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महाशिवरात्रि पर्व पर विशेष : महाशिवरात्रि के दुर्लभ संयोग में नंदीपीठ अर्चना करने से होंगे आपके सभी मनोरथ पूर्ण

टीम डिजिटल : 8 मार्च 2024 शुक्रवार को महाशिवरात्रि पर त्रयोदशी द्विधा चतुर्दशी तिथि का संयोग बन रहा है। महाशिवरात्रि पर बेहद दुर्लभ संयोग बन रहे हैं, जिससे ग्रह-नक्षत्र का शुभ फल प्राप्त होगा और व्रत से प्राप्त पुण्य फल से जन्म मरण के बंधन से मुक्त हो जाते हैं।

फाल्गुनकृष्णचतुर्दश्यामादिदेवो महानिशि।
शिवलिंगतयोद्भूत: कोटिसूर्यसमप्रभ:॥

ईशान संहिता में बताया गया है कि फाल्गुन मास की कृष्ण चतुर्दशी की रात्रि में आदिदेव भगवान शिव करोड़ों सूर्यों के समान प्रभाव वाले शिवलिंग रूप में प्रकट हुए थे। माना जाता है कि सृष्टि की शुरुआत में इसी दिन आधी रात में भगवान शिव का निराकार से साकार रूप में (ब्रह्म से रुद्र के रूप में) अवतरण हुआ था।

– प्रलय की बेला में इसी दिन प्रदोष के समय भगवान शिव तांडव करते हुए ब्रह्मांड को तीसरे नेत्र की ज्वाला से भस्म कर देते हैं। इसलिए इसे महाशिवरात्रि या जलरात्रि भी कहा गया है।

इस बार महाशिवरात्रि पर अद्भुत संयोग बन रहा है। इस साल प्रदोष और महाशिवरात्रि का पर्व एक ही दिन मनाया जाएगा। प्रदोष और महाशिवरात्रि दोनों का दिन महादेव को समर्पित होता हैl प्रदोष का व्रत त्रयोदशी तिथि को रखा जाता है, जबकि महाशिवरात्रि का व्रत फाल्गुन माह के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि को रखा जाता है।

पंचांग के अनुसार 8 मार्च शुक्रवार को दिनभर त्रयोदशी तिथि रहेगी और रात 09 बजकर 57 मिनट से चतुर्दशी तिथि शुरू होगी जोकि अगले दिन 09 मार्च को संध्याकाल 06 बजकर 17 मिनट तक रहेगी। प्रदोष व्रत उदयातिथि के हिसाब से रखा जाता है जबकि महाशिवरात्रि व्रत में रात्रि का विशेष महत्‍व होता हैl इस कारण से शुक्र प्रदोष और महाशिवरात्रि व्रत एक ही दिन यानी 8 मार्च को रखे जाएंगे।

महाशिवरात्रि 2024 चार प्रहर मुहूर्त:-

रात्रि प्रथम प्रहर पूजा समय – शाम 06 बजकर 25 मिनट से लेकर रात 09 बजकर 28 मिनट तक है।

रात्रि द्वितीय प्रहर पूजा समय रात 09 बजकर 28 मिनट से लेकर 9 मार्च को रात 12 बजकर 31 मिनट तक है।

रात्रि तृतीय प्रहर पूजा समय रात 12 बजकर 31 मिनट से लेकर प्रातः 03 बजकर 34 मिनट तक है।

रात्रि चतुर्थ प्रहर पूजा समय प्रात: 03.34 से लेकर प्रात: 06:37 है।

निशिता काल मुहूर्त – दिनांक 09 मार्च को रात में 12 बजकर 07 मिनट से 12 बजकर 55 मिनट तक है।

व्रत पारण समय – दिनांक 09 मार्च को सुबह 06 बजकर 37 मिनट से दोपहर 03 बजकर 28 मिनट तक है।

महाशिवरात्रि वाले दिन श्रवण नक्षत्र का संयोग भी बन रहा है। इस दिन से अगर प्रदोष तिथि या चतुर्दशी तिथि का व्रत का आरंभ करना चाहते हैं तो श्रवण नक्षत्र का शुभ फल प्राप्त होगा। इस नक्षत्र के स्वामी स्वयं शनिदेव हैं और शनिदेव के गुरु महादेव हैं।

ऐसे में आपको शनि के अशुभ प्रभाव से मुक्ति मिलेगी और इस नक्षत्र में शुरू किए गए व्रत हमेशा कल्याणकारी रहेंगे। दूसरी बात यह है कि भगवान शिव को श्रवण नक्षत्र अत्यंत प्रिय है।

इस दिन रूद्र अर्चना करने से और रुद्राभिषेक करने से अनन्त पुण्यो की प्राप्ति होती है और यदि शिव के साथ पीठार्चन विधि पूजा करने से सभी प्रकार की सिद्धि की प्राप्ति होती हैl यह अर्चना कामपीठ या नंदीपीठ या गणपीठ विधि से करने पर ग्रह दोष निवारण होता है।

फलित ज्योतिष विशेषज्ञ
राज कुमार शर्मा
आनी कुल्लू हिमाचल प्रदेश
9817819789

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