Pitru Paksha Dashami Shraddha : आज पितृपक्ष की दशमी तिथि है। मान्यता है कि इस दिन किए गए श्राद्ध और तर्पण से पितर प्रसन्न होकर परिवार को आशीर्वाद देते हैं।
कहा जाता है कि साल में कम से कम एक बार पितरों की तिथि पर श्राद्ध करना आवश्यक होता है। इससे परिवार में सुख, शांति और समृद्धि बनी रहती है।
दशमी श्राद्ध किसके लिए किया जाता है?
दशमी श्राद्ध उन पितरों के लिए किया जाता है जिनका निधन दशमी तिथि को हुआ हो। चाहे शुक्ल पक्ष हो या कृष्ण पक्ष, दोनों दशमी तिथियों पर यह श्राद्ध किया जा सकता है।
दशमी श्राद्ध के शुभ मुहूर्त
कुतुप मुहूर्त – सुबह 11:51 बजे से दोपहर 12:40 बजे तक
रौहिण मुहूर्त – दोपहर 12:40 बजे से 01:30 बजे तक
अपराह्न काल – दोपहर 01:30 बजे से 03:57 बजे तक
दशमी श्राद्ध की विधि
यदि संभव हो तो श्राद्ध गंगा नदी के किनारे करें। यदि यह संभव न हो तो घर पर भी श्रद्धा के साथ विधि पूरी की जा सकती है। इस दिन ब्राह्मणों को भोजन कराना और भोजन के बाद दक्षिणा देना शुभ माना जाता है।
श्राद्ध पूजा का आरंभ दोपहर में करना चाहिए। किसी योग्य ब्राह्मण की सहायता से मंत्रों का उच्चारण करते हुए तर्पण करें।
पूजा के बाद जो भोग अर्पित किया जाए, उसका एक हिस्सा गाय, कुत्ते और कौवों को अवश्य दें।
भोजन परोसते समय मन ही मन पितरों को स्मरण करें और उनसे श्राद्ध स्वीकार करने की प्रार्थना करें।
श्राद्ध का महत्व
धार्मिक मान्यता है कि पितरों की कृपा दृष्टि से परिवार में खुशहाली और उन्नति बनी रहती है। दशमी श्राद्ध का विधिवत पालन करने से पितर तृप्त होते हैं और घर में शांति बनी रहती है।











