बहुगुणा की जयंती पर देहरादून में जुटे दिग्गज, CM धामी ने प्रतिमा पर किया माल्यार्पण
देहरादून। उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने शनिवार को उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और भारतीय राजनीति के दिग्गज रहे स्वर्गीय हेमवती नंदन बहुगुणा की 107वीं जयंती पर उन्हें भावपूर्ण श्रद्धांजलि अर्पित की।
घंटाघर के पास स्थित एमडीडीए कॉम्प्लेक्स पहुंचे मुख्यमंत्री ने बहुगुणा की प्रतिमा पर माल्यार्पण कर उनके राष्ट्र निर्माण में दिए गए योगदान को याद किया। इस मौके पर धामी ने उन्हें एक ऐसा दूरदर्शी नेता बताया जिसने हिमालयी क्षेत्रों की मुश्किलों को दिल्ली और लखनऊ की सत्ता के गलियारों में पुरजोर तरीके से रखा।
मुख्यमंत्री ने बहुगुणा के व्यक्तित्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि उनका पूरा जीवन जनसेवा और पारदर्शिता की मिसाल रहा है। उन्होंने भारतीय स्वतंत्रता संग्राम में बहुगुणा की सक्रिय भूमिका का जिक्र करते हुए बताया कि कैसे एक साधारण परिवार में जन्म लेने के बावजूद उन्होंने अपनी योग्यता के दम पर देश की राजनीति को नई दिशा दी। धामी ने साफ किया कि ‘हिमालय पुत्र’ के नाम से मशहूर बहुगुणा केवल एक राजनेता नहीं थे, बल्कि वे सामाजिक समरसता और समावेशी विकास के सच्चे पैरोकार थे।
पहाड़ी अंचलों के विकास को लेकर स्वर्गीय बहुगुणा के विजन को याद करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि आज उत्तराखंड जिस विकास पथ पर आगे बढ़ रहा है, उसकी नींव में बहुगुणा जैसे महापुरुषों के विचार शामिल हैं।
उन्होंने बताया कि बहुगुणा ने हमेशा उन क्षेत्रों के लिए काम किया जो भौगोलिक रूप से कठिन थे। मुख्यमंत्री ने जोर देकर कहा कि उनके आदर्श आज भी सरकार के लिए मार्गदर्शन का काम करते हैं और उनके द्वारा दिखाई गई राह पर चलकर ही जनकल्याण के लक्ष्यों को प्राप्त किया जा रहा है।
इस कार्यक्रम के दौरान ऐतिहासिक तथ्यों को साझा करते हुए यह भी याद किया गया कि कैसे बहुगुणा ने छात्र राजनीति से लेकर केंद्र सरकार में महत्वपूर्ण मंत्रालयों और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री पद तक का सफर तय किया। बहुगुणा के भ्रष्टाचार मुक्त शासन के संकल्प को मुख्यमंत्री धामी ने वर्तमान राजनीति के लिए सबसे बड़ी प्रेरणा बताया। उन्होंने कहा कि उनके कार्यकाल में लिए गए कड़े फैसले आज भी मिसाल के तौर पर देखे जाते हैं।
श्रद्धांजलि सभा में मुख्यमंत्री के साथ पूर्व मुख्यमंत्री विजय बहुगुणा भी मौजूद रहे। इसके अलावा कैबिनेट मंत्री सुबोध उनियाल, सौरभ बहुगुणा, खजान दास और विधायक दुर्गेश्वर लाल समेत कई अन्य जनप्रतिनिधियों ने भी स्वर्गीय बहुगुणा की प्रतिमा पर पुष्प अर्पित कर उन्हें याद किया। सभी नेताओं ने एक स्वर में कहा कि बहुगुणा का योगदान केवल एक राज्य तक सीमित नहीं था, बल्कि उन्होंने पूरे देश के राजनीतिक ढांचे को अपनी ईमानदारी और कार्यकुशलता से प्रभावित किया।
बहुगुणा की विरासत का जिक्र करते हुए यह भी रेखांकित किया गया कि आज की युवा पीढ़ी को उनके जीवन संघर्ष से सीखने की जरूरत है। 1942 के ‘भारत छोड़ो आंदोलन’ के दौरान उनका संघर्ष और उसके बाद उत्तर प्रदेश की बागडोर संभालते हुए शिक्षा और बुनियादी ढांचे में किए गए बदलावों को आज भी सराहा जाता है। धामी ने अंत में दोहराया कि स्वर्गीय बहुगुणा के विचार उत्तराखंड और उत्तर प्रदेश दोनों राज्यों के उज्ज्वल भविष्य के लिए हमेशा प्रेरणा स्रोत बने रहेंगे।






