिर समिति के भीतर चल रहे इस ‘पारिवारिक खेल’ को बेनकाब कर दिया है।

अधिवक्ता और सामाजिक कार्यकर्ता विकेश सिंह नेगी ने इन दस्तावेजों के आधार पर मंदिर समिति के कामकाज पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। नेगी का दावा है कि जहाँ एक ओर श्रद्धालु अपनी गाढ़ी कमाई बदरी-केदार के चरणों में अर्पित करते हैं, वहीं समिति के रसूखदार पदाधिकारी उस धन को निजी हितों के लिए ठिकाने लगा रहे हैं। RTI से पता चला है कि कप्रवाण ने अपनी पत्नी को ही चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी के तौर पर तैनात दिखाया है और उनके नाम पर 12 हजार रुपये प्रतिमाह का भुगतान ले रहे हैं।

नियमों के मुताबिक, उत्तराखंड सरकार विभिन्न बोर्डों और निगमों के दायित्वधारियों को सरकारी स्टाफ न होने पर निजी स्तर पर एक वैयक्तिक सहायक (PA) और एक चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी रखने की अनुमति देती है। इसके लिए पीए को 15 हजार और अनुचर को 12 हजार रुपये प्रतिमाह देने का प्रावधान है। लेकिन नैतिकता को ताक पर रखकर उपाध्यक्ष ने मंदिर समिति के ही किसी कर्मचारी को संबद्ध करने के बजाय अपने पड़ोस के एक युवक को पीए और घर की लक्ष्मी को ‘चपरासी’ बना दिया।

भ्रष्टाचार की परतें यहीं नहीं रुकतीं। बीकेटीसी का मुख्य कार्यालय जोशीमठ में है और कैंप कार्यालय देहरादून के कैनाल रोड पर स्थित है, जहां उपाध्यक्ष के लिए बाकायदा कमरा आवंटित है। इसके बावजूद कप्रवाण ने अपने गृह जनपद रुद्रप्रयाग में निजी आवास और कार्यालय दिखाया हुआ है। इसके एवज में वे हर महीने 25 हजार रुपये का आवास भत्ता भी डकार रहे हैं। यह सीधे तौर पर सरकारी नियमों और मंदिर समिति एक्ट का उल्लंघन माना जा रहा है।चौंकाने वाली बात यह भी है कि रुद्रप्रयाग स्थित इस कथित कार्यालय के लिए फर्नीचर और अन्य साजो-सामान की खरीदारी भी मंदिर समिति के बजट से ही की गई है।

हाल ही में बीकेटीसी ने यात्रा सीजन 2026-27 के लिए 121.07 करोड़ रुपये का भारी-भरकम बजट पारित किया है। ऐसे में एक तरफ समिति वीआईपी दर्शनों के लिए 11 लाख रुपये तक की भारी फीस वसूलने और गैर-सनातनियों के प्रवेश पर रोक जैसे कड़े फैसले ले रही है, वहीं दूसरी ओर शीर्ष नेतृत्व पर अपनी ही पत्नी को चपरासी बनाकर लाभ लेने के आरोपों ने सरकार की ‘जीरो टॉलरेंस’ नीति को कटघरे में खड़ा कर दिया है। विकेश नेगी ने अब इस पूरे प्रकरण की उच्च स्तरीय जांच और कड़ी कार्रवाई की मांग की है।

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