देहरादून : उत्तराखंड पंचायती राज विभाग ने एक अनूठी पहल करते हुए पहली बार स्वयंसेवी संगठनों (एनजीओ) के सदस्यों के लिए एक परीक्षा का आयोजन किया। राज्य बनने के बाद यह पहला मौका है जब पंचायती राज निदेशालय द्वारा इस तरह की परीक्षा आयोजित की गई है, जिसमें 109 एनजीओ ने हिस्सा लिया।
पंचायती राज निदेशक निधि यादव ने बताया कि इस परीक्षा का उद्देश्य राष्ट्रीय ग्राम स्वराज योजना के तहत क्षमता निर्माण (कैपेसिटी बिल्डिंग) के लिए एनजीओ का चयन करना है। चूंकि ब्लॉक और जिला स्तर पर विभाग ने अपने अधिकारियों द्वारा क्षमता निर्माण का कार्य कराया है, लेकिन दूर-दराज के गांवों में प्रशिक्षण देने के लिए एनजीओ को मास्टर ट्रेनर के तौर पर शामिल किया गया है।
परीक्षा क्यों?
निदेशक निधि यादव के अनुसार, पूर्व में भारत सरकार तक ट्रेनिंग को लेकर शिकायतें पहुंची थीं और जांच भी हुई थी कि निचले स्तर पर प्रशिक्षण का विभाग का मैंडेट ठीक से पहुंच नहीं पाता। उन्होंने कहा कि जब तक कार्य करने वाले लोगों को उनके दायित्व और कर्तव्यों की जानकारी नहीं होगी, तब तक व्यवस्था को चलाने में दिक्कत आएगी। इसी कारण, विभाग के मैंडेट की बेहतर समझ सुनिश्चित करने के लिए एनजीओ का यह टेस्ट लिया गया।
चयन प्रक्रिया और उद्देश्य
इस परीक्षा में सफल होने वाले एनजीओ को पहले ‘मास्टर ट्रेनर’ के रूप में प्रशिक्षित किया जाएगा (टीओटी-ट्रेनिंग ऑफ ट्रेनर्स), और फिर उन्हें जिलों में प्रशिक्षण के लिए भेजा जाएगा। ये मास्टर ट्रेनर ग्राम प्रधानों, वार्ड सदस्यों और पंचायत प्रतिनिधियों को विभाग की सामान्य योजनाओं, उनके अधिकारों और कर्तव्यों के बारे में जानकारी देंगे।
परीक्षा में लगभग 117 एनजीओ में से 109 ने भाग लिया, जिसमें एक एनजीओ से तीन मास्टर ट्रेनर शामिल हुए थे। परीक्षा के परिणामों के आधार पर मेरिट लिस्ट तैयार की जाएगी और प्रत्येक ब्लॉक में एक से दो एनजीओ को क्षमता निर्माण के काम के लिए रखा जाएगा।
निदेशक ने जोर देकर कहा कि एनजीओ का मुख्य कार्य पंचायत प्रतिनिधियों की क्षमता निर्माण करना है ताकि आम आदमी ग्राम पंचायत डेवलपमेंट प्लान (जीपीडीपी) बनाने की खुली बैठकों में आत्मविश्वास के साथ शामिल हो सके।
उन्होंने कहा कि मोबिलाइजेशन (लोगों को एकत्रित करना) एक बड़ी चुनौती है, और ये मास्टर ट्रेनर गांव वालों को योजनाओं से अवगत कराने और पंचायत सदस्यों को उनकी जिम्मेदारियों की जानकारी देने में मदद करेंगे।
विभाग ने पिछले एक साल में कई मॉड्यूल विकसित किए हैं, जो इन मास्टर ट्रेनरों को पढ़ाए जाएंगे और वे इन्हें जमीनी स्तर पर पहुंचाएंगे।







