देश विदेश क्राइम उत्तराखंड मनोरंजन बिज़नेस ऑटो टेक्नोलॉजी खेल धर्म हेल्थ लाइफस्टाइल ई - पेपर

Hindu Mythology : जानें क्यों मां काली के पैरों के नीचे शिवजी को दर्शाया जाता है

By Rajat Sharma

Published on:


Advertisement

Hindu Mythology : मां काली के पैरों के नीचे भगवान शिव को दिखाना केवल पौराणिक कथा नहीं है, बल्कि इसके पीछे एक गहरा दार्शनिक संदेश छिपा है।

यह दृश्य शक्ति, चेतना और संतुलन का प्रतीक है। हिन्दू धर्म में मां काली के अनेक रूपों का वर्णन मिलता है, और उनका यह रूप राक्षस रक्तबीज के वध से जुड़ा हुआ है।

राक्षस रक्तबीज और महाकाली का अवतार

कथा के अनुसार, राक्षस रक्तबीज अत्यंत शक्तिशाली था। उसके शरीर से गिरने वाली हर एक बूंद से एक नया रक्तबीज उत्पन्न हो जाता था। इस कारण तीनों लोक त्रस्त हो गए।

देवताओं की प्रार्थना पर माता दुर्गा ने काला वर्ण, प्रचंड शक्ति और अत्यंत विनाशकारी तेज से भरा हुआ महाकाली रूप धारण किया। मां काली ने युद्ध में उतरकर रक्तबीज और अन्य राक्षसों का नाश करना शुरू किया।

उन्होंने रक्त को जमीन पर गिरने से पहले ही पी लिया ताकि कोई नया रक्तबीज जन्म न ले सके। इस विनाशकारी संघर्ष में उनका क्रोध इतना बढ़ गया कि पूरे संसार के लिए खतरा उत्पन्न हो गया।

शिव का मार्ग में शांति लाना

जब काली का क्रोध असंतुलित रूप लेने लगा, देवताओं ने भगवान शिव की सहायता मांगी। शिवजी जानते थे कि यदि काली इस रूप में आगे बढ़ती रहीं, तो सृष्टि का संतुलन खतरे में पड़ सकता है। इसलिए महादेव ने चुपचाप मां काली के मार्ग में लेटने का निर्णय लिया।

जैसे ही मां काली का पैर शिव की छाती पर पड़ा, उन्हें एहसास हुआ कि वे अपने ही प्रिय पति पर कदम रख रही हैं। तुरंत उनका क्रोध शांत हो गया और वे अपने सौम्य रूप में लौट आईं।

दार्शनिक महत्व

यह दृश्य केवल धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण नहीं है, बल्कि गहरे दार्शनिक अर्थ भी रखता है।

काली ऊर्जा, गति और शक्ति का प्रतीक हैं। शिव स्थिरता, शांति और चेतना के प्रतीक हैं।

हिंदू दर्शन में कहा गया है कि शक्ति बिना चेतना के व्यर्थ है और चेतना बिना शक्ति के निष्क्रिय। काली का शिव पर खड़े होना यही दर्शाता है कि शक्ति की हर क्रिया का आधार चेतना ही है।

जीवन में संतुलन का संदेश

इस कथा से यह भी सीख मिलती है कि जीवन में शक्ति और शांत मन दोनों का संतुलन आवश्यक है। जब शक्ति (काली) नियंत्रण से बाहर हो जाए, तो केवल स्थिर चेतना (शिव) ही उसे संतुलित कर सकती है।

यही संतुलन सृष्टि और जीवन की स्थिरता का आधार है। शक्ति के बिना चेतना अधूरी है और चेतना के बिना शक्ति निष्फल।

Leave a Comment