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Ashtami Navami Havan Vidhi : नवरात्रि में हवन कैसे करें? जानें अष्टमी-नवमी की आसान पूजा विधि

By Rajat Sharma

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Ashtami Navami Havan Vidhi : हिंदू धर्म में शारदीय नवरात्रि का विशेष स्थान है। यह पर्व हर साल बड़ी श्रद्धा और भक्ति भाव से मनाया जाता है।

इस बार शारदीय नवरात्रि 22 सितंबर से शुरू होकर 2 अक्टूबर को विजयदशमी के साथ समाप्त हो रही है। नौ दिनों तक मां दुर्गा के अलग-अलग स्वरूपों की पूजा की जाती है और भक्तजन उपवास रखते हैं।

नवरात्र के आख़िरी दो दिन – अष्टमी और नवमी – को विशेष पवित्र माना गया है। इन तिथियों पर कन्या पूजन और हवन का विधान है।

धार्मिक मान्यता है कि विधिपूर्वक किया गया हवन घर में सुख-समृद्धि लाता है और मां दुर्गा की कृपा प्राप्त होती है।

अष्टमी और नवमी पर हवन का महत्व

हवन को नवरात्रि में सबसे शुभ कर्मों में गिना गया है। मान्यता है कि अग्नि में दी गई आहुति न केवल देवी को प्रसन्न करती है बल्कि साधक के जीवन में सकारात्मक ऊर्जा भी भर देती है।

हवन का धुआं वातावरण को शुद्ध करता है और नकारात्मक शक्तियों को दूर करता है। यही कारण है कि अष्टमी और नवमी के दिन हवन करना विशेष फलदायी माना जाता है।

हवन के लिए आवश्यक सामग्री

हवन के लिए कुछ विशेष सामग्रियों की आवश्यकता होती है। इनमें सूखा नारियल, मुलैठी की जड़, कलावा, लाल कपड़ा, हवन कुंड, अश्वगंधा, ब्राह्मी, नीम और बेल की लकड़ी, चंदन, पीपल या आम की लकड़ी, गूलर की छाल शामिल हैं।

आहुति देने के लिए काला तिल, चावल, जौ, गुग्गल, कपूर, गाय का घी, लौंग, इलायची, लोभान और शक्कर का उपयोग किया जाता है।

अष्टमी और नवमी हवन विधि

सुबह ब्रह्म मुहूर्त में स्नान कर साफ वस्त्र पहनें। घर के शुभ स्थान पर हवन कुंड स्थापित करें और उस पर स्वास्तिक बनाएं।

दीपक जलाकर मां दुर्गा के नौ रूपों का पूजन करें। आम की लकड़ी से अग्नि प्रज्वलित करें और ‘ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे स्वाहा’ मंत्र के साथ आहुति अर्पित करें।

घी, जौ, तिल, चावल, गुग्गल आदि अग्नि में समर्पित करें।

अंत में पूर्णाहुति देकर मां से सुख, शांति और समृद्धि की प्रार्थना करें।

हवन के नियम

स्नान कर पवित्र वस्त्र धारण करें। हवन कुंड को उत्तर या पूर्व दिशा की ओर रखकर हवन करें।

सबसे पहले गणेश जी का ध्यान और संकल्प लें।

आहुति देते समय मंत्रों का उच्चारण करें। हवन पूर्ण होने पर आरती करें और प्रसाद बांटें।

आहुति के मंत्र

हवन के समय अलग-अलग देवताओं के लिए मंत्र उच्चारित किए जाते हैं, जैसे –

ऊं गणेशाय नम: स्वाहा

ऊं दुर्गाय नम: स्वाहा

ऊं नवग्रहाय नम: स्वाहा

ऊं शिवाय नम: स्वाहा

ऊं विष्णुवे नम: स्वाहा

इसी प्रकार अन्य देवी-देवताओं के नाम के साथ आहुति देकर हवन को पूर्ण किया जाता है।

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